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हल्दूवाला में घुसा बाघ मार गिराया
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 13 Nov 2015 12:28 AM IST
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बढ़ापुर में भोजन की तलाश में निकला बाध बढ़ापुर क्षेत्र के गांव हल्दूवाला के पास स्थित एक मुर्गी फार्म के दड़बे में आ घुसा। मुर्गियों का शोर सुनकर पास के दड़बे में सो रहे फार्म मालिक और उसके नौकर के आने पर बाघ मुर्गियों को छोड़ दोनों पर हमला बोल कर दिया। दोनों लोग घायल हो गए। घायल होने के बाद भी दोनों ने ग्रामीणों की मदद से लाठी-डडों और फावड़ों से हमला करके बाघ को मार गिराया।
बढ़ापुर थाना क्षेत्र के गांव सईद नगर उर्फ हल्दूवाला निवासी बलवंत सिंह गांव के पास स्थित अपने खेत पर मुर्गी पालन करता है। मंगलवार रात मुर्गी फार्म पर बलवंत सिंह और नौकर उपेंद्र सिंह सोए हुए थे। तड़के करीब साढ़े चार बजे एक टाइगर मुर्गियों के दड़बे में आ घुसा और दो दर्जन मुर्गियों को मार डाला। मुर्गियों का शोर सुनकर पास के दड़बे में सो रहे बलवंत सिंह और उसका नौकर उठकर दड़बे में जा घुसे सामने खड़े बाघ को देखकर उनके होश उड़ गए। बाघ मुर्गियों को छोड़कर उन दोनों पर टूट पड़ा। दोनों दड़बे से बाहर की ओर दौड़ पड़े। बाघ भी उनके पीछे दौड़ा और उन्हें घायल कर दिया। घायल होने के बाद भी दोनों ने हिम्मत दिखाते हुए लाठी-डंडे और फावड़े लेकर बाघ से भिड़ गए। इसी दौरान अपने खेत पर पानी देने जा रहे गांव के ही ज्ञानी गुरबख्श सिंह को मुर्गी फार्म के समीप शोर सुनाई दिया। उसने गांव जाकर मुर्गी फार्म पर किसी अनहोनी घटित होने की सूचना शोर मचाकर बलवंत के परिजनों और ग्रामीणों को दी। ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर फार्म की ओर दौडे़े। उन्होंने देखा कि दोनों लोग बाघ से भिड़े हुए हैं।
ग्रामीण भी बलवंत सिंह और उपेंद्र के साथ बाघ पर लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर टूट पड़े और मिलकर बाघ को मार डाला। बाघ की लंबाई नौ फुट, 11 इंच नापी गई है। गंभीरावस्था में बलवंत सिंह को नगीना और बिजनौर के बाद उत्तराखंड के जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती कराया गया। बलवंत सिंह को सिर और शरीर पर कई जगह चोटें आई हैं और उपेंद्र के एक हाथ-पैर में चोटें आई हैं।
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हल्दूवाला क्षेत्र वन विभाग की साहूवाला वन रेंज के खारी बीट के अंतर्गत आता है। सूचना मिलने पर बीट प्रभारी वन रक्षक चंद्रभान सिंह वन दरोगा जयपाल सिंह और मदन सिंह मेवाड़ घटनास्थल पर पहुंचे और अपने उच्चाधिकारियों को टाइगर के मारे जाने की सूचना दी। साहूवाला वन क्षेत्राधिकारी के अवकाश पर होने के कारण बढ़ापुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी इरफान अली मौके पर पहुंचे और बाघ का शव ले जाने लगे।
वहां मौजूद ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए शव को ले जाने से रोका और कहा कि टाइगर को जंगल में नहीं मारा गया है, आत्म सुरक्षा में फार्म पर मारा गया है इसलिए पहले वन विभाग का कोई उच्चाधिकारी मौके पर आकर यह आश्वासन दे कि ग्रामीणों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा तब बाघ को ले जाने दिया जाएगा। वन क्षेत्राधिकारी इरफान अली और थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्रपाल सिंह ने ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। बाद में सीओ नगीना गमलेश्वर बिल्टोरिया घटनास्थल पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद ग्रामीणों के साथ नाइंसाफी न होने देने का भरोसा दिलाकर बाघ को वहां से उठवाया।
