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इबादत में गुजरी पूरी रात, मस्जिदें सजाईं
बदायूं
Updated Wed, 03 Jun 2015 10:33 PM IST
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जिले भर में शब-ए-बराअत अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। इस मौके पर मस्जिदों व कब्रिस्तान को सजाया गया। रात भर लोग इबादत में मशगूल रहे। मकानों और मोहल्लों में ही सजावट हुई। जगह-जगह शर्बत, हलवा तकसीम किया गया। तकरीर पेश की गईं।
शहर के कई मोहल्लों में सजावट की गई। रात भर इबादत का दौर चला। मजारों पर गुलपोशी की गई। कई जगह जलसे हुए, जहां उलमा ने कौम के बंदों से दीनी तालीम के साथ इंसानियत की राह पर चलने की ताकीद की। जिले के बिसौली, ककराला, दहगवां, बिल्सी, वजीरगंज, अलापुर, सहसवान, जरीफनगर आदि इलाकों में सजावट की गई।
सैदपुर। कस्बे में जगह-जगह सजावट की गई। मौलानाओं ने तकरीर पेश की। मजहब के बारे में तफसील से बताया गया। हाफिज अकरम ने फरमाया कि शब-ए-बराअत यानि मुक्ति कि रात के नाम से मशहूर है। इस रात में पूरी रात जागकर इबादत की जाती है। कौम के लोग अपने गुनाहों से तौबा कर इबादत में मशगूल रहते हैं। माना जाता है कि कि इस रात खुदा अपने बंदों के करीब होता हैं और तौबा को कुबूल करता है। वो अपने बंदों के गुनाह माफ भी करता हैै। यही कारण है कि लोग इस रात जाग कर जाने अनजाने में किए गए गलत कामों से तौबा करते हैं।
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उन्होंने बताया कि इस माह कि 14 तारीख की रात में की जाने वाली इबादत का सवाब एक हजार महीनों की रातों की इबादत के बराबर है। अपनी जात से इस रात में दूसरों को परेशान करना शरीयत में जायज नहीं है। 15वीं तारीख का रोजा रखा माना जाता है। इसका बड़ा सवाब है। इस रात लोगों ने इबादत के साथ मस्जिद, मकान में रोशनी की। दरगाह पर गुलपोशी कर नजर नियाज की गई।
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शहर के कई मोहल्लों में सजावट की गई। रात भर इबादत का दौर चला। मजारों पर गुलपोशी की गई। कई जगह जलसे हुए, जहां उलमा ने कौम के बंदों से दीनी तालीम के साथ इंसानियत की राह पर चलने की ताकीद की। जिले के बिसौली, ककराला, दहगवां, बिल्सी, वजीरगंज, अलापुर, सहसवान, जरीफनगर आदि इलाकों में सजावट की गई।
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सैदपुर। कस्बे में जगह-जगह सजावट की गई। मौलानाओं ने तकरीर पेश की। मजहब के बारे में तफसील से बताया गया। हाफिज अकरम ने फरमाया कि शब-ए-बराअत यानि मुक्ति कि रात के नाम से मशहूर है। इस रात में पूरी रात जागकर इबादत की जाती है। कौम के लोग अपने गुनाहों से तौबा कर इबादत में मशगूल रहते हैं। माना जाता है कि कि इस रात खुदा अपने बंदों के करीब होता हैं और तौबा को कुबूल करता है। वो अपने बंदों के गुनाह माफ भी करता हैै। यही कारण है कि लोग इस रात जाग कर जाने अनजाने में किए गए गलत कामों से तौबा करते हैं।
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उन्होंने बताया कि इस माह कि 14 तारीख की रात में की जाने वाली इबादत का सवाब एक हजार महीनों की रातों की इबादत के बराबर है। अपनी जात से इस रात में दूसरों को परेशान करना शरीयत में जायज नहीं है। 15वीं तारीख का रोजा रखा माना जाता है। इसका बड़ा सवाब है। इस रात लोगों ने इबादत के साथ मस्जिद, मकान में रोशनी की। दरगाह पर गुलपोशी कर नजर नियाज की गई।