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एफआईआर लिखकर सो गई जीआरपी
Updated Tue, 03 Oct 2017 12:39 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। बिंदकी स्टेशन की अप लाइन पर ट्रेन रोकने के लिए ट्रैक पर स्लीपर रखने वालों की तलाश नहीं हो पाई है। अज्ञात 150 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जीआरपी सो गई। उसकी दलील है कि अब यात्रियों की इतनी भीड़ में ऐसे लोगों को कैसे तलाशें। उधर, सूत्रों बताते हैं पुलिस रेल प्रशासन की ओर गेंद फेंकने की तैयारी में है।
बता दें कि गुवाहाटी से नई दिल्ली को जाने वाली नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस का 28 सितंबर को बिंदकी स्टेशन के पास इंजन खराब हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि यात्रियों ने स्टेशन अधीक्षक से दूसरी ट्रेन रुकवाने की मांग की थी।
कंट्रोल रूम से किसी भी ट्रेन के स्टापेज न मिलने की सूचना पर यात्री आक्रोशित हो गए थे। उन्हें दूसरी अप लाइन पर उड़ीसा संपर्क क्रांति के आने का पता चला तो उसे रोकने के लिए ट्रैक पर स्लीपर रख रहे थे। इसी बीच ट्रेन आ गई और स्लीपर जितना रख पाए थे, उतना ही छोड़ कर यात्री दूर खड़े हो गए।
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इधर, स्टेशन अधीक्षक व रेल पथ निरीक्षक ने उड़ीसा संपर्क क्रांति के गार्ड से संपर्क साधा। ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगाई गई लेकिन तब तक वह स्लीपर से टकरा गई थी। हालांकि केवल इंजन का कैटल गार्ड ही क्षतिग्रस्त हुआ। रेलवे में यह एक बड़ा अपराध माना जाता है।
लिहाजा मामले ने तूल पकड़ा तो अगले दिन 29 सितंबर को रेल पथ निरीक्षक राकेश कुमार श्रीवास्तव ने 150 अज्ञात यात्रियों पर रिपोर्ट दर्ज कराई। जीआरपी प्रभारी विमलेश कुमार मौर्य का कहना है कि ट्रैक पर स्लीपर वाले आरोपियों का पता नहीं लग सका है। कोई ऐसा साधन भी नहीं है, जिससे पता लगाया जा सके। नई घटना न हो, इसके लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यदि कहीं से अज्ञात में किसी की शिनाख्त हो जाती है तो कार्रवाई जरूर की जाएगी।
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फतेहपुर। बिंदकी स्टेशन की अप लाइन पर ट्रेन रोकने के लिए ट्रैक पर स्लीपर रखने वालों की तलाश नहीं हो पाई है। अज्ञात 150 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जीआरपी सो गई। उसकी दलील है कि अब यात्रियों की इतनी भीड़ में ऐसे लोगों को कैसे तलाशें। उधर, सूत्रों बताते हैं पुलिस रेल प्रशासन की ओर गेंद फेंकने की तैयारी में है।
बता दें कि गुवाहाटी से नई दिल्ली को जाने वाली नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस का 28 सितंबर को बिंदकी स्टेशन के पास इंजन खराब हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि यात्रियों ने स्टेशन अधीक्षक से दूसरी ट्रेन रुकवाने की मांग की थी।
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कंट्रोल रूम से किसी भी ट्रेन के स्टापेज न मिलने की सूचना पर यात्री आक्रोशित हो गए थे। उन्हें दूसरी अप लाइन पर उड़ीसा संपर्क क्रांति के आने का पता चला तो उसे रोकने के लिए ट्रैक पर स्लीपर रख रहे थे। इसी बीच ट्रेन आ गई और स्लीपर जितना रख पाए थे, उतना ही छोड़ कर यात्री दूर खड़े हो गए।
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इधर, स्टेशन अधीक्षक व रेल पथ निरीक्षक ने उड़ीसा संपर्क क्रांति के गार्ड से संपर्क साधा। ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगाई गई लेकिन तब तक वह स्लीपर से टकरा गई थी। हालांकि केवल इंजन का कैटल गार्ड ही क्षतिग्रस्त हुआ। रेलवे में यह एक बड़ा अपराध माना जाता है।
लिहाजा मामले ने तूल पकड़ा तो अगले दिन 29 सितंबर को रेल पथ निरीक्षक राकेश कुमार श्रीवास्तव ने 150 अज्ञात यात्रियों पर रिपोर्ट दर्ज कराई। जीआरपी प्रभारी विमलेश कुमार मौर्य का कहना है कि ट्रैक पर स्लीपर वाले आरोपियों का पता नहीं लग सका है। कोई ऐसा साधन भी नहीं है, जिससे पता लगाया जा सके। नई घटना न हो, इसके लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यदि कहीं से अज्ञात में किसी की शिनाख्त हो जाती है तो कार्रवाई जरूर की जाएगी।