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Ghazipur News: नहरों में उड़ रही धूल, पानी की राह तक रहे किसान

Mon, 29 May 2023 12:55 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 29 May 2023 12:55 AM IST
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Dust blowing in the canals, farmers till the water
जनपद के अधिकांश हिस्सों में नहर में पानी की किल्लत होने से धान की नर्सरी डालने में किसानों को मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में धान का कटोरा भदौरा, जमानियां सहित सैदपुर व अन्य क्षेत्र के किसानों की खेती बेहद प्रभावित हो रही है। किसान पानी के अभाव में धान का बेहन भी नहीं डाल पा रहे हैं। वहीं, कई इलाकों में 15 दिन पहले नहर में पानी छोड़ा गया था, लेकिन साफ-सफाई नहीं होने से पानी टेल तक नहीं पहुंचा जिससे भी किसानों को खेती में इसका लाभ नहीं मिल पाया। इधर, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक जून से रोस्टर सिस्टम से नहरों में पानी आपूर्ति की जाएगी। जिसके बाद किसानों की समस्याएं मिट जाएंगी। इससे इतर किसानों का कहना है कि रोस्टर सिस्टम से नहर चलाने से समय पर किसानों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। साथ ही नहरों की साफ-सफाई भी बड़ा मसला है। जिसकी समुचित ढंग से सफाई कराकर और इस समय नहरों में पानी छोड़कर ही खेतों तक पानी पहुंचाया जा सकता है।
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भीमापार संवाददाता के अनुसार, शारदा सहायक नहर खंड 23 लालगंज रजवाहा के किनारे के किसानों की मुख्य फसल धान है। नहर के किनारे की मिट्टी भी धान की खेती के लिए काफी मुफीद है। लेकिन नहर में जरूरत के समय पानी की आपूर्ति नहीं होने से पानी के अभाव में धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं।
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बरेहता, खिदिरपुर, मलौरा, कुआंटी, कबुलहा, बरहपार भोजूराय, नाथूपुर, मंगारी, दलीपरायपट्टी, महुरसा, बिजरवां, मखदुमपुर, जगदीशपुर, गौरा आदि गांवों के किसान पूरी तैयारी के बावजूद पानी के अभाव में धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। मंगारी गांव के किसान राजीव कुमार सिंह कहते हैं कि कृषि विभाग द्वारा धान की नर्सरी डालने का उपयुक्त समय 25 मई से 7 जून तक बताया गया है, लेकिन इस समय नहर में पानी नहीं है। जिससे धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। धान की नर्सरी समय से नहीं डाले जाने से उत्पादन भी प्रभावित होता है।
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किसान चाह कर भी उन्नतिशील खेती के लिए सही समय पर नर्सरी डालने में असमर्थ है। इसके लिए विभाग द्वारा लागू रोस्टर प्रणाली घातक साबित हो रही है। जब किसानों को पानी की ज्यादा जरूरत होगी तो पानी ही नहीं रहेगा। 15 दिन पहले इस नहर में पानी छोड़ा तो गया था लेकिन पानी टेल तक नहीं पहुंच सका। जब किसानों ने धान की नर्सरी डालने के लिए खेत आदि तैयार करना शुरू किया तो नहर में पानी ही नहीं है।
बताते हैं कि यदि समय पर नहर में पानी नहीं आया तो खरीफ की मुख्य फसल धान की उपज पर ज्यादा विपरीत असर पड़ेगा । कारण कि समय से नर्सरी ही नहीं पड़ेगी तो रोपाई भी पिछड़ जाएगी। जिसका सीधा असर धान की पैदावार पर पड़ेगा। किसान रविंद्र सिंह, कैलाश नाथ पान्डेय, अरविंद सिंह, डा. कृष्ण कुमार सिंह, विवेकानंद सिंह ने कहा कि यदि जल्द ही नहर में पानी की आपूर्ति शीघ्र नहीं की गई तो किसान धरना प्रदर्शन को मजबूर होंगे। जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
इस संबंध में अवर अभियंता संजय गुप्ता ने बताया कि उच्चाधिकारियों के अनुसार 15 जून के बाद ही नहर में पानी आने की संभावना है। रोस्टर प्रणाली के हिसाब से ही पानी छोड़ा जाएगा।
बारा संवाददाता के अनुसार, धान की नर्सरी के समय नहरों और माइनरों में पानी के स्थान पर धूल उड़ रही है। भदौरा ब्लाक क्षेत्र में किसानों को सिंचाई की सुविधा देने के लिए चौधरी चरण सिंह, गहमर पूर्वी, गहमर पश्चिमी पंप कैनाल से निकली नहर व माइनरों में पानी गायब है। किसान मई माह के दूसरे सप्ताह से धान की नर्सरी (बेहन) डालना शुरू कर देते हैं।
हालांकि क्षेत्र के नहरों व माइनरों में पानी नहीं होने से वे किसान ही धान की बेहन डाल पा रहे हैं जिनके पास सिंचाई के अपने साधन हैं। वे महंगे दामों पर डीजल की खरीदारी कर जैसे-तैसे धान की नर्सरी डालने को विवश हैं। वहीं, ब्लॉक क्षेत्र के बारा, गहमर, मनिया, गोड़सरा, उसिया समेत कई गांवों के बड़ी संख्या में किसान जायद की फसल के साथ ही धान की नर्सरी तैयार करने से लेकर धान की रोपाई तक नहर के पानी पर निर्भर रहते हैं।
पंप कैनाल के अवर अभियंता सर्वजीत का कहना है कि अभी दो से तीन घंटे पंप कैनाल से नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। जल्द ही पूरी क्षमता के साथ पानी छोड़ा जाएगा। किसानों को पानी के लिए दिक्कत नहीं होगी।

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एक जून से रोस्टर प्रणाली से नहर में पानी छोड़ा जाएगा। दिसंबर में ही एक बार नहरों की साफ-सफाई होती है। बजट के अभाव में नहरों की सफाई का काम इस समय सभी जगहों पर होना मुश्किल होगा।
राजेंद्र प्रसाद, एई, सिंचाई विभाग
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