फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

'कानपुर का रॉबिनहुड' कहलाता था ये शख्स, इंदिरा गांधी कुछ यूं हुईं थीं प्रभावित

Wed, 03 Oct 2018 08:44 AM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 03 Oct 2018 08:44 AM IST
विज्ञापन
This man was called Robinhood of Kanpur
भगवती प्रसाद दीक्षित की पुरानी तस्वीर
कानपुर की शान कहे जाने वाले 'रॉबिनहुड दीक्षित' की लोकप्रियता एक जमाने में इतनी ज्यादा थी कि इंदिरा गांधी भी उनसे प्रभावित हो गईं। तेज तर्रार, मनमौजी, ईमानदार अफसर की कहानियां आज भी शहरवासियों की जुबां पर रहती है। उन्हें 'कानपुर का रॉबिनहुड' भी कहा जाता था।  तो आइये जानते हैं कौन थे भगवती प्रसाद दीक्षित जो अपने अंदाज और घुड़सवारी के शौक की वजह से लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ गए। 


 

 
This man was called Robinhood of Kanpur
भगवती प्रसाद दीक्षित की पुरानी तस्वीर

कानपुर की शान रॉबिनहुड भगवती प्रसाद दीक्षित जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की ठानी। जिनके लिए ईमानदारी कपड़ा, सच्चाई थी रोटी और देशभक्ति उनका मकान थी। कई बार राष्ट्रपति और लोकसभा चुनाव लड़ चुके भगवती प्रसाद दीक्षित (27 अप्रैल 1927 - 1 अक्टूबर 2013) कानपुर के भौती गांव के रहने वाले थे। प्राइमरी स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कानपुर के सिविल लाइंस स्थित डीएवी कॉलेज से की थी।

 
This man was called Robinhood of Kanpur
भगवती प्रसाद दीक्षित की पुरानी तस्वीर
उनकी ईमानदारी का सिलसिला 1952 से शुरु हुआ और वह कानपुर डेवलपमेंट बोर्ड (अब केडीए) में अफसर बने। इनकी ईमानदारी से भ्रष्ट अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई जब उन्होंने 1958 में भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके परिणामवश सभी अधिकारी इनके खिलाफ एकजुट होने लगे और इनको झूठे आरोपों में फंसा दिया गया। पिता के कहने पर भगवती प्रसाद ने दूसरे ही दिन अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। 1958 में नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी जैसे बड़े नेताओं के खिलाफ चुनाव लड़ा। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
This man was called Robinhood of Kanpur
परिवार के साथ पुरानी तस्वीर में भगवती प्रसाद दीक्षित
1961 में ग्रीनपार्क में आयोजित जिस समारोह में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में आए थे वहां भगवती प्रसाद दीक्षित पहुंच गए और अपने बाजे को बजाकर सबको अपनी ओर आकर्षित किया। मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों संग खाना खाने पर आपत्ति जताते हुए दीक्षित ने कहा- 'ऐसे में तो लगता है, जैसे आप भी इनके साथ मिले हुए हैं।' इस घटना के बाद मुख्यमंत्री के कहने पर इनको आगरा पागलखाने भेज दिया गया। जिद्द पर वह पागल न होने का सर्टिफिकेट लेकर ही वहां से विदा हुए। वह अक्सर कहते थे कि मेरे पास तो पागल न होने का सर्टिफिकेट है, लेकिन नेताओं ने कभी दिमाग की जांच कराई क्या?
 
विज्ञापन
This man was called Robinhood of Kanpur
भगवती प्रसाद दीक्षित की पुरानी तस्वीर
भगवती प्रसाद दीक्षित को करीब से जानने वाले आलोक मेहरोत्रा बताते हैं कि दीक्षित ने गांव  की प्रधानी से लेकर राष्ट्रपति तक सभी चुनाव लड़े हैं। 1962 में उन्होंने लोकसभा का पहला चुनाव एसएन बनर्जी के खिलाफ कानपुर में लड़ा था, तब उन्होंने चुनाव में एक भी पैसा खर्च न करते हुए आपने घोड़े पर ही चुनाव प्रचार किया था। जहां भाषण देना होता अपना बाजा बजाते और शुरू हो जाते थे।  इसके बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ उन्होंने रायबरेली से चुनाव लड़ा और अपने घोड़े संग कानपुर से रायबरेली की ओर रवाना हो गए।
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed