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खेतों में घूम रहे बाघ और तेंदुए, कैसे करें किसानी
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बांकेगंज आबादी से सटे जंगल में मौजूद बाघ। ( फाइल फोटो)
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल से सटे खेतों में बाघ और तेंदुओं ने अपना बसेरा बना रखा है। ऐसे में यहां रहने वाले लोगों के लिए खेती-बाड़ी करना मुश्किल हो रहा है। इन दिनों गन्ने की फसल खेतों में तैयार खड़ी है, ऐसे में किसान और मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर गन्ने की छिलाई कर रहे हैं और उनमें आए दिन सामने आने वाले मामलों को लेकर दहशत भी है।
करीब तीन दिन पहले दक्षिण खीरी वन प्रभाग की गोला पश्चिम रेंज अंतर्गत बांकेगज कस्बे से पांच किलोमीटर दूर पहाड़पुर गांव के पास एक बाघ ने खेत में बछड़े का शिकार किया था। यह बाघ अभी पहाड़पुर गांव के आसपास खेतों में मौजूद बताया जा रहा है। हालांकि बछड़े का शिकार करने के बाद बाघ की कोई गतिविधि सामने नहीं आई है। बावजूद इसके किसान और मजदूर खेतों में गन्ना काटने जाने से डर रहे हैं।
उधर मैलानी रेंज जंगल से सटे चौधीपुर गांव के पास पिछले करीब दस दिन से एक तेंदुआ सक्रिय है। इसने गांव के पास ही गन्ने के खेतों में अपना डेरा जमा रखा है। पिछले दिनों इस तेंदुए ने एक बकरी का शिकार किया और एक कुत्ते पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। बुधवार को तेंदुआ खेत जा रहे ग्रामीणों के ठीक सामने आ गया था। ऐसी स्थिति में किसानों की खेती-बाड़ी चौपट होने के साथ ही उनका जीना मुहाल हो गया है।
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सर्दियों के मौसम में गन्ने के खेत बन जाते हैं बाघ, तेंदुओं का ठिकाना
सर्दियों की शुरुआत में जब गन्ने की फसल पूरी तैयार होती है, उस समय जंगल से निकल कर कई बाघ और तेंदुए गन्ने के खेतों में अपना बसेरा कर लेते हैं। कभी-कभी यह हिंसक जानवर आबादी के निकट तक पहुंच जाते हैं।
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वन विभाग की बढ़ी मुसीबत
इन दिनों बाघों के खेतों में बसेरा बनाने और आए दिन उनका ग्रामीणों से आमना-सामना होने से वन विभाग की मुसीबते बढ़ गईं हैं। अलग-अलग जगहों पर खेतों में विचरण करने वाले बाघों और तेंदुओं की निगरानी वन विभाग के लिए काफी मुसीबत वाली साबित हो रही है।
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जंगल से सटे खेतों में गन्ने की खेती होने से बाघ और तेंदुओं के बाहर निकलने की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ इंसानों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग है। ग्रामीणों को भी इस संबध में जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक,दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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मोबाइल एप से बाघ की गतिविधियां मालूम करने की कोशिश
ममरी। महेशपुर रेंज के वनकर्मियों ने अधिकारियों के निर्देश पर गुरुवार सवेरे देवीपुर बीट जंगल के आसपास बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए मोबाइल एप के जरिए पेट्रोलिंग की, लेकिन बाघ की लोकेशन पता लगाने में नाकाम रहे।
रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह और डीएफओ समीर कुमार ने बाघ प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल एप से पेट्रोलिंग कराने का निर्देश दिए, जिसके बाद गुरुवार सवेरे मौठीखेड़ा, पड़री, शिवपुरी, पल्हनापुर, परवस्तनगर, सुंदरपुर, घमहाघाट के आसपास गन्ने के खेतों, कठिना नदी के किनारे पेट्रोलिंग कराई गई। साथ ही खेतों में काम करते हुए लोगों से जानकारी भी ली गई लेकिन बाघ का कहीं पर मूवमेंट नहीं मिला। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि हिंसक वन्य जीव जंगल में चले गए हैं। पेट्रोलिंग टीम का नेतृत्व कर रहे फारेस्टर जगदीश वर्मा, एसके शुक्ल ने बताया कि वन बीट के वन कर्मियों, वन वॉचरों, बाघ मित्रों को गांव में भेजकर जन जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है। साथ ही वन्यजीवों की चहल कदमी, संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने को भी कहा गया है। संवाद
