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हत्या में मां-बेटों समेत चार को उम्रकैद, जुर्माना भी

Wed, 21 Jun 2017 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो             बदायूं।
अमर उजाला ब्यूरो             बदायूं। Updated Wed, 21 Jun 2017 11:58 PM IST
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Four including life imprisonment, including life imprisonment, have also been fined
court demo pic - फोटो : अमर उजाला
विकास कार्यों में धांधली की शिकायत पर हुई थी वारदात            
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हत्या के मामले में करीब नौ साल के बाद आया फैसला          
 
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम नलिन कुमार श्रीवास्तव ने हत्या के मामले में नामजद तत्कालीन महिला ग्राम प्रधान और उसके दो पुत्रों समेत चार लोगों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर कोर्ट ने 10-10 हजार रुपया जुर्माना भी डाला है। जुर्माने की रकम से आधी राशि बतौर मुआवजा वादी को देने का आदेश भी कोर्ट ने दिया है।       
हत्या की यह वारदात करीब नौ साल पहले बिल्सी थाने के गांव सुंदरनगर में 13 जुलाई 2008 को हुई थी। गांव के ही राजवीर पुत्र सरदार सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके गांव की महिला प्रधान कांती देवी की ओर से कराए गए विकास कार्यों में धांधली की शिकायत करते हुए जांच कराने की मांग को लेकर डीएम को शिकायत पत्र दिया गया था। इसकी वजह से कांती देवी और उसके परिवार वाले उससे रंजिश मानते थे। 13 जुलाई 2008 की शाम सात बजे वादी अपने पिता और भाई के साथ घर के बाहर बैठक में बैठा था। तभी गांव की प्रधान कांती देवी अपने दो पुत्रों राजवीर, सतेंद्र उर्फ नन्हे और छत्रपाल पुत्र शिवचरन के साथ आईं। सभी के हाथों में नाजायज रायफल-बंदूक थे। इन लोगों ने गालियां देते हुए कहा कि तुम लोग हमारे खिलाफ ज्यादा लिखा-पढ़ी करते हो। कांती देवी के कहने पर राजवीर, सतेंद्र उर्फ नन्हे और छत्रपाल ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। गोली उसके पिता सरदार सिंह को लगी। उनकी मौके पर मौत हो गई।            
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न्यायाधीश नलिन कुमार श्रीवास्तव ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रेमबाबू और बचाव पक्ष के वकीलों को सुनने के बाद सरदार सिंह की हत्या में कोर्ट ने तत्कालीन महिला प्रधान कांती देवी, उसके बेटे राजवीर, सतेंद्र पुत्र नन्हे और छत्रपाल को दोषी पाया। कोर्ट ने सभी दोषियों को उम्रकैद के साथ 10-10 हजार रुपये की सजा सुनाई। इस मामले में पुलिस ने कांती देवी के पति को षड्यंत्र का आरोपी बनाया था, जिसे आरोप सिद्ध न होने पर कोर्ट ने बरी कर दिया।
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