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डीसी ने बीएसएस के निरीक्षण पर खड़े किए सवाल
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डीसी ने बीएसए के निरीक्षण पर खड़े किए सवाल
बदायूं। बीएसए ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में चेकिंग के दौरान जो खामियां पकड़ी, उसे जिला समन्वयक (कस्तूरबा) ने अपनी जांच रिपोर्ट में गलत ठहरा दिया। डीसी ने जो रिपोर्ट दी है, उसमें उन्हें सब कुछ ठीक मिला। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बीएसए ने जो कुछ देखा वह गलत था या डीसी की रिपोर्ट गलत है। इसे लेकर विभाग के अफसरों में भी चर्चाएं जोरों पर हैं।
डीएम ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में तख्त पहुंचाने के निर्देश दिए थे। उसके बाद तख्त भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। तत्कालीन डीसी ने एक फर्नीचर हाउस फर्म को तख्त पहुंचाने के लिए नामित कर दिया। ठेकेदार द्वारा वजीरगंज स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में दस तख्त पहुंचाए गए। उसके बाद ठेकेदार ने स्कूलों में तख्त पहुंचाने से हाथ पीछे खींच लिए और भुगतान की मांग कर दी। इसी बीच विद्यालयों का निरीक्षण करते हुए बीएसए रामपाल सिंह राजपूत वजीरगंज के कस्तूरबा गांधी विद्यालय पहुंच गए। वहां निरीक्षण के दौरान उन्हें तख्त गुणवत्ताहीन मिले, जिस पर उन्होंने भुगतान पर रोक लगाने के साथ ही जांच के लिए सहायक वित्त लेखाधिकारी को कहा। उन्होंने इसकी जांच डीसी, कस्तूरबा से कराई, लेकिन डीसी ने जो रिपोर्ट दी, वह कुछ और ही कहानी कहने लगी। डीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि सभी तख्त मानक के अनुसार हैं। इस पर सहायक वित्त लेखाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए डीसी को दोबारा से जांच करने के लिए निर्देश दिए हैं।
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निरीक्षण के दौरान बीएसए को तख्तों में कमियां मिली थीं। उनके निर्देश पर इसकी जांच कराई गई। इसमें डीसी ने जो रिपोर्ट दी, उसके अनुसार वहां पर सब सही मिला। ऐसे में दोबारा उन्हें जांच के लिए कहा है।
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-पृथ्वीपाल सिंह, सहायक वित्त लेखाधिकारी
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बदायूं। बीएसए ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में चेकिंग के दौरान जो खामियां पकड़ी, उसे जिला समन्वयक (कस्तूरबा) ने अपनी जांच रिपोर्ट में गलत ठहरा दिया। डीसी ने जो रिपोर्ट दी है, उसमें उन्हें सब कुछ ठीक मिला। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बीएसए ने जो कुछ देखा वह गलत था या डीसी की रिपोर्ट गलत है। इसे लेकर विभाग के अफसरों में भी चर्चाएं जोरों पर हैं।
डीएम ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में तख्त पहुंचाने के निर्देश दिए थे। उसके बाद तख्त भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। तत्कालीन डीसी ने एक फर्नीचर हाउस फर्म को तख्त पहुंचाने के लिए नामित कर दिया। ठेकेदार द्वारा वजीरगंज स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में दस तख्त पहुंचाए गए। उसके बाद ठेकेदार ने स्कूलों में तख्त पहुंचाने से हाथ पीछे खींच लिए और भुगतान की मांग कर दी। इसी बीच विद्यालयों का निरीक्षण करते हुए बीएसए रामपाल सिंह राजपूत वजीरगंज के कस्तूरबा गांधी विद्यालय पहुंच गए। वहां निरीक्षण के दौरान उन्हें तख्त गुणवत्ताहीन मिले, जिस पर उन्होंने भुगतान पर रोक लगाने के साथ ही जांच के लिए सहायक वित्त लेखाधिकारी को कहा। उन्होंने इसकी जांच डीसी, कस्तूरबा से कराई, लेकिन डीसी ने जो रिपोर्ट दी, वह कुछ और ही कहानी कहने लगी। डीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि सभी तख्त मानक के अनुसार हैं। इस पर सहायक वित्त लेखाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए डीसी को दोबारा से जांच करने के लिए निर्देश दिए हैं।
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निरीक्षण के दौरान बीएसए को तख्तों में कमियां मिली थीं। उनके निर्देश पर इसकी जांच कराई गई। इसमें डीसी ने जो रिपोर्ट दी, उसके अनुसार वहां पर सब सही मिला। ऐसे में दोबारा उन्हें जांच के लिए कहा है।
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-पृथ्वीपाल सिंह, सहायक वित्त लेखाधिकारी