अज्ञात में दर्ज हुई रिपोर्ट
साहूवाला वन रेंज के घटना क्षेत्र वाली बीट के प्रभारी वन रक्षक चंद्रभान सिंह ने मुर्गी फार्म मालिक बलवंत सिंह और नौकर उपेंद्र को टाइगर द्वारा घायल करने और ग्रामीणों द्वारा टाइगर को मारने की घटना का रिपोर्ट अज्ञात में दर्ज कराया है। फार्म मालिक के परिजनों ने भी आत्म सुरक्षा में टाइगर के मारे जाने की लिखित सूचना पुलिस में दी है।
वन संरक्षक मुरादाबाद ने किया मुआयना
ग्रामीणों के हाथों टाइगर मारे जाने की सूचना पर यहां पहुंचे मुरादाबाद मंडल के वन संरक्षक कमलेश कुमार ने डीएफओ नजीबाबाद प्रवीण कुमार राघव के साथ घटनास्थल का मौका मुआयना किया। साहूवाला रेंज कार्यालय जाकर पोस्टमार्टम के लिए रखे मृत टाइगर को देखा।
महिलाओं ने नोचे बाघ के बाल
आज के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास का कीड़ा समूल नष्ट नहीं हुआ है इसका जीता जागता प्रमाण मुर्गी फार्म पर मरे पड़े टाइगर के साथ देखने को मिला है। वहां देखा गया कि टाइगर को देखने आने वाली अधिकांश महिलाएं टाइगर के पास बैठकर टाइगर की खाल से बाल नोचने में लगी थी। महिलाओं की धारणा है कि बाघ का खाल के बाल जादू करने, उतारने और टोटकों के काम में लाए जाते हैं।
बाघ देखने के लिए लगा रहा तांता
पोस्टमार्टम के लिए टाइगर के शव को बढ़ापुर के निकट रेंज कार्यालय परिसर में लाया। बढ़ापुर ही नहीं पूरे क्षेत्र में टाइगर मारे जाने वाली बात आग की तरह फैल गई और टाइगर को देखने के लिए रेंज कार्यालय पर तांता लग गया।
इसमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक देखी गई। कई युवाओं ने टाइगर के शव के पास बैठकर अपने फोटो भी खिंचवाए। साहूवाला रेंज कार्यालय जाने वाली सड़क पर दिनभर भीड़ और वाहनों का आवागमन चलता रहा। सुरक्षा की दृष्टि से वन विभाग को कार्यालय के समीप कई स्थानों पर रस्सी के अवरोधक बनाने पड़े। भीड़ बढ़ने पर थाने के कई दरोगाओं और पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। साहूवाला रेंज कार्यालय में पूरे दिन टाइगर को देखने वाली भारी भीड़ उमड़ी रही।
देर रात तक हुआ बाघ का पोस्टमार्टम
बुधवार को दीपावली पर्व पर छुट्टी होने के कारण वन विभाग को टाइगर का पोस्टमार्टम कराने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े तब जाकर देर रात तक पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूर्ण हुई। अधिकारियों के बुलावे पर अपनी छुट्टी निरस्त कर रेंज कार्यालय पहुंचे साहूवाला के वन क्षेत्राधिकारी बीबीएल शर्मा पशु चिकित्साधिकारियों की तलाश में काफी भटके तब जाकर पशु चिकित्सा केंद्र बढ़ापुर के पशु चिकित्साधिकारी डा. कौशल कुमार, कासमपुर गढ़ी के डा. धीरज शर्मा और कोतवाली के डा. रवींद्र कुमार के तीन सदस्य पेनल ने मृत टाइगर का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बाद में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के माध्यम से वन विभाग के डीएफओ को दी जाएगी।
कई दिन से भूखा और कमजोर था
मुर्गी फार्म पर आत्म सुरक्षा में ग्रामीणों द्वारा मारे गए टाइगर के बारे में शव का निरीक्षण उपरांत वनाधिकारियों ने बताया कि टाइगर के मुंह के दांत गले हुए होने पर उसकी आयु 12-14 वर्ष होने का अनुमान है। दांत कमजोर होने और बूढ़ापे के चलते बड़े जानवर का शिकार करने में सक्षम न होने पर ही उसने मुर्गी फार्म पर हमला बोला। टाइगर के शव को देख लगता था कि वह कई दिन से भूखा था।
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बढ़ापुर थाना क्षेत्र के गांव सईद नगर उर्फ हल्दूवाला निवासी बलवंत सिंह गांव के पास स्थित अपने खेत पर मुर्गी पालन करता है। मंगलवार रात मुर्गी फार्म पर बलवंत सिंह और नौकर उपेंद्र सिंह सोए हुए थे। तड़के करीब साढ़े चार बजे एक टाइगर मुर्गियों के दड़बे में आ घुसा और दो दर्जन मुर्गियों को मार डाला। मुर्गियों का शोर सुनकर पास के दड़बे में सो रहे बलवंत सिंह और उसका नौकर उठकर दड़बे में जा घुसे सामने खड़े बाघ को देखकर उनके होश उड़ गए। बाघ मुर्गियों को छोड़कर उन दोनों पर टूट पड़ा। दोनों दड़बे से बाहर की ओर दौड़ पड़े। बाघ भी उनके पीछे दौड़ा और उन्हें घायल कर दिया। घायल होने के बाद भी दोनों ने हिम्मत दिखाते हुए लाठी-डंडे और फावड़े लेकर बाघ से भिड़ गए। इसी दौरान अपने खेत पर पानी देने जा रहे गांव के ही ज्ञानी गुरबख्श सिंह को मुर्गी फार्म के समीप शोर सुनाई दिया। उसने गांव जाकर मुर्गी फार्म पर किसी अनहोनी घटित होने की सूचना शोर मचाकर बलवंत के परिजनों और ग्रामीणों को दी। ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर फार्म की ओर दौडे़े। उन्होंने देखा कि दोनों लोग बाघ से भिड़े हुए हैं।
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ग्रामीण भी बलवंत सिंह और उपेंद्र के साथ बाघ पर लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर टूट पड़े और मिलकर बाघ को मार डाला। बाघ की लंबाई नौ फुट, 11 इंच नापी गई है। गंभीरावस्था में बलवंत सिंह को नगीना और बिजनौर के बाद उत्तराखंड के जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती कराया गया। बलवंत सिंह को सिर और शरीर पर कई जगह चोटें आई हैं और उपेंद्र के एक हाथ-पैर में चोटें आई हैं।
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हल्दूवाला क्षेत्र वन विभाग की साहूवाला वन रेंज के खारी बीट के अंतर्गत आता है। सूचना मिलने पर बीट प्रभारी वन रक्षक चंद्रभान सिंह वन दरोगा जयपाल सिंह और मदन सिंह मेवाड़ घटनास्थल पर पहुंचे और अपने उच्चाधिकारियों को टाइगर के मारे जाने की सूचना दी। साहूवाला वन क्षेत्राधिकारी के अवकाश पर होने के कारण बढ़ापुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी इरफान अली मौके पर पहुंचे और बाघ का शव ले जाने लगे।
वहां मौजूद ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए शव को ले जाने से रोका और कहा कि टाइगर को जंगल में नहीं मारा गया है, आत्म सुरक्षा में फार्म पर मारा गया है इसलिए पहले वन विभाग का कोई उच्चाधिकारी मौके पर आकर यह आश्वासन दे कि ग्रामीणों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा तब बाघ को ले जाने दिया जाएगा। वन क्षेत्राधिकारी इरफान अली और थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्रपाल सिंह ने ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। बाद में सीओ नगीना गमलेश्वर बिल्टोरिया घटनास्थल पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद ग्रामीणों के साथ नाइंसाफी न होने देने का भरोसा दिलाकर बाघ को वहां से उठवाया।
