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पारस्परिक प्रेम का आभाव मानवीय समस्या का मूल कारण
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ज्ञानपुर। बंदियों को अपराध से आध्यात्मिक जीवन की राह पर मोड़ने के मकसद से शनिवार को जिला कारागार में सत्संग का आयोजन किया गया। संत निरंकारी सत्संग मंडल की ओर से आयोजित सत्संग में बंदियों को जीवन के मोक्ष के मायने बताए गए।
संत निरंकारी मिशन की सदगुरु माता सुदीपा ने बंदियों को सद्मार्ग पर चलते का ज्ञान दिया। वीरेंद्र सिंह ने कारागार में सजा काट रहें बंदियों को कहा कि इंसान ईश्वर की सबसे उत्तम रचना है। इसके लिए प्रभु ने इस धरा को सुंदर बनाया है। लेकिन आज इंसान स्वार्थ वश इंसानियत को ही नुकसान पहुंचाने पर तुला है, जिसकी सजा प्रभु ने किसी न किसी रूप में निर्धारित कर रखी है। जबकि जीवन में सुधार करते हुए उसे सही मार्ग पर ले जाने की ताकत उसी के हाथ में होती है। गलती भी इंसानियत का एक हिस्सा है, लेकिन गलती करने का आभास होने पर उसमें सुधार करते हुए अपने मूल्यों को बढ़ावा देना हमारा फर्ज है। उन्होंने कहा कि मानवीय समस्याओं का मूल कारण पारस्परिक प्रेम का अभाव होना है। शांति मनुष्य के अंदर ही होती है, जिसे बाहर से नहीं अंदर से महसूस किया जा सकता है। उन्होंने अपने प्रवचन का सार समझाते हुए कहा कि किसी को बुरा मत कहो, अगर कोई तुम्हें बुरा कहे तो भी बुरा मत मानो, अगर बुरा लगता है तो बदला लेने की मत सोचो। अगर मनुष्य इस सिद्धांत को अपना ले तो निश्चित ही दुनिया स्वर्ग बन जाएगी। प्रवचन से द्रवीभूत कई बंदियों ने जाने-अनजाने में हुई गलती को सुधार कर जीवन में सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर संत निरंकारी मिशन के दीनदयाल मुखी, रामजीत, राम अवध, उदल, राजपति, ओमप्रकाश और जिला कारागार के प्रभारी जेलर कृष्ण मुरारी गुप्ता, डिप्टी जेलर नीलम शर्मा और रामबहादुर मौजूद रहे।
संत निरंकारी मिशन की सदगुरु माता सुदीपा ने बंदियों को सद्मार्ग पर चलते का ज्ञान दिया। वीरेंद्र सिंह ने कारागार में सजा काट रहें बंदियों को कहा कि इंसान ईश्वर की सबसे उत्तम रचना है। इसके लिए प्रभु ने इस धरा को सुंदर बनाया है। लेकिन आज इंसान स्वार्थ वश इंसानियत को ही नुकसान पहुंचाने पर तुला है, जिसकी सजा प्रभु ने किसी न किसी रूप में निर्धारित कर रखी है। जबकि जीवन में सुधार करते हुए उसे सही मार्ग पर ले जाने की ताकत उसी के हाथ में होती है। गलती भी इंसानियत का एक हिस्सा है, लेकिन गलती करने का आभास होने पर उसमें सुधार करते हुए अपने मूल्यों को बढ़ावा देना हमारा फर्ज है। उन्होंने कहा कि मानवीय समस्याओं का मूल कारण पारस्परिक प्रेम का अभाव होना है। शांति मनुष्य के अंदर ही होती है, जिसे बाहर से नहीं अंदर से महसूस किया जा सकता है। उन्होंने अपने प्रवचन का सार समझाते हुए कहा कि किसी को बुरा मत कहो, अगर कोई तुम्हें बुरा कहे तो भी बुरा मत मानो, अगर बुरा लगता है तो बदला लेने की मत सोचो। अगर मनुष्य इस सिद्धांत को अपना ले तो निश्चित ही दुनिया स्वर्ग बन जाएगी। प्रवचन से द्रवीभूत कई बंदियों ने जाने-अनजाने में हुई गलती को सुधार कर जीवन में सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर संत निरंकारी मिशन के दीनदयाल मुखी, रामजीत, राम अवध, उदल, राजपति, ओमप्रकाश और जिला कारागार के प्रभारी जेलर कृष्ण मुरारी गुप्ता, डिप्टी जेलर नीलम शर्मा और रामबहादुर मौजूद रहे।
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