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विवाह से ही मनुष्य गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है
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जंगीगंज। काशी प्रयाग के मध्य स्थित सेमराध में चल रहे कल्पवास मेले में देवरिया की साध्वी डॉ. साधना त्रिपाठी ने श्रीराम के विवाह प्रसंग में कथा सुनाई। कहा कि विवाह से ही मनुष्य गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है। विवाह से ही मन के तीनों विकारों मन, क्रोध, काम और लोभ से उत्पन्न समस्याओं का समाधान मिलता है।
साध्वी साधना त्रिपाठी ने कहा कि केवल स्त्री और पुरुष के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का ही प्रसंग नहीं है बल्कि यह जीवन को संपूर्णता देने का अवसर है। श्रीराम ने विवाह से ही मन के तीनों विकारों काम, क्रोध और लोभ से उत्पन्न समस्याओं का समाधान पाया। कहा कि राम का विवाह केवल मनोरंजन तक ही नहीं बल्कि सांसारिक व्यवहार की अपेक्षा मनस्तत्व की प्रधानता है यहां से मन, बुद्धि, चित्त के माध्यम से हम परमात्मा का साक्षात्कार कर सकते हैं। कहा कि विवाह का प्रमुख देवता %काम% है। भारतीय संस्कृति में श्रीराम-सीता आदर्श दंपति हैं। श्रीराम ने जहां मर्यादा का पालन करके आदर्श पति और पुरुषोत्तम पद प्राप्त किया वहीं माता सीता ने सारे संसार के समक्ष अपने पतिव्रता धर्म के पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। भगवान राम ने अहंकार के प्रतीक धनुष को तोड़ा। यह इस बात का प्रतीक है कि जब दो लोग एक बंधन में बंधते हैं तो सबसे पहले उन्हें अहंकार को तोड़ना चाहिए और फिर प्रेम रूपी बंधन में बंधना चाहिए।
साध्वी साधना त्रिपाठी ने कहा कि केवल स्त्री और पुरुष के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का ही प्रसंग नहीं है बल्कि यह जीवन को संपूर्णता देने का अवसर है। श्रीराम ने विवाह से ही मन के तीनों विकारों काम, क्रोध और लोभ से उत्पन्न समस्याओं का समाधान पाया। कहा कि राम का विवाह केवल मनोरंजन तक ही नहीं बल्कि सांसारिक व्यवहार की अपेक्षा मनस्तत्व की प्रधानता है यहां से मन, बुद्धि, चित्त के माध्यम से हम परमात्मा का साक्षात्कार कर सकते हैं। कहा कि विवाह का प्रमुख देवता %काम% है। भारतीय संस्कृति में श्रीराम-सीता आदर्श दंपति हैं। श्रीराम ने जहां मर्यादा का पालन करके आदर्श पति और पुरुषोत्तम पद प्राप्त किया वहीं माता सीता ने सारे संसार के समक्ष अपने पतिव्रता धर्म के पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। भगवान राम ने अहंकार के प्रतीक धनुष को तोड़ा। यह इस बात का प्रतीक है कि जब दो लोग एक बंधन में बंधते हैं तो सबसे पहले उन्हें अहंकार को तोड़ना चाहिए और फिर प्रेम रूपी बंधन में बंधना चाहिए।
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