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पोस्टमार्टम के लिए नहीं करना होगा रिपोर्ट का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
Updated Mon, 01 May 2017 11:39 PM IST
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जिला अस्पताल में पेड़ के नीचे रखा शव (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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अब पोस्टमार्टम के लिए एफआईआर दर्ज होने तक परिजनों को इंतजार नहीं करना होगा। केवल मीमो के आधार पर ही पंचनामा भरवाकर शव का पोस्टमार्टम करा दिया जाएगा। सिकंदराराऊ के रिक्शा चालक असगर के शव का पोस्टमार्टम मृत्यु के 18 घंटे बाद किया गया। असगर के पोस्टमार्टम में हुई देरी और उसके शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने में हुई लापरवाही के बाद एसपी घुले सुशील चंद्रभान ने अज्ञात शवों को छोड़कर सभी मामलों में जल्द से जल्द पोस्टमार्टम के निर्देश दिए हैं।
गौर हो कि सिकंदराराऊ के मोहल्ला शीशगर के रहने वाले असगर शनिवार शाम को पंत चौराहा की ओर से पैदल जा रहे थे। तभी एटा की ओर से आ रहे एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। जिला अस्पताल प्रशासन ने उसके शव को पोस्टमार्टम की कहकर रखवा लिया, लेकिन रात भर शव अस्पताल में रखा रहा।
सुबह सिकंदराराऊ पुलिस जब हाथरस पहुंची तो शव को पोस्टमार्टम तक ले जाने की जिम्मेदारी भी मृतक के बेटे पर छोड़ दी। माली हालत के चलते बेटा ई रिक्शा लेकर आया और शव को पोस्टमार्टम गृह पहुंचाया। जब मीडियाकर्मियों की इस पर नजर पड़ी तो अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन सरकारी वाहन की व्यवस्था की और पोस्टमार्टम गृह से देर शाम शव को घर पहुंचाया।
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पोस्टमार्टम के लिए अब एफआईआर का इंतजार नहीं किया जाएगा। अब मीमो के आधार पर ही पोस्टमार्टम हो जाएगा। शवों को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने और उन्हें घर पहुंचाने में अगर अस्पताल प्रशासन को कोई असुविधा है तो पुलिस अस्पताल प्रशासन की पूरी मदद करेगी।
-रजनेश तिवारी, निरीक्षक, कोतवाली हाथरस गेट।
शवों को अलग से रखने की व्यवस्था की गई है, जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो और दुर्गंध का सामना नहीं करना पड़े। डीएम ने भी इस संबंध में निर्देश दिए हैं, जिनका हर सूरत में पालन कराया जाएगा।
-डॉ.आईबी सिंह, सीएमएस बागला जिला अस्पताल
अब पेड़ के नीचे शवाें की नहीं होगी बेकद्री
बागला जिला अस्पताल में एक पेड़ के नीचे शवों को रखे जाने का सालों पुराना सिलसिला अब खत्म हो जाएगा। शवों को बेकद्री से बचाने के लिए डीएम अमित कुमार सिंह ने सख्त रुख अपनाया है और मोर्चरी बनने तक अस्पताल के ही एक कमरे में शवों को रखे जाने की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए हैं। हाथरस गेट पुलिस को भी इस संबंध में निर्देशित किया गया है कि वह किसी सूरत में शवाें को पेड़ के नीचे नहीं रखने दें।
दरअसल, जिला अस्पताल बनने के साथ ही उसमें मोर्चरी बनाई गई थी, लेकिन मोर्चरी के कक्ष पर एक अन्य विभाग बनाकर शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था को पलीता लगा दिया गया। शवों को पहले की तरह जिला अस्पताल परिसर में दूसरे गेट के सामने वाले पेड़ के नीचे ही रखा जाता रहा। खुले में शवों को इस तरह रखे से कई सवाल खड़े हुए। हादसे या हत्या में मारे गए शवों को खुले में रखने पर इन्हें पोस्टमार्टम से पहले चोट पहुंचाकर केस को प्रभावित किए जाने का डर रहता था।
इसके अलावा पुलिस को मौसम और आवारा जानवरों से भी शवों को बचाना पड़ता था। बीते साल सासनी क्षेत्र के गांव बिर्रा के पास मिले एक वृद्ध के शव के बारिश में भीगने के मामले ने काफी तूल भी पकड़ा था। हैरत की बात यह भी है कि अस्पताल का दौरा करने वाले हर मंत्री और अधिकारी के सामने यह मुद्दा उठाया गया लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिले के नए-पुराने जनप्रतिनिधियों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया।
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गौर हो कि सिकंदराराऊ के मोहल्ला शीशगर के रहने वाले असगर शनिवार शाम को पंत चौराहा की ओर से पैदल जा रहे थे। तभी एटा की ओर से आ रहे एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। जिला अस्पताल प्रशासन ने उसके शव को पोस्टमार्टम की कहकर रखवा लिया, लेकिन रात भर शव अस्पताल में रखा रहा।
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सुबह सिकंदराराऊ पुलिस जब हाथरस पहुंची तो शव को पोस्टमार्टम तक ले जाने की जिम्मेदारी भी मृतक के बेटे पर छोड़ दी। माली हालत के चलते बेटा ई रिक्शा लेकर आया और शव को पोस्टमार्टम गृह पहुंचाया। जब मीडियाकर्मियों की इस पर नजर पड़ी तो अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन सरकारी वाहन की व्यवस्था की और पोस्टमार्टम गृह से देर शाम शव को घर पहुंचाया।
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पोस्टमार्टम के लिए अब एफआईआर का इंतजार नहीं किया जाएगा। अब मीमो के आधार पर ही पोस्टमार्टम हो जाएगा। शवों को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने और उन्हें घर पहुंचाने में अगर अस्पताल प्रशासन को कोई असुविधा है तो पुलिस अस्पताल प्रशासन की पूरी मदद करेगी।
-रजनेश तिवारी, निरीक्षक, कोतवाली हाथरस गेट।
शवों को अलग से रखने की व्यवस्था की गई है, जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो और दुर्गंध का सामना नहीं करना पड़े। डीएम ने भी इस संबंध में निर्देश दिए हैं, जिनका हर सूरत में पालन कराया जाएगा।
-डॉ.आईबी सिंह, सीएमएस बागला जिला अस्पताल
अब पेड़ के नीचे शवाें की नहीं होगी बेकद्री
बागला जिला अस्पताल में एक पेड़ के नीचे शवों को रखे जाने का सालों पुराना सिलसिला अब खत्म हो जाएगा। शवों को बेकद्री से बचाने के लिए डीएम अमित कुमार सिंह ने सख्त रुख अपनाया है और मोर्चरी बनने तक अस्पताल के ही एक कमरे में शवों को रखे जाने की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए हैं। हाथरस गेट पुलिस को भी इस संबंध में निर्देशित किया गया है कि वह किसी सूरत में शवाें को पेड़ के नीचे नहीं रखने दें।
दरअसल, जिला अस्पताल बनने के साथ ही उसमें मोर्चरी बनाई गई थी, लेकिन मोर्चरी के कक्ष पर एक अन्य विभाग बनाकर शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था को पलीता लगा दिया गया। शवों को पहले की तरह जिला अस्पताल परिसर में दूसरे गेट के सामने वाले पेड़ के नीचे ही रखा जाता रहा। खुले में शवों को इस तरह रखे से कई सवाल खड़े हुए। हादसे या हत्या में मारे गए शवों को खुले में रखने पर इन्हें पोस्टमार्टम से पहले चोट पहुंचाकर केस को प्रभावित किए जाने का डर रहता था।
इसके अलावा पुलिस को मौसम और आवारा जानवरों से भी शवों को बचाना पड़ता था। बीते साल सासनी क्षेत्र के गांव बिर्रा के पास मिले एक वृद्ध के शव के बारिश में भीगने के मामले ने काफी तूल भी पकड़ा था। हैरत की बात यह भी है कि अस्पताल का दौरा करने वाले हर मंत्री और अधिकारी के सामने यह मुद्दा उठाया गया लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिले के नए-पुराने जनप्रतिनिधियों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया।