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पूर्व नियोजित था हापुड़ में बवाल!
Updated Tue, 03 Apr 2018 12:32 AM IST
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पूर्व नियोजित था हापुड़ में बवाल
हापुड़। एससी एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज दलितों का इतनी बड़ी संख्या में जुटकर बवाल करना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा लग रहा है। एक बड़ी साजिश के तहत उपद्रवी टुकड़ियों में बंटकर एकत्र हुए और तांडव मचाया। हैरानी की बात है कि इस पूरे घटनाक्रम में खुफिया विभाग पूरी तरह से फेल हो गया। उन्हें कानों-कान खबर नहीं थी कि इतने लोग यहां जमा होकर इस तरह उपद्रव मचाएंगे।
विभिन्न दलित संगठनों ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया था। शुरूआत में यह आह्वान इतना व्यापक नजर नहीं आ रहा था। इसका अधिक प्रचार प्रसार भी नहीं हुआ। किसी बड़े मंच से इसका समर्थन नहीं किया गया। इसके बावजूद सोमवार सुबह तहसील चौपले पर करीब पंद्रह हजार लोगों का एकत्र होना, किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। हापुड़ शहर ही नहीं आसपास के गांवों से भी दलित युवा इस प्रदर्शन में शामिल हो गए।
इसके अलावा अतरपुरा चौपला से टुकड़ियों में युवाओं का बंटना और सुनियोजित तरीके से अलग अलग स्थानों पर उपद्रव करना भी पहले से निर्धारित नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल रहा। पुलिस को इस उपद्रप का एहसास तक नहीं था। एसपी तो बंद के आह्वान के बावजूद अवकाश पर थे।
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छात्र नेता ने की अगुवाई
आश्चर्य की बात है कि बंद के आह्वान से लेकर तोडफ़ोड़, आगजनी और लूटपाट तक के संपूर्ण घटनाक्रम की अगुवाई अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए एक छात्र नेता कर रहा था। दरअसल, रेलवे स्टेशन पर एसडीएम को ज्ञापन देकर भीड़ घर जाने के लिए तैयार थी, लेकिन उक्त छात्र नेता ने अड़ंगा लगाया कि डीएम आकर ज्ञापन लें। डीएम आए नहीं इसलिए भीड़ बेकाबू हो गई।
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हापुड़। एससी एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज दलितों का इतनी बड़ी संख्या में जुटकर बवाल करना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा लग रहा है। एक बड़ी साजिश के तहत उपद्रवी टुकड़ियों में बंटकर एकत्र हुए और तांडव मचाया। हैरानी की बात है कि इस पूरे घटनाक्रम में खुफिया विभाग पूरी तरह से फेल हो गया। उन्हें कानों-कान खबर नहीं थी कि इतने लोग यहां जमा होकर इस तरह उपद्रव मचाएंगे।
विभिन्न दलित संगठनों ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया था। शुरूआत में यह आह्वान इतना व्यापक नजर नहीं आ रहा था। इसका अधिक प्रचार प्रसार भी नहीं हुआ। किसी बड़े मंच से इसका समर्थन नहीं किया गया। इसके बावजूद सोमवार सुबह तहसील चौपले पर करीब पंद्रह हजार लोगों का एकत्र होना, किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। हापुड़ शहर ही नहीं आसपास के गांवों से भी दलित युवा इस प्रदर्शन में शामिल हो गए।
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इसके अलावा अतरपुरा चौपला से टुकड़ियों में युवाओं का बंटना और सुनियोजित तरीके से अलग अलग स्थानों पर उपद्रव करना भी पहले से निर्धारित नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल रहा। पुलिस को इस उपद्रप का एहसास तक नहीं था। एसपी तो बंद के आह्वान के बावजूद अवकाश पर थे।
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छात्र नेता ने की अगुवाई
आश्चर्य की बात है कि बंद के आह्वान से लेकर तोडफ़ोड़, आगजनी और लूटपाट तक के संपूर्ण घटनाक्रम की अगुवाई अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए एक छात्र नेता कर रहा था। दरअसल, रेलवे स्टेशन पर एसडीएम को ज्ञापन देकर भीड़ घर जाने के लिए तैयार थी, लेकिन उक्त छात्र नेता ने अड़ंगा लगाया कि डीएम आकर ज्ञापन लें। डीएम आए नहीं इसलिए भीड़ बेकाबू हो गई।