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Saharanpur News: 17.29 करोड़ के जाली नोटों की चार कड़ियां तलाश रही एनआईए

Fri, 11 Sep 2026 01:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:09 AM IST
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NIA tracing four links in the 17.29 crore counterfeit currency case.
सहारनपुर। पीएनबी की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने का मामला अब महज बैंकिंग गड़बड़ी की जांच तक सीमित नहीं रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले को अपने हाथ में लेकर केस को री-रजिस्टर कर लिया है और अब पूरे मामले की साजिश की पड़ताल कर रही है।
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एनआईए की ओर से आरोपी निलंबित करेंसी चेस्ट मैनेजर अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जाली नोट किसी तस्कर, एजेंट या बाजार से बरामद नहीं हुए, बल्कि बैंक की करेंसी चेस्ट के भीतर मिले।
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नकली करेंसी सीधे उस व्यवस्था के अंदर पाई गई, जहां बड़ी मात्रा में वैध भारतीय मुद्रा का सुरक्षित रखरखाव और आवागमन होता है। ऐसे में एनआईए जांच अहम बिंदुओं की कड़ी तलाश रही है।
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चेस्ट में कब पहुंचे जाली नोट और किसने पहुंचाए : एनआईए के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट पहली बार कब पहुंचे और उन्हें वहां तक पहुंचाने वाला कौन था। जांच एजेंसी बैंक अधिकारियों की भूमिका के साथ नकदी के आवागमन और उससे जुड़े रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। इसमें नामजद अधिकारियों के अलावा कई कर्मचारी जांच के दायरे में आए हैं।
जाली नोटों से बदले गए असली नोट कहां गए : जांच का अहम बिंदु यह भी है कि यदि करेंसी चेस्ट में जाली नोट रखे गए तो उनके बदले के असली नोट कहां गए। असली और जाली नोटों के बीच किस स्तर पर अदला-बदली हुई। ऐसे में एनआईए कैश रिकॉर्ड, करेंसी चेस्ट के लेन-देन और संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। बड़े ट्रांजेक्शन वाले खातों की भी जांच की जा रही है।
जाली नोटों के स्रोत की पड़ताल : एनआईए की जांच का सबसे अहम बिंदु जाली नोटों का स्रोत है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नोट कहां से आए और उन्हें करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचाया गया। इसके पीछे कोई विदेशी नेटवर्क तो नहीं है। अगर विदेशी नेटवर्क मिलता है तो पश्चिमी यूपी का यह जाली नोट के मामले में सबसे बड़ा खुलासा हो सकता है।
बाजार में तो नहीं पहुंचे जाली नोट : एजेंसी इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि जाली नोट सिर्फ करेंसी चेस्ट तक सीमित रहे या बैंकिंग नेटवर्क के जरिये आगे भी बाजार में उनकी आवाजाही हुई।

ऐसे में जांच का दायरा सिर्फ 17.29 करोड़ की बरामदगी तक सीमित रहने के बजाय उससे जुड़े पूरे करेंसी ट्रेल तक पहुंच सकता है। हाल-फिलहाल में शहर में जाली नोट मिलने मामला सामने नहीं आया है, लेकिन यह जांच आसपास के जिलों और राज्यों में भी पहुंच सकती है।
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