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Ghazipur News: 22 रोडवेज बसें चलाने के लिए चालक नहीं, आठ मार्गों पर एक भी नहीं चलती
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रोडवेज बस से गायब पैनिक बटन। संवाद
गाजीपुर। रोडवेज की 89 बसों में से 22 बसों को चलाने के लिए चालक नहीं हैं। जबकि जिले के आठ रूट ऐसे हैं जहां एक भी बस नहीं चलती। वहीं यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रोडवेज डिपो की ओर से तमाम दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद एक वर्ष में नौ हादसे हो गए।
रोडवेज डिपो में कुल 89 बसें हैं। इनमें से 29 प्रतिशत यानी 25 बसों में पैनिक बटन नहीं थे या टूटे मिले। यही हाल फर्स्ट एड बॉक्स व फायर सिलिंडर दिखा। कुछ में फायर सिलिंडर तो नजर आए, लेकिन एक्सपायरी डेट नहीं दिखी। यह हाल तब है जब प्रतिदिन 1700 से अधिक यात्री यात्रा करते हैं। राजस्व के रूप में रोडवेज डिपो को प्रतिदिन सात लाख रुपये की आय होती है।
26 अगस्त को जंगीपुर थाना क्षेत्र के देवकठिया के पास रोडवेज बस में चढ़ते वक्त मजदूर की मौत हो गई थी। हादसे के बाद चालक बस लेकर मौके से भाग गया था। इसी तरह एक वर्ष में फोरलेन से लेकर लिंक मार्गों पर भी हादसे हुए हैं।
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यात्री रामकिशुन कुमार व जीऊत प्रसाद ने बताया कि कई रोडवेज बस चालक खराब ड्राइविंग करते हैं। इससे हमेशा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। यहां तक कि वह शहर के अंदर भी मनमाने ढंग से बस चलाने का काम करते हैं।
जरूरत 192 की और जिम्मेदारी उठा रहे 110 कंधे : चालकों व परिचालकों की कमी के कारण रोडवेज डिपो की 22 बसें खड़ी रहती हैं।
मानक के अनुसार रोडवेज डिपो के सभी 89 बसों के संचालन के लिए 192 चालक व इतनी ही संख्या में परिचालक की जरूरत है। लेकिन वर्तमान में केवल 115 चालक रोडवेज डिपो के पास हैं।
इनमें सेे तीन अनफिट हैं। जबकि दो चालकों को डक (बसों की धुलाई के कार्य पर) लगाया गया है। ऐसे में 110 चालकों के सहारे ही रोडवेज बसों का संचालन किया जा रहा है। जबकि वर्तमान में परिचालक 118 हैं।
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रोडवेज डिपो में कुल 89 बसें हैं। इनमें से 29 प्रतिशत यानी 25 बसों में पैनिक बटन नहीं थे या टूटे मिले। यही हाल फर्स्ट एड बॉक्स व फायर सिलिंडर दिखा। कुछ में फायर सिलिंडर तो नजर आए, लेकिन एक्सपायरी डेट नहीं दिखी। यह हाल तब है जब प्रतिदिन 1700 से अधिक यात्री यात्रा करते हैं। राजस्व के रूप में रोडवेज डिपो को प्रतिदिन सात लाख रुपये की आय होती है।
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26 अगस्त को जंगीपुर थाना क्षेत्र के देवकठिया के पास रोडवेज बस में चढ़ते वक्त मजदूर की मौत हो गई थी। हादसे के बाद चालक बस लेकर मौके से भाग गया था। इसी तरह एक वर्ष में फोरलेन से लेकर लिंक मार्गों पर भी हादसे हुए हैं।
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यात्री रामकिशुन कुमार व जीऊत प्रसाद ने बताया कि कई रोडवेज बस चालक खराब ड्राइविंग करते हैं। इससे हमेशा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। यहां तक कि वह शहर के अंदर भी मनमाने ढंग से बस चलाने का काम करते हैं।
जरूरत 192 की और जिम्मेदारी उठा रहे 110 कंधे : चालकों व परिचालकों की कमी के कारण रोडवेज डिपो की 22 बसें खड़ी रहती हैं।
मानक के अनुसार रोडवेज डिपो के सभी 89 बसों के संचालन के लिए 192 चालक व इतनी ही संख्या में परिचालक की जरूरत है। लेकिन वर्तमान में केवल 115 चालक रोडवेज डिपो के पास हैं।
इनमें सेे तीन अनफिट हैं। जबकि दो चालकों को डक (बसों की धुलाई के कार्य पर) लगाया गया है। ऐसे में 110 चालकों के सहारे ही रोडवेज बसों का संचालन किया जा रहा है। जबकि वर्तमान में परिचालक 118 हैं।

रोडवेज बस से गायब पैनिक बटन। संवाद

रोडवेज बस से गायब पैनिक बटन। संवाद