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पांच हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया
basti
Updated Wed, 06 Jun 2018 11:52 PM IST
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पकड़ा गया घूस लेने का आरोपी।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। गोरखपुर की एंटी करप्शन टीम ने हिडेन ट्रैप (गुप्त अभियान) में उप निदेशक पंचायती राज कार्यालय में तैनात लिपिक को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। परशुरामपुर ब्लॉक के हैदराबाद ग्राम पंचायत में तैनात सफाई कर्मी ब्रह्मजीत (निलंबित) से तीन महीने का वेतन भुगतान और इन्क्रीमेंट (वेतन वृद्धि) का एरियर भुगतान कराने के लिए 25 हजार रुपये में सौदा हुआ था। इसकी पेशगी में पांच हजार रुपये देने से पहले उसने एंटीकरप्शन से संपर्क साध लिया। योजनाबद्ध ढंग से उसे डाक बंगले एरिया में रुपये देते हुए पकड़ लिया। कोतवाल विजयेंद्र सिंह के अनुसार संबंधित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
एंटी करप्शन टीम को लीड कर रहे इंस्पेक्टर बब्बन यादव ने बताया कि परशुरामपुर ब्लॉक की हैदराबाद ग्राम पंचायत में तैनात सफाई कर्मी ब्रह्मजीत ने शिकायत की थी। बताया था कि साजिशन उसे निलंबित कर दिया गया था। प्रकरण की जांच में उसे जिला पंचायत राज अधिकारी ने दोषी करार देते हुए उसका तीन महीने का वेतन और इन्क्रीमेंट रोक दिया था। इसके खिलाफ सफाई कर्मी ने डिप्टी डायरेक्टर पंचायती राज से अपील की। आरोप है कि उप निदेशक कार्यालय में लिपिक का कार्य कर रहे संबद्ध सफाई कर्मी उमेश गुप्ता ने अपीलकर्ता से रुका वेतन और एरियर भुगतान कराने का जिम्मा ले लिया। बकौल ब्रह्मजीत उससे 30 हजार रुपये की मांग की गई थी, लेकिन 25 हजार रुपये में बात तय हुई थी। बुधवार को उसे पांच हजार रुपये देने के लिए डाक बंगले क्षेत्र में बुलाया गया। उप निदेशक महेंद्र प्रसाद दूबे ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी कि किसने किससे क्या बात की। प्रकरण सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के अलावा बाकी विभागों में हड़कंप मचा हुआ है।
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एंटी करप्शन टीम को लीड कर रहे इंस्पेक्टर बब्बन यादव ने बताया कि परशुरामपुर ब्लॉक की हैदराबाद ग्राम पंचायत में तैनात सफाई कर्मी ब्रह्मजीत ने शिकायत की थी। बताया था कि साजिशन उसे निलंबित कर दिया गया था। प्रकरण की जांच में उसे जिला पंचायत राज अधिकारी ने दोषी करार देते हुए उसका तीन महीने का वेतन और इन्क्रीमेंट रोक दिया था। इसके खिलाफ सफाई कर्मी ने डिप्टी डायरेक्टर पंचायती राज से अपील की। आरोप है कि उप निदेशक कार्यालय में लिपिक का कार्य कर रहे संबद्ध सफाई कर्मी उमेश गुप्ता ने अपीलकर्ता से रुका वेतन और एरियर भुगतान कराने का जिम्मा ले लिया। बकौल ब्रह्मजीत उससे 30 हजार रुपये की मांग की गई थी, लेकिन 25 हजार रुपये में बात तय हुई थी। बुधवार को उसे पांच हजार रुपये देने के लिए डाक बंगले क्षेत्र में बुलाया गया। उप निदेशक महेंद्र प्रसाद दूबे ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी कि किसने किससे क्या बात की। प्रकरण सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के अलावा बाकी विभागों में हड़कंप मचा हुआ है।
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