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नेताजी की प्रचार गाड़ी, पहुंच रही रिश्तेदारी
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ज्ञानपुर। लोकसभा चुनाव के प्रचार के बहाने कई समर्थक और पदाधिकारियों के अच्छे दिन आ गए हैं। प्रचार के बहाने वह शादी- विवाह के सीजन में रिश्तेदारी भी पहुंच रहे हैं। राजनीतिक दलों के कार्यालय से प्रतिदिन सुबह वाहन और खर्च लेने के बाद समर्थक अपने कार्यों को निपटाने में लगे हैं। यही नहीं चुनाव आयोग की आंखों में धूल झोंककर प्रत्याशी बिना झंडा लगाए दर्जन भर से अधिक वाहन बिना अनुमति के प्रचार में लगाए हैं। इसकी भनक निर्वाचन विभाग को भी नहीं लग पा रही है।
भदोही लोकसभा चुनाव में भाजपा, गठबंधन, कांग्रेस समेत वैसे 12 प्रत्याशी मैदान में बचे हैं, लेकिन प्रमुख दलों की ओर से युद्ध स्तर पर प्रचार किया जा रहा है। लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभाओं के एक-एक गांव तक अपनी पैठ बनाने के लिए पार्टी के पदाधिकारियों संग समर्थकों का सहयोग लिया जा रहा है। चुनाव केंद्रीय कार्यालय से प्रतिदिन सुबह एक-एक वाहन सौंपने के साथ ही दिन भर का खर्च समर्थकों और पदाधिकारियों को दिया जा रहा है। प्रत्याशियों को लग रहा है कि उनका प्रचार बेहतर ढंग से हो रहा है, लेकिन हकीकत में उमस और गर्मी के बीच वाहन पाने के बाद समर्थक अपने सगे-संबंधियों के यहां पहुंचकर दिन गुजार रहे हैं। एक दल के पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पांच साल में चुनाव आता है। इस मौके का फायदा उठाकर वाहन से सभी रितेश्दारी पहुंचकर हालचाल लिया जा रहा है। चुनाव खर्च से बचने के लिए प्रत्याशी बिना झंडा लगे वाहनों का भी प्रयोग कर रहे हैं, जिसे निर्वाचन विभाग की धर्मेन्द्र पाल
भदोही लोकसभा चुनाव में भाजपा, गठबंधन, कांग्रेस समेत वैसे 12 प्रत्याशी मैदान में बचे हैं, लेकिन प्रमुख दलों की ओर से युद्ध स्तर पर प्रचार किया जा रहा है। लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभाओं के एक-एक गांव तक अपनी पैठ बनाने के लिए पार्टी के पदाधिकारियों संग समर्थकों का सहयोग लिया जा रहा है। चुनाव केंद्रीय कार्यालय से प्रतिदिन सुबह एक-एक वाहन सौंपने के साथ ही दिन भर का खर्च समर्थकों और पदाधिकारियों को दिया जा रहा है। प्रत्याशियों को लग रहा है कि उनका प्रचार बेहतर ढंग से हो रहा है, लेकिन हकीकत में उमस और गर्मी के बीच वाहन पाने के बाद समर्थक अपने सगे-संबंधियों के यहां पहुंचकर दिन गुजार रहे हैं। एक दल के पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पांच साल में चुनाव आता है। इस मौके का फायदा उठाकर वाहन से सभी रितेश्दारी पहुंचकर हालचाल लिया जा रहा है। चुनाव खर्च से बचने के लिए प्रत्याशी बिना झंडा लगे वाहनों का भी प्रयोग कर रहे हैं, जिसे निर्वाचन विभाग की धर्मेन्द्र पाल
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