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5682 किसानों का 3 करोड़ 76 लाख बैंकों में पहुंचा
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Tue, 14 Apr 2015 12:15 AM IST
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खरीफ फसल का बीमा क्लेम देने में विलंब कर रही इफको टोक्यो फसल बीमा कंपनी ने आखिरकार 3 करोड़ 76 लाख 78 हजार 529 रुपये जिले की दस बैंकों में पहुंचा दिए। यह धनराशि फिलहाल 5682 फसल बीमा लेने वाले किसानों के खातों में पहुंचाई जाएगी। हालांकि खरीफ अभियान में जिले के 22,567 किसानों का 1 करोड़ 76 लाख 95 हजार 390 रुपये बीमा कंपनी झटक चुकी है। ऐसे में देखा जाए तो प्रीमियम देने वाले 16,885 किसान क्लेम लेने से वंचित रह गए।
अमर उजाला ने 7 अप्रैल को सिर्फ हवा में चल रहा बीमा आफिस नामक शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। दरअसल प्रीमियम के नाम पर बीमा कंपनी किसानों से रबी और खरीफ अभियान में करोड़ों की धनराशि झटक रही हैं। इसके बावजूद किसानों को क्लेम के नाम पर ठगा जा रहा है। खरीफ फसल सूखे की चपेट में आकर नष्ट हो चुकी हैं। सर्वे के बाद राजस्व विभाग ने खरीफ में 52 फीसदी फसल नष्ट होना पाया। जिले का कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल 418870 हेक्टेयर है।
इसमें 314470 हेक्टेयर पर खेती की जा रही है। खरीफ का क्षेत्रफल 93 हजार हेक्टेयर है। मानसूनी बारिश के छींटे 7 अगस्त 2014 को पड़े थे। तब करीब एक महीने तक पानी नहीं बरसा। इसके चलते खेतों में खड़ी ज्वार 14.415 हेक्टेयर, अरहर 10032 हेक्टेयर, उड़द 7320 हेक्टेयर, मूंग 3662 हेक्टेयर धान 70 हेक्टेयर, बाजरा 208 हेक्टेयर व तिल 13163 हेक्टेयर फसलों का नुकसान हुआ था। तमाम किसानों ने सूखी फसलों की जुताई कर डाली।
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वहीं कुछ किसानों ने खड़ी फसल पर मवेशी छुड़वा दिए। इसके लिए राजस्व विभाग ने दैवी आपदा कृषि अनुदान के तहत 24 करोड़ की डिमांड भेजी, लेकिन किसानों को सरकार से न कोई राहत मिली थी और न ही बीमा क्लेम ही दिया गया। अमर उजाला में बीमा क्लेम से संबंधित मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद मंडलायुक्त कल्पना अवस्थी ने प्रयास तेज किए।
इसी के बाद जिले में अधिकृत इफको टोक्यो फसल बीमा कंपनी ने तत्परता दिखाते हुए जिले के 10 बैंकों को फसल बीमा क्लेम 5682 किसानों का भेजा गया है। इन किसानों को 3,76,95,390 रुपये भेजा है। बैंकों ने कुल 22,567 किसानों का प्रीमियम बीमा कंपनी को 1 करोड़ 76 लाख 95 हजार 390 दिया। लेकिन इसमें 16885 किसानों को कंपनी ने फसल बीमा क्लेम नहीं दिया है।
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अमर उजाला ने 7 अप्रैल को सिर्फ हवा में चल रहा बीमा आफिस नामक शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। दरअसल प्रीमियम के नाम पर बीमा कंपनी किसानों से रबी और खरीफ अभियान में करोड़ों की धनराशि झटक रही हैं। इसके बावजूद किसानों को क्लेम के नाम पर ठगा जा रहा है। खरीफ फसल सूखे की चपेट में आकर नष्ट हो चुकी हैं। सर्वे के बाद राजस्व विभाग ने खरीफ में 52 फीसदी फसल नष्ट होना पाया। जिले का कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल 418870 हेक्टेयर है।
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इसमें 314470 हेक्टेयर पर खेती की जा रही है। खरीफ का क्षेत्रफल 93 हजार हेक्टेयर है। मानसूनी बारिश के छींटे 7 अगस्त 2014 को पड़े थे। तब करीब एक महीने तक पानी नहीं बरसा। इसके चलते खेतों में खड़ी ज्वार 14.415 हेक्टेयर, अरहर 10032 हेक्टेयर, उड़द 7320 हेक्टेयर, मूंग 3662 हेक्टेयर धान 70 हेक्टेयर, बाजरा 208 हेक्टेयर व तिल 13163 हेक्टेयर फसलों का नुकसान हुआ था। तमाम किसानों ने सूखी फसलों की जुताई कर डाली।
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वहीं कुछ किसानों ने खड़ी फसल पर मवेशी छुड़वा दिए। इसके लिए राजस्व विभाग ने दैवी आपदा कृषि अनुदान के तहत 24 करोड़ की डिमांड भेजी, लेकिन किसानों को सरकार से न कोई राहत मिली थी और न ही बीमा क्लेम ही दिया गया। अमर उजाला में बीमा क्लेम से संबंधित मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद मंडलायुक्त कल्पना अवस्थी ने प्रयास तेज किए।
इसी के बाद जिले में अधिकृत इफको टोक्यो फसल बीमा कंपनी ने तत्परता दिखाते हुए जिले के 10 बैंकों को फसल बीमा क्लेम 5682 किसानों का भेजा गया है। इन किसानों को 3,76,95,390 रुपये भेजा है। बैंकों ने कुल 22,567 किसानों का प्रीमियम बीमा कंपनी को 1 करोड़ 76 लाख 95 हजार 390 दिया। लेकिन इसमें 16885 किसानों को कंपनी ने फसल बीमा क्लेम नहीं दिया है।