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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Given the minister of labor , undeterred by the hunger - thirst fair anger

मंत्री को देखते ही भूख-प्यास से व्याकुल मजदूरों का फूटा गुस्सा

Fri, 29 May 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी Updated Fri, 29 May 2015 02:05 AM IST
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मंझनपुर। मुरी ट्रेन हादसे की जांच को आए रेल राज्य मंत्री को देखते ट्रैक की मरम्मत में लगे मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। भीषण गर्मी और आग सी बरसती धूप में विभागीय बदइंतजामी के कारण भूख-प्यास से बिलबिला रहे मजदूर रेल राज्यमंत्री की स्पेशल ट्रेन के रुकते ही उसके सामने खड़े होकर मुर्दाबाद का नारा लगाने लगे। मजदूरों को आग बबूला देख विभागीय अफसरों के साथ स्थानीय पुलिस के होश उड़ गए। अफसरों ने भोजन-पानी समेत अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
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बता दें कि हावड़ा-दिल्ली रेलमार्ग पर सिराथू-अठसराय स्टेशन के बीच सोमवार यानी 25 मई की दोपहर मुरी ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में क्षतिग्रस्त हुई पटरियों की मरमम्त के लिए इलाहाबाद-कानपुर मंडल के विभिन्न स्टेशनों से मजदूरों को बुलाकर लगाया गया है। तीन दिन से सैकड़ों मजदूर भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में दिन-रात काम पर डटे हैं। पर, मजदूरों को छांव, पानी, भोजन आदि भी कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे धूप में भूख-प्यास से व्याकुल होकर उन्हें काम करना पड़ रहा है। उधर, हादसे के चौथे दिन बृहस्पतिवार को रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा का घटनास्थल का निरीक्षण करने आए।
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 जैसे ही उनकी स्पेशल ट्रेन घटनास्थल पहुंची। भूख-प्यास से बेहाल मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। काम बंद करके सभी मजदूर उनकी स्पेशल ट्रेन के सामने खड़े होकर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए ट्रैक जाम कर दिया। रेल मजदूरों का गुस्सा देख मंत्री के साथ रहे विभागीय अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे अफसर मजदूरों को पानी, भोजन, छाया आदि इंतजाम मुहैया कराने का भरोसा दिलाते रहे। करीब 20 मिनट की मान-मनौव्वल के बाद मजदूर ट्रैक से हट तो गए। पर, पानी, खाना आदि का इंतजाम कराए बगैर मरम्मत का काम नहीं करने की धमकी देते हुए सभी मजदूर अपना सामान उठाकर पास के जंगल में जाकर पेड़ाें की छांव में बैठ गए। ट्रैक की मरम्मत में जुटे मजदूर कुंदन, किरनपाल, राधे बिहारी, कुंजलाल आदि ने आरोप लगाया कि कि उनसे दिन-रात मेहनत कराई जा रही है। खाना तो दूर उन्हें पीने के पानी तक की कोई समुचित व्यवस्था रेल प्रशासन नहीं कर सका है। मजदूरों के आरोप पर मंत्री ने अफसरों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने मजदूरों के लिए खाना-पानी समेत अन्य इंतजाम कराने की हिदायत दी।  
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तीन किलोमीटर दूर से लाते रहे राशन-पानी
मंझनपुर (ब्यूरो)। अठसराय रेलवे स्टेशन के समीप सोमवार हुए मूरी ट्रेन हादसे के बाद क्षतिग्रस्त हुए ट्रैक को ठीक कराने के लिए रेलवे प्रशासन ने ललितपुर, झांसी, बबीना, मिर्जापुर, चुनार, टुंडला समेत अन्य जिलों से गैंगमैनों की टोली बुलाई है। दिन-रात ट्रैक की मरम्मत में जुटे इन मजदूरों ने बताया कि रेल प्रशासन की ओर से उन्हें खाना-पानी जैसी कोई इंतजाम मुहैया नहीं कराया गया है। कुंदन, राधेबिहारी आदि मजदूरों ने बताया कि वे तीन किलोमीटर दूर अजुहा, अटसराय बाजार से आटा, आलू, दाल, सब्जी, बिस्किट, नमकीन, लाई आदि सामान खरीदकर लाने को मजबूर हैं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें खुद खाना पकाकर खाना पड़ रहा है।

मजदूरों का गुस्सा देख मूकदर्शक बन गए भाजपाई
मंझनपुर (ब्यूरो)। अटसराय के समीप ट्रेन हादसे की जांच के लिए रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के आने पर भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ घटनास्थल पर सुबह से ही जुटने लगी थी। पर, मंत्री के आते ही जैसे ही मजदूरों ने नारेबाजी के साथ अपना गुस्सा दिखाया। भाजपाई मूक दर्शक बन गए। इस दौरान भाजपाई रेल राज्यमंत्री और सांसद से बचने की कोशिश करते दिखे। यह सिलसिला मजदूरों के ट्रैक पर खड़े होकर गुस्से का इजहार करने तक चलता रहा।

ट्रेनों से झांककर देखते रहे हादसे का मंजर
मंझनपुर (ब्यूरो)। हावड़ा-दिल्ली रेलमार्ग पर सिराथू-अठसराय स्टेशन के बीच सोमवार राउरकेला (टाटानगर) से जम्मूवती जा रही एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई थी। हादसा हुए चार दिन बीत चुका है। पर, ट्रैक के किनारे हादसे की भयावहता की गवाही देती मूरी एक्सप्रेस की क्षतिग्रस्त बोगियां अब भी पड़ी हुई हैं। इधर, 40 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रेलवे के मजदूरों ने ट्रैक की मरम्मत करके उसे अस्थाई रूप से ट्रेनों के आवागमन के लायक बना दिया है। इस ट्रैक से बुधवार की भोर से ट्रेनों का संचालन भी शुरू हो गया है। पर, दुर्घटनास्थल से सभी ट्रेनें अभी कॉसन पर एकदम धीमी गति से रेंगती हुई ही निकाली जा रही है।


 इन रेंगती ट्रेनों के मुसाफिर गेट और खिड़कियों से हादसे का मंजर देखने को बेताबी से झांकते रहते हैं। घटनास्थल से गुजरने वाली सभी ट्रेनों के मुसाफिर ट्रैक के बगल क्षतिग्रस्त पड़ी बोगियों को देखकर सिहर उठते हैं। रेलमंत्री के मुआयने से पहले तकरीबन सवा 12 बजे गुजरी हावड़ा एक्सप्रेस में बैठे यात्री खिड़कियों से हादसे का मंजर देख अवाक हो गए थे। ट्रेन के गेट पर खड़े एक यात्री ने तो ट्रैक के आसपास खडे़ लोगों से यह पूछा था कि कितने लोग हादसे में मारे गए?
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