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बायोडायवर्सिटी पार्क: तीन करोड़ साल पुरानी कीट प्रजातियां दिल्ली में आज भी आबाद, सर्वे में मिलीं दो और नस्लें

Mon, 21 Sep 2026 03:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 21 Sep 2026 03:19 AM IST
सार

इन प्रजातियों की मौजूदगी और विविधता का पता लगाने के लिए डीडीए के सातों बायोडायवर्सिटी पार्कों में 17 से 19 सितंबर तक तीन दिवसीय ड्रैगनफ्लाई-डैमसेलफ्लाई सर्वे किया गया।

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Biodiversity Park: Three crore year old insect species still inhabit Delhi.
प्रतीक चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के कंक्रीट के जंगल के बीच कुछ ऐसे प्राकृतिक ठिकाने भी हैं, जहां करीब तीन करोड़ साल पुरानी कीट प्रजातियों की दुनिया आज भी आबाद है। डीडीए के बायोडायवर्सिटी पार्कों के तालाबों, नमभूमियों और घासभूमियों में ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई बड़ी संख्या में उड़ान भर रही हैं। इस साल के सर्वे में इनकी दो नई प्रजातियों की मौजूदगी भी सामने आई है। ये कीट केवल खूबसूरत उड़नजीव नहीं, बल्कि मच्छरों और दूसरे छोटे कीटों के प्राकृतिक शिकारी हैं। इस तरह ये इंसानों और जानवरों के स्वास्थ्य के साथ फसलों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

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इन प्रजातियों की मौजूदगी और विविधता का पता लगाने के लिए डीडीए के सातों बायोडायवर्सिटी पार्कों में 17 से 19 सितंबर तक तीन दिवसीय ड्रैगनफ्लाई-डैमसेलफ्लाई सर्वे किया गया। सर्वे में यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में सबसे अधिक 23 प्रजातियां दर्ज की गईं। इसके बाद कमला नेहरू रिज में 22, अरावली में 16, कालिंदी में 15, नीला हौज में 13, तुगलकाबाद में 12 और तिलपथ वैली में चार प्रजातियां मिलीं।
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कालिंदी में सबसे ज्यादा 4,234 ड्रैगनफ्लाई
प्रजातियों की विविधता के साथ इनकी संख्या भी अलग-अलग पार्कों में खास रही। कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क में सबसे ज्यादा 4,234 ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई दर्ज की गईं। कमला नेहरू रिज में इनकी संख्या 2,520 और अरावली में 2,249 रही।
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दो पार्कों में मिलीं नई प्रजातियां
इस साल के सर्वे में येलो-टेल्ड ऐशी स्किमर और ब्लू ग्रास डार्ट की मौजूदगी दर्ज की गई। येलो-टेल्ड ऐशी स्किमर मौसमी तालाबों, दलदली क्षेत्रों और मानव निर्मित टैंकों के आसपास पाई जाती है। वहीं, ब्लू ग्रास डार्ट जलीय पौधों वाले तालाबों और दलदली क्षेत्रों के किनारों पर नजर आती है। इनकी मौजूदगी क्षेत्र के जलीय और आसपास के ईकोसिस्टम के सक्रिय होने का संकेत मानी जाती है।

चार साल में बदली प्रजातियों की तस्वीर
सर्वे के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भी बदलाव दिखाई देता है। यमुना पार्क में प्रजातियों की संख्या 2023 में 21 से बढ़कर 2026 में 23 हो गई। अरावली में यह संख्या 11 से बढ़कर 16 हुई। कमला नेहरू रिज में 2025 में 26 प्रजातियां दर्ज हुई थीं, जो 2026 में घटकर 22 रह गईं। कालिंदी में 2023 में आठ प्रजातियों से बढ़कर 2025 में 20 हुईं, लेकिन 2026 में इनकी संख्या 15 दर्ज की गई।


मच्छरों के प्राकृतिक शिकारी
ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई का जीवन चक्र पानी से गहराई से जुड़ा है। इनके लार्वा पानी में रहते हैं और छोटे जलीय जीवों का शिकार करते हैं। वयस्क होने पर ये हवा में उड़ने वाले छोटे कीटों और मच्छरों को खाते हैं। डीडीए के सातों बायोडायवर्सिटी पार्कों के प्रभारी फैयाज खुदसर के अनुसार, इनकी मौजूदगी इंसानों, जानवरों और खेती के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि डीडीए के बायोडायवर्सिटी पार्क जैव विविधता और ईकोसिस्टम की बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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