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बिल्डिंग बदलने से क्या होगा साहब!..एसएनसीयू के ‘हालात’ तो वही हैं

Fri, 04 Oct 2019 03:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 03:04 AM IST
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Health
बदायूं। महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के सुधार के लिए बिल्डिंग तो बदल दी गई, लेकिन हालात अब भी नहीं बदले हैं। न तो यहां पर्याप्त दवाएं हैं और न ही और चिकित्सक नियुक्त किए गए हैं। पूरा एसएनसीयू एक डॉक्टर पर निर्भर है। ऐसे में रात के समय स्टार्फ नर्सें हीं नवजात का इलाज करती हैं। वार्ड के सारे कार्य पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। इससे नवजात का ठीक से इलाज भी नहीं हो पा रहा है। जो स्टाफ तैनात है, वो बच्चों पर कम सोशल मीडिया पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। बुधवार देर रात एसएनसीयू वार्ड में हुईं दो बच्चों की मौत भी इसी लापरवाही का परिणाम बताई जा रही है।
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एसएनसीयू जब पुरानी बिल्डिंग में था, तब कई बार इंफेक्शन फैला था। उससे निपटने के लिए फ्यूमीगेशन भी कराया गया, लेकिन इसके बाद भी कई नवजात की जान चली गई थी। बच्चों की मौत की खबर लखनऊ तक पहुंची थी। जिससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में अफरातफरी मच गई थी। वहीं जिला प्रशासन तक हिल गया था। हालांकि बाद में डीजी हेल्थ ने इंफेक्शन फैलने से इनकार करके किनारा कर लिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि एसएनसीयू सिर्फ एक चिकित्सक पर निर्भर नहीं रहेगा। इसमें और चिकित्सक तैनात किए जाएंगे। तब से इतना बदलाव हुआ है कि एसएनसीयू वार्ड को पुरानी से हटाकर नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया। अलग से केएमसी वार्ड भी बना दिया गया है, फिर भी यहां की व्यवस्था नहीं सुधरीं।
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आज के हालात पर गौर करें तो एसएनसीयू वार्ड में एक चिकित्सक के अलावा कोई दूसरा चिकित्सक तैनात नहीं किया गया है। स्टाफ में भी कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जरूरी दवाओं का टोटा आज भी बना हुआ है। जो स्टाफ तैनात है, वह आज भी पुराने रवैये से कार्य कर रहा है। नवजात के परिवार वालों को पहले ही डरा दिया जाता है कि उनके बच्चे की हालत गंभीर है। बच्चे की जान बचे या नहीं, इसकी उनकी कोई गारंटी नहीं होगी। इसके लिए परिवार वालों से बीएचटी पर लिखवा लिया जाता है। कुल मिलाकर परिवार वाले अपने रिस्क पर आज भी बच्चों का इलाज कराने को मजबूर हैं। कोई इस बात की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है कि उनका बच्चा एसएनसीयू वार्ड से स्वस्थ होकर घर जाएगा।
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इलाज से अधिक सोशल मीडिया पर ध्यान दे रहा स्टाफ
एसएनसीयू वार्ड में तैनात स्टाफ पर इलाज पर कम सोशल मीडिया पर अधिक ध्यान देने के आरोप लग रहे हैं। इसके बाद भी स्टाफ नहीं सुधर रहा। बुधवार देर रात वार्ड में दो बच्चों की मौत हो गई थी। बच्चों के परिवार वालों ने भी आरोप लगाया था कि स्टाफ मोबाइल पर सोशल साइट्स और गेम खेलने में मस्त था। इससे उनके बच्चों की मौत हो गई थी।


बुधवार रात हुई दो बच्चों की मौत के बारे में जानकारी है। बच्चों की हालत काफी गंभीर थी। रही बात व्यवस्थाओं की तो धीरे-धीरे करके सुधार आएगा। बिल्डिंग बदलने से काफी प्रभाव पड़ा है। अभी और भी व्यवस्थाएं सुधरेंगी।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
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