अज्ञात में दर्ज हुई रिपोर्ट
साहूवाला वन रेंज के घटना क्षेत्र वाली बीट के प्रभारी वन रक्षक चंद्रभान सिंह ने मुर्गी फार्म मालिक बलवंत सिंह और नौकर उपेंद्र को टाइगर द्वारा घायल करने और ग्रामीणों द्वारा टाइगर को मारने की घटना का रिपोर्ट अज्ञात में दर्ज कराया है। फार्म मालिक के परिजनों ने भी आत्म सुरक्षा में टाइगर के मारे जाने की लिखित सूचना पुलिस में दी है।
वन संरक्षक मुरादाबाद ने किया मुआयना
ग्रामीणों के हाथों टाइगर मारे जाने की सूचना पर यहां पहुंचे मुरादाबाद मंडल के वन संरक्षक कमलेश कुमार ने डीएफओ नजीबाबाद प्रवीण कुमार राघव के साथ घटनास्थल का मौका मुआयना किया। साहूवाला रेंज कार्यालय जाकर पोस्टमार्टम के लिए रखे मृत टाइगर को देखा।
महिलाओं ने नोचे बाघ के बाल
आज के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास का कीड़ा समूल नष्ट नहीं हुआ है इसका जीता जागता प्रमाण मुर्गी फार्म पर मरे पड़े टाइगर के साथ देखने को मिला है। वहां देखा गया कि टाइगर को देखने आने वाली अधिकांश महिलाएं टाइगर के पास बैठकर टाइगर की खाल से बाल नोचने में लगी थी। महिलाओं की धारणा है कि बाघ का खाल के बाल जादू करने, उतारने और टोटकों के काम में लाए जाते हैं।
बाघ देखने के लिए लगा रहा तांता
पोस्टमार्टम के लिए टाइगर के शव को बढ़ापुर के निकट रेंज कार्यालय परिसर में लाया। बढ़ापुर ही नहीं पूरे क्षेत्र में टाइगर मारे जाने वाली बात आग की तरह फैल गई और टाइगर को देखने के लिए रेंज कार्यालय पर तांता लग गया।
इसमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक देखी गई। कई युवाओं ने टाइगर के शव के पास बैठकर अपने फोटो भी खिंचवाए। साहूवाला रेंज कार्यालय जाने वाली सड़क पर दिनभर भीड़ और वाहनों का आवागमन चलता रहा। सुरक्षा की दृष्टि से वन विभाग को कार्यालय के समीप कई स्थानों पर रस्सी के अवरोधक बनाने पड़े। भीड़ बढ़ने पर थाने के कई दरोगाओं और पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। साहूवाला रेंज कार्यालय में पूरे दिन टाइगर को देखने वाली भारी भीड़ उमड़ी रही।
देर रात तक हुआ बाघ का पोस्टमार्टम
बुधवार को दीपावली पर्व पर छुट्टी होने के कारण वन विभाग को टाइगर का पोस्टमार्टम कराने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े तब जाकर देर रात तक पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूर्ण हुई। अधिकारियों के बुलावे पर अपनी छुट्टी निरस्त कर रेंज कार्यालय पहुंचे साहूवाला के वन क्षेत्राधिकारी बीबीएल शर्मा पशु चिकित्साधिकारियों की तलाश में काफी भटके तब जाकर पशु चिकित्सा केंद्र बढ़ापुर के पशु चिकित्साधिकारी डा. कौशल कुमार, कासमपुर गढ़ी के डा. धीरज शर्मा और कोतवाली के डा. रवींद्र कुमार के तीन सदस्य पेनल ने मृत टाइगर का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बाद में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के माध्यम से वन विभाग के डीएफओ को दी जाएगी।
कई दिन से भूखा और कमजोर था
मुर्गी फार्म पर आत्म सुरक्षा में ग्रामीणों द्वारा मारे गए टाइगर के बारे में शव का निरीक्षण उपरांत वनाधिकारियों ने बताया कि टाइगर के मुंह के दांत गले हुए होने पर उसकी आयु 12-14 वर्ष होने का अनुमान है। दांत कमजोर होने और बूढ़ापे के चलते बड़े जानवर का शिकार करने में सक्षम न होने पर ही उसने मुर्गी फार्म पर हमला बोला। टाइगर के शव को देख लगता था कि वह कई दिन से भूखा था।