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खबरों के खिलाड़ी: क्या सीईओ की नियुक्ति के बाद बदलेगी राम मंदिर पर होने वाली सियासत? विश्लेषकों से जानें
Sat, 05 Sep 2026 05:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 05 Sep 2026 05:23 PM IST
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
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राम मंदिर ट्रस्ट में पहली बार सीईओ की नियुक्ति हो गई है। मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी को लेकर हुए बवाल के बाद ये बड़ा बदलाव किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस बदलाव के बाद क्या ट्रस्ट का ट्रस्ट लौटेगा। नए सीईओ की नियुक्ति के बाद राजनीतिक गलियारों में राम मंदिर मुद्दे पर किस तरह का बदलाव होगा। कुछ ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
अनुराग वर्मा: एक तरफ मंदिर ट्रस्ट का भरोसा है और दूसरी तरफ सियासत है। ये दोनों मामलों का घालमेल है। विधानसभा चुनाव के दौरान ये मामला ठंडा हो पाएगा या नहीं उसका अभी अंदाजा लगा पाना जल्दबाजी होगी। इसके बाद भी विपक्ष उसका लाभ नहीं उठा पाए उसी के प्रयास में ये कदम उठाया गया है।
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अनुराग वर्मा: एक तरफ मंदिर ट्रस्ट का भरोसा है और दूसरी तरफ सियासत है। ये दोनों मामलों का घालमेल है। विधानसभा चुनाव के दौरान ये मामला ठंडा हो पाएगा या नहीं उसका अभी अंदाजा लगा पाना जल्दबाजी होगी। इसके बाद भी विपक्ष उसका लाभ नहीं उठा पाए उसी के प्रयास में ये कदम उठाया गया है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: भरोसा लौटाने की योजना होती तो जिस जगह सेना के एक पूर्व अधिकारी को बैठाया गया है वहां कोई शंकराचार्य बैठाए गए हैं। ये एक स्ट्रैटेजी के तहत किया गया है। विपक्ष की अब दुविधा ये है कि अब वो अगर चुनाव के दौरान सवाल उठाएगा तो कहा जाएगा कि देखिए ये सेना के शौर्य पर सवाल उठा रहे हैं।
विनोद अग्निहोत्री: ये कहना कि विपक्ष अब सवाल नहीं उठा पाएगा ये गलत है। सवाल तो विपक्ष उठाएगा ही क्योंकि घोटाला तो जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के पहले का है। मुझे लगता है कि विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी के पास विधानसभा चुनाव के दौरान ये मुद्दा रहेगा। एक अच्छे साफ सुथरी छवि के चेहरे को इस पद पर लाकर डैमेज कंट्रोल तो किया गया है। उनके आने से एक अनुशासन की स्थिति बनेगी। उम्मीद यही है कि उनके आने से बहुत सी चीजें वहां पर ठीक भी होंगी। जहां तक भाजपा को फायदा मिलने की बात है तो फायदा तब मिलता जब जो लोग पकड़े गए हैं उनके अलावा कुछ बड़े पदों पर बैठे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होती भले घोर लापरवाही के मामले पर होती।
विनोद अग्निहोत्री: ये कहना कि विपक्ष अब सवाल नहीं उठा पाएगा ये गलत है। सवाल तो विपक्ष उठाएगा ही क्योंकि घोटाला तो जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के पहले का है। मुझे लगता है कि विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी के पास विधानसभा चुनाव के दौरान ये मुद्दा रहेगा। एक अच्छे साफ सुथरी छवि के चेहरे को इस पद पर लाकर डैमेज कंट्रोल तो किया गया है। उनके आने से एक अनुशासन की स्थिति बनेगी। उम्मीद यही है कि उनके आने से बहुत सी चीजें वहां पर ठीक भी होंगी। जहां तक भाजपा को फायदा मिलने की बात है तो फायदा तब मिलता जब जो लोग पकड़े गए हैं उनके अलावा कुछ बड़े पदों पर बैठे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होती भले घोर लापरवाही के मामले पर होती।