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इसरो का सैटेलाइट अध्ययन: हिमालय में 676 ग्लेशियर झीलें बढ़ीं 130 भारत में, खतरा यहां भी कम नहीं

Himanshu Mishra हिमांशु अरविंद मिश्र
Updated Sat, 29 Aug 2026 06:17 AM IST
सार

हिमालय में ग्लेशियर झीलों का बढ़ता आकार और भूस्खलन का खतरा चिंता बढ़ा रहा है। इसरो के अध्ययन में भारतीय हिमालयी नदी घाटियों में 676 बढ़ती ग्लेशियर झीलें मिली हैं, जिनमें 130 भारत में हैं। आखिर हिमालय में तेजी से बदलता यह खतरा कितना बड़ा है? पढ़िए रिपोर्ट

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isro satellite study himalayan glacier lakes increase india risk
दोगुने से ज्यादा हो गया 601 झीलों का आकार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ ने हिमालय में जमा पानी और अस्थिर पहाड़ों के खतरे को फिर सामने ला दिया है। इसी बीच 2026 में सामने आए नए सैटैलाइट अध्ययन ने बताया है कि उच्च हिमालयी एशिया में ग्लेशियर झीलों का कुल क्षेत्रफल 2016-17 से अब तक 5.5 फीसदी बढ़ा है। पूर्वी हिमालय में अकेले इन झीलों का क्षेत्रफल 14.1 वर्ग किमी बढ़ा है।
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नए अध्ययन में पूरे उच्च हिमालयी एशिया में 31,698 ग्लेशियर झीलें दर्ज की गईं। भारतीय हिमालयी नदी घाटियों में 676 ऐसी ग्लेशियर झीलें मिली हैं, जिनका आकार अब काफी बढ़ गया है। इनमें 130 झीलें भारत में हैं। इनमें 65 सिंधु, सात गंगा और 58 ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में हैं। ग्लेशियर झीलें ग्लेशियर के पीछे हटने और बर्फ पिघलने से बने पानी के जमा होने पर बनती हैं। इनमें से कुछ झीलें बर्फ, चट्टान या मलबे से बने प्राकृतिक बांध के पीछे होती हैं।
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पूर्वी हिमालय में सबसे ज्यादा विस्तार : 2026 के अध्ययन में उच्च हिमालयी एशिया के अलग-अलग हिस्सों में ग्लेशियर झीलों के आकार में बदलाव को उपग्रह आंकड़ों के जरिए देखा गया। पूरे क्षेत्र में झीलों का कुल क्षेत्रफल 5.5 फीसदी बढ़ा।
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इसरो के पुराने आंकड़े भी खतरे की घंटी
इसरो ने 1984 से अब तक उपग्रह आंकड़ों के आधार पर भारतीय हिमालयी नदी घाटियों में 10 हेक्टेयर से बड़ी 2,431 ग्लेशियल झीलों का अध्ययन किया था। इनमें 676 झीलें 1984 के बाद उल्लेखनीय रूप से बढ़ी थीं। इनमें 130 भारत में थीं। इन 676 झीलों में 601 का आकार दोगुने से ज्यादा बढ़ चुका था।


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80 हजार से ज्यादा भूस्खलन के मामले
इसरो लगातार मानसून के दौरान एनएचपीसी की 26 जलविद्युत परियोजनाओं के जलग्रहण क्षेत्रों में 2,024 ग्लेशियल झीलों की निगरानी कर रहा है। हिमालय में बढ़ती ग्लेशियल झीलों के साथ पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा भी जुड़ा है। भारी बारिश, चट्टानों का खिसकना और पहाड़ी ढलानों में बदलाव कई बार झीलों के प्राकृतिक बांध पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। इसरो की सेटेलाइट रिपोर्ट के अनुसार, 80 हजार से ज्यादा भूस्खलन के मामले अब तक हिमालयी रेंज में दर्ज किए गए हैं।
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