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सांई बाबा की पालकी यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब
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छिबरामऊ। रविवार को पूरा नगर सांईमय हो गया। बैंड-बाजों व डीजे की धुनों के साथ रास्तेभर फूलों की वर्षा होती रही। वहीं दूसरी ओर शोभायात्रा में शामिल भक्त पीली पट्टी बांधकर झूमते नाचते रहे। नगर के मुख्य मार्ग पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था।
पश्चिमी बाईपास से सांईबाबा की पालकी यात्रा की विधि विधान से पूजा अर्चना और आरती के साथ शुरूआत हुई। सिर पर पीली पट्टी बांधे चल रही महिलाएं सांईबाबा के जयकारे लगा रहीं थीं जबकि कुछ ध्यानमग्न होकर नृत्य कर रही थीं।
शोभायात्रा में सबसे आगे सिद्ध विनायक प्रथम पूज्य भगवान गणेश की झांकी चल रही थी। वहीं सांई बाबा के साथ उनके भक्तों की टोली की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। राधा-कृष्ण गोपिकाओं के साथ रासलीला का दृश्य भी देखते ही बन रहा था। हनुमान जी की झांकी सजाई गई। फूलों से सजी सांई बाबा की पालकी को भक्त कंधे पर रखकर चल रहे थे। पालकी के आगे आगे कुछ लोग गुलाब के फूल की पंखुड़ियों की वर्षा करते हुए चल रहे थे। साईं पालकी को युवाओं के साथ महिलाओं ने भी कंधा दिया। शोभायात्रा में सबसे पीछे चल रहे सिंहासन पर सांई बाबा की विशाल मूर्ति विराजमान थी। इस सिंहासन को भी बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रविवार की दोपहर करीब 12 बजे पश्चिमी बाईपास से शुरू हुई यह यात्रा नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए सौरिख रोड स्थित सिद्धपीठ कालिका देवी मंदिर तक करीब तीन किलोमीटर का सफर 4 घंटे में पूरा कर पहुंची। वहां पूजा अर्चना के बाद वापस पीपल चौराहे पर विजयनाथ मंदिर पहुंची जहां पूरे विधि विधान से श्रद्धालुओं के दर्शन व पूजा के लिए सांई पालकी रखी गई।
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पश्चिमी बाईपास से सांईबाबा की पालकी यात्रा की विधि विधान से पूजा अर्चना और आरती के साथ शुरूआत हुई। सिर पर पीली पट्टी बांधे चल रही महिलाएं सांईबाबा के जयकारे लगा रहीं थीं जबकि कुछ ध्यानमग्न होकर नृत्य कर रही थीं।
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शोभायात्रा में सबसे आगे सिद्ध विनायक प्रथम पूज्य भगवान गणेश की झांकी चल रही थी। वहीं सांई बाबा के साथ उनके भक्तों की टोली की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। राधा-कृष्ण गोपिकाओं के साथ रासलीला का दृश्य भी देखते ही बन रहा था। हनुमान जी की झांकी सजाई गई। फूलों से सजी सांई बाबा की पालकी को भक्त कंधे पर रखकर चल रहे थे। पालकी के आगे आगे कुछ लोग गुलाब के फूल की पंखुड़ियों की वर्षा करते हुए चल रहे थे। साईं पालकी को युवाओं के साथ महिलाओं ने भी कंधा दिया। शोभायात्रा में सबसे पीछे चल रहे सिंहासन पर सांई बाबा की विशाल मूर्ति विराजमान थी। इस सिंहासन को भी बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रविवार की दोपहर करीब 12 बजे पश्चिमी बाईपास से शुरू हुई यह यात्रा नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए सौरिख रोड स्थित सिद्धपीठ कालिका देवी मंदिर तक करीब तीन किलोमीटर का सफर 4 घंटे में पूरा कर पहुंची। वहां पूजा अर्चना के बाद वापस पीपल चौराहे पर विजयनाथ मंदिर पहुंची जहां पूरे विधि विधान से श्रद्धालुओं के दर्शन व पूजा के लिए सांई पालकी रखी गई।
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