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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सात राज्यों में 62 साल होगी जजों की रिटायरमेंट उम्र, बाकी राज्यों में क्यों अटका?
Fri, 04 Sep 2026 05:19 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 04 Sep 2026 05:19 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों में जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का निर्देश दिया है। छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को दो महीने के भीतर सेवा नियम बदलने को कहा गया है। बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो हफ्ते में अपने फैसले पर पुनर्विचार कर अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। अदालत का जोर अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को बनाए रखने और खाली पदों की समस्या कम करने पर है।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने को लेकर बड़ा निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने सात राज्यों को न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने यह निर्देश दिया। शीर्ष अदालत का कहना है कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को सिस्टम में बनाए रखना जरूरी है।
किन सात राज्यों में रिटायरमेंट उम्र 62 साल होगी?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और मध्य प्रदेश को अपने सेवा नियमों में बदलाव करना होगा। महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी सेवानिवृत्ति उम्र 62 साल करनी होगी। इन राज्यों को सेवा नियमों में संशोधन करने के लिए शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह काम जल्द से जल्द किया जाए। कोर्ट ने इसे अधिमानतः दो महीने के भीतर पूरा करने को कहा है।
क्या 60 साल की उम्र पूरी कर चुके अधिकारी तुरंत रिटायर होंगे?
31 मार्च 2026 के बाद रिटायर हुए अधिकारियों का क्या होगा?
अभी ऐसा आदेश सभी राज्यों के लिए नहीं दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने उन्हें इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। इसके बाद उन्हें अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी।
किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दोबारा विचार करना है?
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने को कहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी को भी अपने फैसले पर दोबारा विचार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट ने इसके पीछे न्यायपालिका में अनुभवी अधिकारियों की कमी को बड़ी वजह माना है। अदालत के मुताबिक अनुभवी न्यायिक प्रतिभा का लगातार कम होना रोकना जरूरी है। जिला न्यायपालिका में स्वीकृत पदों और वास्तव में काम कर रहे अधिकारियों की संख्या के बीच अंतर है। खाली पदों की वजह से न्याय मिलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने इसी संदर्भ में कहा कि न्याय तक लोगों की पहुंच केवल एक उम्मीद बनकर नहीं रहनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: नौ दिन तक सुरंग में कैद: जुबां पर ‘हरे कृष्ण’, जन्माष्टमी के दिन निकला जिंदा, संजय के साथ कैसे हुआ ये चमत्कार?
क्या राज्यों ने आर्थिक बोझ का हवाला दिया था?
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने का विरोध केवल आर्थिक बोझ का हवाला देकर नहीं कर सकतीं। अदालत ने राज्य सरकारों से इस मुद्दे पर अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था। मौजूदा सुनवाई इसी व्यापक मुद्दे से जुड़ी याचिका पर हो रही थी।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा?
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें देशभर में जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की मांग की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्यों के रुख पर विचार किया और सात राज्यों को उम्र बढ़ाने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र कितनी है?
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किन सात राज्यों में रिटायरमेंट उम्र 62 साल होगी?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और मध्य प्रदेश को अपने सेवा नियमों में बदलाव करना होगा। महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी सेवानिवृत्ति उम्र 62 साल करनी होगी। इन राज्यों को सेवा नियमों में संशोधन करने के लिए शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह काम जल्द से जल्द किया जाए। कोर्ट ने इसे अधिमानतः दो महीने के भीतर पूरा करने को कहा है।
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क्या 60 साल की उम्र पूरी कर चुके अधिकारी तुरंत रिटायर होंगे?
- सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि नियमों में बदलाव होने तक इन सात राज्यों में 60 साल की उम्र पूरी करने वाले न्यायिक अधिकारी सेवानिवृत्त नहीं होंगे।
- उन्हें 62 साल की उम्र तक सेवा में रहने का मौका मिलेगा। हालांकि, यह अपने आप मिलने वाला अधिकार नहीं होगा। संबंधित हाईकोर्ट अधिकारी की योग्यता और प्रदर्शन का आकलन करेगा।
- शीर्ष अदालत ने उम्र बढ़ाने के साथ एक जरूरी शर्त भी रखी है। 60 साल की उम्र पूरी करने वाले अधिकारी की उपयुक्तता का आकलन संबंधित हाईकोर्ट करेगा। इसका मकसद यह है कि सिर्फ उम्र बढ़ने के आधार पर हर अधिकारी को सेवा में बने रहने का मौका न मिले। काम और प्रदर्शन के आधार पर तय किया जाएगा कि कौन अधिकारी आगे सेवा में रहने के योग्य है।
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31 मार्च 2026 के बाद रिटायर हुए अधिकारियों का क्या होगा?
- सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे अधिकारियों के लिए भी राहत का रास्ता खोला है। सात राज्यों में जिन न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति 31 मार्च 2026 या उसके बाद हुई है, उन्हें दोबारा न्यायिक सेवा में आने का विकल्प दिया जाएगा।
- लेकिन इसकी एक शर्त है। संबंधित अधिकारी ने रिटायरमेंट के बाद कोई दूसरी नौकरी हासिल नहीं की हो। ऐसे अधिकारियों को वापस न्यायिक पद पर आने का विकल्प मिलेगा।
अभी ऐसा आदेश सभी राज्यों के लिए नहीं दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने उन्हें इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। इसके बाद उन्हें अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी।
किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दोबारा विचार करना है?
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने को कहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी को भी अपने फैसले पर दोबारा विचार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट ने इसके पीछे न्यायपालिका में अनुभवी अधिकारियों की कमी को बड़ी वजह माना है। अदालत के मुताबिक अनुभवी न्यायिक प्रतिभा का लगातार कम होना रोकना जरूरी है। जिला न्यायपालिका में स्वीकृत पदों और वास्तव में काम कर रहे अधिकारियों की संख्या के बीच अंतर है। खाली पदों की वजह से न्याय मिलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने इसी संदर्भ में कहा कि न्याय तक लोगों की पहुंच केवल एक उम्मीद बनकर नहीं रहनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: नौ दिन तक सुरंग में कैद: जुबां पर ‘हरे कृष्ण’, जन्माष्टमी के दिन निकला जिंदा, संजय के साथ कैसे हुआ ये चमत्कार?
क्या राज्यों ने आर्थिक बोझ का हवाला दिया था?
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने का विरोध केवल आर्थिक बोझ का हवाला देकर नहीं कर सकतीं। अदालत ने राज्य सरकारों से इस मुद्दे पर अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था। मौजूदा सुनवाई इसी व्यापक मुद्दे से जुड़ी याचिका पर हो रही थी।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा?
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें देशभर में जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की मांग की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्यों के रुख पर विचार किया और सात राज्यों को उम्र बढ़ाने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र कितनी है?
- मौजूदा व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं। वहीं हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र 62 साल है। जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की उम्र भी 62 साल करने की मांग इसी अंतर के संदर्भ में लंबे समय से उठती रही है।
- फिलहाल सात राज्यों में 60 साल की उम्र पूरी करने वाले पात्र न्यायिक अधिकारियों को 62 साल तक सेवा में बने रहने का रास्ता मिलेगा। इससे अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं लंबे समय तक न्यायपालिका को मिल सकेंगी।
- साथ ही हाईकोर्ट के आकलन की शर्त के कारण केवल सक्षम अधिकारियों को ही आगे सेवा में रखने की व्यवस्था होगी। बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी अब इस मुद्दे पर दोबारा विचार करना होगा।