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करीब तीन दिन पहले दक्षिण खीरी वन प्रभाग की गोला पश्चिम रेंज अंतर्गत बांकेगज कस्बे से पांच किलोमीटर दूर पहाड़पुर गांव के पास एक बाघ ने खेत में बछड़े का शिकार किया था। यह बाघ अभी पहाड़पुर गांव के आसपास खेतों में मौजूद बताया जा रहा है। हालांकि बछड़े का शिकार करने के बाद बाघ की कोई गतिविधि सामने नहीं आई है। बावजूद इसके किसान और मजदूर खेतों में गन्ना काटने जाने से डर रहे हैं।
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उधर मैलानी रेंज जंगल से सटे चौधीपुर गांव के पास पिछले करीब दस दिन से एक तेंदुआ सक्रिय है। इसने गांव के पास ही गन्ने के खेतों में अपना डेरा जमा रखा है। पिछले दिनों इस तेंदुए ने एक बकरी का शिकार किया और एक कुत्ते पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। बुधवार को तेंदुआ खेत जा रहे ग्रामीणों के ठीक सामने आ गया था। ऐसी स्थिति में किसानों की खेती-बाड़ी चौपट होने के साथ ही उनका जीना मुहाल हो गया है।
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सर्दियों के मौसम में गन्ने के खेत बन जाते हैं बाघ, तेंदुओं का ठिकाना
सर्दियों की शुरुआत में जब गन्ने की फसल पूरी तैयार होती है, उस समय जंगल से निकल कर कई बाघ और तेंदुए गन्ने के खेतों में अपना बसेरा कर लेते हैं। कभी-कभी यह हिंसक जानवर आबादी के निकट तक पहुंच जाते हैं।
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वन विभाग की बढ़ी मुसीबत
इन दिनों बाघों के खेतों में बसेरा बनाने और आए दिन उनका ग्रामीणों से आमना-सामना होने से वन विभाग की मुसीबते बढ़ गईं हैं। अलग-अलग जगहों पर खेतों में विचरण करने वाले बाघों और तेंदुओं की निगरानी वन विभाग के लिए काफी मुसीबत वाली साबित हो रही है।
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जंगल से सटे खेतों में गन्ने की खेती होने से बाघ और तेंदुओं के बाहर निकलने की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ इंसानों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग है। ग्रामीणों को भी इस संबध में जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक,दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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मोबाइल एप से बाघ की गतिविधियां मालूम करने की कोशिश
ममरी। महेशपुर रेंज के वनकर्मियों ने अधिकारियों के निर्देश पर गुरुवार सवेरे देवीपुर बीट जंगल के आसपास बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए मोबाइल एप के जरिए पेट्रोलिंग की, लेकिन बाघ की लोकेशन पता लगाने में नाकाम रहे।
रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह और डीएफओ समीर कुमार ने बाघ प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल एप से पेट्रोलिंग कराने का निर्देश दिए, जिसके बाद गुरुवार सवेरे मौठीखेड़ा, पड़री, शिवपुरी, पल्हनापुर, परवस्तनगर, सुंदरपुर, घमहाघाट के आसपास गन्ने के खेतों, कठिना नदी के किनारे पेट्रोलिंग कराई गई। साथ ही खेतों में काम करते हुए लोगों से जानकारी भी ली गई लेकिन बाघ का कहीं पर मूवमेंट नहीं मिला। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि हिंसक वन्य जीव जंगल में चले गए हैं। पेट्रोलिंग टीम का नेतृत्व कर रहे फारेस्टर जगदीश वर्मा, एसके शुक्ल ने बताया कि वन बीट के वन कर्मियों, वन वॉचरों, बाघ मित्रों को गांव में भेजकर जन जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है। साथ ही वन्यजीवों की चहल कदमी, संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने को भी कहा गया है। संवाद