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बदायूं: बाढ़ पीड़ितों के लिए लगा भगवा टेंट, ग्रामीण बोले- अफसरों ने रंग देखा, खानपान की व्यवस्था नहीं

Sat, 05 Sep 2026 07:03 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 05 Sep 2026 07:03 PM IST
सार

बदायूं के उसहैत इलाके में गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित कदमनगला गांव में प्रशासन ने भगवा रंग के दो राहत शिविर लगाए हैं। ग्रामीणों ने टेंट के रंग पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि दो दिन से खाने-पीने और पशुओं के चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। 

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Saffron tent set up as temporary flood relief camp villagers raises question in budaun
गांव कदमनगला के बाढ़ पीड़ितों के लिए लगा टेंट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बदायूं में जिला प्रशासन ने गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित गांव कदमनगला के पीड़ितों को राहत देने के लिए भगवा रंग के दो शिविर लगवाए हैं। टेंट के रंग को लेकर ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामीण मुसीबत में हैं, लेकिन अधिकारी भगवा रंग का टेंट लगवाने पर ध्यान दे रहे हैं। दो दिन से टेंट में खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। टेंट में सिर्फ रात काटने के लिए चारपाई और गद्दे ही उपलब्ध हैं। 

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उसहैत क्षेत्र में गंगा नदी से गांवों में तबाही जारी है। सबसे ज्यादा नुकसान कदमनगला के ग्रामीणों का हुआ है। ग्राम कदमनगला में अभी तक सिर्फ एक बाढ़ राहत शिविर लगाया गया था, जो गांव से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर था। यहां तक गांव से पहुंचने का मार्ग भी बेहद दुर्गम है। इस वजह से ग्रामीण शिविर तक नहीं जा सके। जिस वजह से ग्रामीण सड़क किनारे अस्थाई टेंट लगाकर रहने लगे। कुछ दिन पहले डीएम कदमनगला गांव में पीड़ितों से मिलने पहुंचे। ग्रामीणों की शिकायत के बाद शुक्रवार से गांव के पास सूखे स्थान पर दो टेंट लगाए गए हैं, उसमें चारपाई और गद्दे डलवाए गए, जहां ग्रामीण रह रहे हैं, लेकिन यह टेंट प्रशासन ने भगवा रंग का लगवाया है। 
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खानपान की व्यवस्था नहीं 
ग्रामीणों का कहना है कि मुसीबत में भी टेंट लगाने के लिए अधिकारियों को रंग देखना पड़ रहा है। ग्राम कदमनगला के छविराम ने बताया कि टेंट में रात में रहने की व्यवस्था हैं, लेकिन खाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सोने के लिए तो हमने सड़क किनारे पहले की व्यवस्था कर रखी थी। राजस्व विभाग के लेखपाल अमित ने बताया कि अभी शिविर लगे दो दिन हुए हैं, ग्रामीणों के खाने की व्यवस्था भी की जा रही है।  ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के चारे का इंतजाम खुद ही करना पड़ रहा है। बाढ़ में सभी खेतों में पानी भरा है। फसलें बर्बाद हो गईं। पशुओं के चारे की सबसे बड़ी समस्या बनी है। 

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बाढ़ से प्रभावित रैपुरा गांव में पहुंची स्वास्थ्य टीम
बाढ़ से प्रभावित रैपुरा गांव में शनिवार को स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जिसमें ग्रामीणों की जांच कर दवाएं वितरित की गई। कई ग्रामीणों की जरूरी जांचें की गईं। शनिवार को गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उसावां की ओर से स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों की जांच की गई। खुद को बीमारियों से सुरक्षित रखने के उपाय भी बताए गए। इसके अलावा जरूरी जांचें भी की गईं।

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