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Hapur News: शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन में गड़बड़ी की सीएम से की शिकायत
Mon, 30 Oct 2023 10:40 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Mon, 30 Oct 2023 10:40 PM IST
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हापुड़। जरौठी स्थित पूर्व किसान माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक रहे सुभाष त्यागी ने गोरखपुर जनता दरबार में सीएम के समक्ष शिक्षा विभाग का बड़ा घोटाला उजागर किया। 30 साल से अपने वजूद और वेतन की लड़ाई लड़ रहे, शिक्षक ने विद्यालय में एक के बाद एक अवैधानिक तरीके से की गई चार नियुक्तियों के साक्ष्य दिए। सीएम ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
शिक्षक सुभाष चंद त्यागी ने गोरखपुर जनता दरबार पहुंचकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताया कि विद्यालय में उसकी नियुक्ति वर्ष 1987 में हुई थी। आरोप लगाए कि 1991 तक लगातार वेतन मिलता रहा, लेकिन इसके बाद प्रबंध तंत्र ने उनके दस्तावेजों में गड़बड़ी शुरू कर दी और वेतन रुकवा दिया। उसी समय दो शिक्षक भी अवैध तरीके से नियुक्त कर दिए गए। सुभाष त्यागी ने बताया कि तभी से वह अपने वेतन को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। वर्ष 2006 में तत्कालीन बीएसए ने 1991 से उसे वेतन का हकदार भी माना है। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक ने भी अपनी जांच में वेतन समेत पांच बिंदुओं को उत्पीड़न का कारण माना था। सुभाष त्यागी ने बताया कि वर्ष 2018 में कुछ अधिकारियों ने तत्कालीन बीएसए को गुमराह कर दो शिक्षकों की विद्यालय में नियुक्ति करा दी, आरोप है कि ये नियुक्ति अवैधानिक थी। जिस कारण दोनों की सेवाएं समाप्त की गई, लेकिन विडंबना यह है कि अभी भी दोनों को वेतन दिया जा रहा है और विद्यालय में ही कार्यरत हैं। उन्होंने विद्यालय की प्रधानाध्यापक पर भी गलत प्रमाण पत्रों के जरिए स्थानांतरण कराने का आरोप लगाया है।
जांच आख्याओं में ही फंस रहे अधिकारी
शिक्षकों की नियुक्ति और उनके वेतन के मामले में जिला स्तर से लेकर मंडलीय अधिकारियों ने जांच की है। जांच आख्या भी प्रस्तुत की गई हैं, जिनमें कहीं न कहीं कई अधिकारियों की गर्दन फंसती जा रही है। यहां तक की तत्कालीन लेखाधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी से रिकवरी के भी आदेश हो चुके हैं, हालांकि रिकवरी अभी तक नहीं हो सकी है।
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-मामले की शासन से भी हुई जांच-
जरौठी के किसान पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रकरण की जांच शासन स्तर से भी हुई है। स्थानीय स्तर पर भी इस मामले पर नजर है। जल्द ही इसमें उचित कार्रवाई होगी।-- रितु तोमर, बीएसए।
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शिक्षक सुभाष चंद त्यागी ने गोरखपुर जनता दरबार पहुंचकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताया कि विद्यालय में उसकी नियुक्ति वर्ष 1987 में हुई थी। आरोप लगाए कि 1991 तक लगातार वेतन मिलता रहा, लेकिन इसके बाद प्रबंध तंत्र ने उनके दस्तावेजों में गड़बड़ी शुरू कर दी और वेतन रुकवा दिया। उसी समय दो शिक्षक भी अवैध तरीके से नियुक्त कर दिए गए। सुभाष त्यागी ने बताया कि तभी से वह अपने वेतन को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। वर्ष 2006 में तत्कालीन बीएसए ने 1991 से उसे वेतन का हकदार भी माना है। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक ने भी अपनी जांच में वेतन समेत पांच बिंदुओं को उत्पीड़न का कारण माना था। सुभाष त्यागी ने बताया कि वर्ष 2018 में कुछ अधिकारियों ने तत्कालीन बीएसए को गुमराह कर दो शिक्षकों की विद्यालय में नियुक्ति करा दी, आरोप है कि ये नियुक्ति अवैधानिक थी। जिस कारण दोनों की सेवाएं समाप्त की गई, लेकिन विडंबना यह है कि अभी भी दोनों को वेतन दिया जा रहा है और विद्यालय में ही कार्यरत हैं। उन्होंने विद्यालय की प्रधानाध्यापक पर भी गलत प्रमाण पत्रों के जरिए स्थानांतरण कराने का आरोप लगाया है।
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जांच आख्याओं में ही फंस रहे अधिकारी
शिक्षकों की नियुक्ति और उनके वेतन के मामले में जिला स्तर से लेकर मंडलीय अधिकारियों ने जांच की है। जांच आख्या भी प्रस्तुत की गई हैं, जिनमें कहीं न कहीं कई अधिकारियों की गर्दन फंसती जा रही है। यहां तक की तत्कालीन लेखाधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी से रिकवरी के भी आदेश हो चुके हैं, हालांकि रिकवरी अभी तक नहीं हो सकी है।
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-मामले की शासन से भी हुई जांच-
जरौठी के किसान पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रकरण की जांच शासन स्तर से भी हुई है। स्थानीय स्तर पर भी इस मामले पर नजर है। जल्द ही इसमें उचित कार्रवाई होगी।