Deoria Mass Murder: भाई और उसके परिवार की हत्या के बाद भी आखिर क्यों गांव न आया ज्ञान? अब पुलिस का ये है प्लान
ज्ञान प्रकाश दूबे को पुलिस से जानकारी भी मिल चुकी है कि उसके बड़े भाई सत्यप्रकाश और भाभी किरण, दो भतीजियों और एक भतीजे की हत्या हो गई है, इसके बावजूद भी वह घर नहीं आया, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा हो रही है। पुलिस के एक अफसर की मानें तो ज्ञान प्रकाश काफी डरा-सहमा है।
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विस्तार
सत्यप्रकाश दूबे के भाई ज्ञानप्रकाश दूबे ने अपने हिस्से की भूमि का बैनामा प्रेम को कर दिया था। इसी के बाद से विवाद शुरू हो गया। विवाद इस कदर बढ़ा कि दो अक्तूबर को छह लोगों की हत्या हो गई। पुलिस सूत्रों की मानें तो ज्ञान प्रकाश दूबे फिलहाल गुजरात में है। उसे यहां लाकर बयान दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस उससे विवाद के जड़ का पता लगाएगी। इसे बयान दर्ज कर लिखा-पढ़ी में लाया जाएगा। साथ ही जिस जमीन को प्रेम ने बैनामा कराया है, वह किन परिस्थितियों में हुआ और इसे बदले में उसे कितने रुपये मिले, इसका साक्ष्य भी पुलिस तलाश रही है।
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आखिर ज्ञान प्रकाश क्यों नहीं आया गांव
ज्ञान प्रकाश दूबे को पुलिस से जानकारी भी मिल चुकी है कि उसके बड़े भाई सत्यप्रकाश और भाभी किरण, दो भतीजियों और एक भतीजे की हत्या हो गई है, इसके बावजूद भी वह घर नहीं आया, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा हो रही है।
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गांव में धारा 144 लागू
फतेहपुर गांव में प्रेम के मकान की पैमाइश के दौरान हंगामे के बाद धारा 144 लागू कर दी गई है। वहीं, बैरियाघाट से लेकर पैमाइश स्थल तक हंगामा करने वाले अराजकतत्वों की पहचान कर कार्रवाई में भी पुलिस- प्रशासन की टीम लगी है। गांव में किसी भी प्रकार की जुटान और धरना- प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।
सोशल मीडिया से सड़क तक कुछ लोग फतेहपुर कांड को जातीय रंग देने में लगे हैं। घटना को लेकर आसपास के कई गांवों में भी तनाव की स्थिति बनी है। जिसको देख पुलिस ने फतेहपुर गांव में धारा 144 लागू कर दी है। सोमवार को पैमाइश के दौरान प्रदर्शन करने वालों की पहचान पुलिस फोटो और वीडियो के माध्यम से करने में लगी है।
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प्रेम यादव ने सिर्फ 21 लाख में लिखवा ली थी 1.30 करोड़ की जमीन
बैनामे के दस्तावेज के मुताबिक, विक्रेता को 21 लाख रुपये दिए गए हैं, जबकि उसी दस्तावेज पर जमीन की सरकारी कीमत 1.30 करोड़ रुपये अंकित है। बैनामे में सामूहिक हत्याकांड का मुख्य आरोपी नवनाथ मिश्रा उर्फ पट्टू गवाह है।
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यह जमीन सत्यप्रकाश के भाई ज्ञानप्रकाश दूबे की थी। ज्ञानप्रकाश दूबे गुजरात में कमा रहे थे। 2014 में वह घर लौटे, तो उनकी भाभी किरन देवी से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। भाभी से मनमुटाव होने पर वह घर छोड़कर चले गए। उस समय गांव की प्रधानी प्रेम यादव के घर में थी।
लेड़हा टोले में ज्ञानप्रकाश के हिस्से की 1.314 हेक्टेयर (लगभग पांच बीघा) जमीन है। वहीं, उसके हिस्से में भाटपाररानी में भी जमीन थी। इतनी बड़ी संपत्ति का मालिक होने के बाद भी ज्ञान प्रकाश को रोटी के लिए दर-दर की ठोकर खानी पड़ी। प्रेम के परिवार में उसे ठौर मिला, तो वह अपनी सारी संपत्ति देने को राजी हो गया।
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प्रेम के भाई रामजी की पहल पर वह लेड़हा की जमीन बैनामा करने को राजी हो गया। सात जुलाई 2014 को बैनामे के दस्तावेज तैयार कर दोनों पक्ष निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री कराने पहुंचे। तत्कालीन रजिस्ट्रार बाल्मिकी तिवारी ने विक्रेता के बैंक खाते में जमीन की कीमत नहीं दिखा पाने पर बैनामा रोक दिया।
उस समय रजिस्ट्री रुक जाने पर प्रेम यादव ने रजिस्ट्रार पर जिले के सपा नेताओं से दबाव भी बनवाया था। लेकिन खाते में जब तक रकम नहीं दिखाई गई तो रजिस्ट्री की कार्रवाई पूरा करने के लिए अधिकारी तैयार नहीं हुए।
थक-हार कर प्रेम को ज्ञानप्रकाश के नाम पकड़ी बाजार के एक बैंक में खाता खुलवाकर 10 लाख रुपये जमा कराने पड़े। दस्तावेज प्रस्तुत करने के तीन दिन बाद 10 जुलाई 2014 को विक्रेता के खाते में रकम पहुंचने के बाद रजिस्ट्री की कार्रवाई की गई। इसके बाद यह रकम फिर कहां गई, इसकी जानकारी नहीं है।
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पुलिस और राजस्व विभाग को भनक लगी है कि यह रकम प्रेम के खाते में ही ट्रांसफर हो गई और कुछ नकद दे दी गई। इसके एक साल बाद ही पंचायत चुनाव चल रहा था। इसमें भी ज्ञान प्रकाश ने प्रेम की मदद की थी। ऐसी संपत्तियों का राजस्व विभाग अब पूरा ब्योरा खंगालने में जुट गया है।
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ये है पूरा मामला
बता दें कि देवरिया जिले में रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गांव में 2 अक्तूबर को सुबह छह बजे जमीन के विवाद में एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई। इससे गुस्साएं पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पक्ष के लोग दूसरे पक्ष के घर में घुसकर पति, पत्नी और उसकी तीन संतानों को गोली मारकर और धारदार हथियार से प्रहार कर हत्या कर दी, जबकि एक बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया है।