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स्कूली वैन हादसा: कागजों में फिटनेस, डग्गामार में मासूम - साप्ताहिक प्लानिंग
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ज्ञानपुर। मासूम बच्चों के साथ हादसा होने के बाद भी उप संभागीय परिवहन कार्यालय संजीदा नहीं दिख रहा है। हादसे के तीन-चार दिन ताबड़तोउ़ छापेमारी के बाद विभाग बसों की फिटनेस की दिशा में फिर उदासीन हो गया है। विभागीय आंकड़ों को भी सच मानें तो जिले भर में वर्तमान में 378 स्कूल वाहन संचालित हो रहे हैं। इनमें 46 वाहन ऐसे हैं जिनका फिटनेस नहीं हुआ है। यह स्थिति तब है जब जिले में एक बड़ा स्कूल वाहन हादसा हो गया ळै। वर्तामन में कई बच्चे खटारा वाहनों से ही स्कूल आ-जा रहे हैं। हादसों के बाद अभियान शुरू कर 15 से 20 वाहनों को सीज करने के बाद विभाग मौन हो गया है।
जिले में 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा 500 से अधिक मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। इनमें करीब 100 विद्यालय ऐसे हैं जो वाहनों से बच्चों को ढोते हैं। मानक है कि समय-समय पर वाहनों के फिटनेस की जांच हो। चालक की अर्हता, बच्चों को वाहन में जरूरी सुविधाएं आदि को लेकर ाी सजगता बरतने के निर्देश हैं। , लेकिन ज्यादातर स्कूल वाहनों की हालत खराब ही रहती है। एआरटीओ कार्यालय में फिटनेस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। न तो वाहन परीक्षण के लिए आता है और न ही उसे देखा जाता है। संचालक कागज लेकर आ जाता है और दलाल के माध्यम से वह फिट हो जाती है।
12 जनवरी को लखनो गांव में स्कूल वैन हादसे के बाद चार दिनों तक उप संभागीय परिवहन विभाग की ओर से चेकिंग अभियान चलाकर 15 से 20 वाहनों को सीज और 50 से अधिक वाहनों का चालान करने के बाद अधिकारी शांत हो गए। विभागीय आंकड़ो पर गौर करें तो 10 सीटर से अधिक 204 स्कूल वाहन हैं, जिनमें 16 का फिटनेस नहीं हो सका है। इसी तरह आठ सीटर 177 वाहन पंजीकृत हैं इनमें 30 का फिटनेस नहीं हुआ है। विभाग ऐसे वाहन संचालकों को नोटिस भेज दिया है। उप संभागीय परिवहन अधिकारी सत्येंद्र कुमार यादव ने कहा कि स्कूली वाहनों का फिटनेस कार्यालय पर किया जाता है। फिटनेस न कराने वाले सभी वाहन मालिकों को नोटिस भेजी गया है।
जिले में 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा 500 से अधिक मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। इनमें करीब 100 विद्यालय ऐसे हैं जो वाहनों से बच्चों को ढोते हैं। मानक है कि समय-समय पर वाहनों के फिटनेस की जांच हो। चालक की अर्हता, बच्चों को वाहन में जरूरी सुविधाएं आदि को लेकर ाी सजगता बरतने के निर्देश हैं। , लेकिन ज्यादातर स्कूल वाहनों की हालत खराब ही रहती है। एआरटीओ कार्यालय में फिटनेस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। न तो वाहन परीक्षण के लिए आता है और न ही उसे देखा जाता है। संचालक कागज लेकर आ जाता है और दलाल के माध्यम से वह फिट हो जाती है।
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12 जनवरी को लखनो गांव में स्कूल वैन हादसे के बाद चार दिनों तक उप संभागीय परिवहन विभाग की ओर से चेकिंग अभियान चलाकर 15 से 20 वाहनों को सीज और 50 से अधिक वाहनों का चालान करने के बाद अधिकारी शांत हो गए। विभागीय आंकड़ो पर गौर करें तो 10 सीटर से अधिक 204 स्कूल वाहन हैं, जिनमें 16 का फिटनेस नहीं हो सका है। इसी तरह आठ सीटर 177 वाहन पंजीकृत हैं इनमें 30 का फिटनेस नहीं हुआ है। विभाग ऐसे वाहन संचालकों को नोटिस भेज दिया है। उप संभागीय परिवहन अधिकारी सत्येंद्र कुमार यादव ने कहा कि स्कूली वाहनों का फिटनेस कार्यालय पर किया जाता है। फिटनेस न कराने वाले सभी वाहन मालिकों को नोटिस भेजी गया है।
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