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डेंगू का एक और मरीज मिला, गांव में भेजी गई टीम
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डेंगू का एक और मरीज मिला, गांव में भेजी गई टीम
बाराबंकी में चल रहा उपचार, इसके पहले भी मिले चुके हैं 15 मरीज
बस्ती। भानपुर तहसील क्षेत्र के अमरौली शुमाली में डेंगू का मरीज मिलने के बाद जिले में अब तक 16 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। 15 इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि अमरौली शुमाली में मिले शख्स को परिजनों ने बाराबंकी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।
सीएमओ डॉ. अनूप कुमार ने बताया गांव में टीम भेजी गई है। मच्छररोधी दवा के छिड़काव के साथ लोगों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिला व ओपेक अस्पताल सहित सभी सीएचसी व पीएचसी पर डेंगू का इलाज संभव है। इसके लिए अलग से व्यवस्था बनाई गई है।
एसीएमओ डॉ. फकरेयार हुसैन ने बताया कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल इंफेक्शन है। यह एडीज मच्छर के काटने से होता है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि निकल आते हैं। डेंगू बुखार को हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं। डेंगू का वायरस 10 दिनों से अधिक समय तक जीवित नहीं रहते हैं। संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है तो रक्तस्राव और ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट आ जाती है, यहां तक पीड़ित की मृत्यु भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि डेंगू का कोई खास उपचार उपलब्ध नहीं है। लक्षणों को पहचानकर ही इस पर काबू पा सकते हैं।
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ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी ने बताया कि डेंगू के लक्षण भी अलग-अलग नजर आते हैं। बच्चों और किशोरों में माइल्ड डेंगू होने पर कई बार लक्षण नजर नहीं आते। संक्रमित होने के बाद डेंगू के हल्के लक्षण चार से सात दिनों के अंदर नजर आने लगते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी, जी मिचलाना, आंखों में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते, ग्लैंड्स में सूजन आदि इसके लक्षण हैं। गंभीर मामलों में रक्तस्राव होने लगता है।
ऐसे करें डेंगू से बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि डेंगू मच्छरों से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसके लिए कोई वैक्सीन नहीं है। बचाव का सिर्फ एक तरीका है खुद को मच्छरों से बचाकर रखना। मॉस्किटो रेपलेंट्स, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। घर के दरवाजे और खिड़कियों को शाम होने से पहले बंद कर दें। शरीर को पूरी तरह कवर करने वाले कपड़े पहनें। आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर का पानी बदलते रहें। गमलों, टूटे-फूटे बर्तनों, पुराने टायरों, जानवरों के भोजन के पात्र, प्लास्टिक के डिब्बों आदि में पानी न इकट्ठा होने दें। पानी को ढक कर रखें।
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बाराबंकी में चल रहा उपचार, इसके पहले भी मिले चुके हैं 15 मरीज
बस्ती। भानपुर तहसील क्षेत्र के अमरौली शुमाली में डेंगू का मरीज मिलने के बाद जिले में अब तक 16 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। 15 इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि अमरौली शुमाली में मिले शख्स को परिजनों ने बाराबंकी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।
सीएमओ डॉ. अनूप कुमार ने बताया गांव में टीम भेजी गई है। मच्छररोधी दवा के छिड़काव के साथ लोगों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिला व ओपेक अस्पताल सहित सभी सीएचसी व पीएचसी पर डेंगू का इलाज संभव है। इसके लिए अलग से व्यवस्था बनाई गई है।
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एसीएमओ डॉ. फकरेयार हुसैन ने बताया कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल इंफेक्शन है। यह एडीज मच्छर के काटने से होता है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि निकल आते हैं। डेंगू बुखार को हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं। डेंगू का वायरस 10 दिनों से अधिक समय तक जीवित नहीं रहते हैं। संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है तो रक्तस्राव और ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट आ जाती है, यहां तक पीड़ित की मृत्यु भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि डेंगू का कोई खास उपचार उपलब्ध नहीं है। लक्षणों को पहचानकर ही इस पर काबू पा सकते हैं।
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ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी ने बताया कि डेंगू के लक्षण भी अलग-अलग नजर आते हैं। बच्चों और किशोरों में माइल्ड डेंगू होने पर कई बार लक्षण नजर नहीं आते। संक्रमित होने के बाद डेंगू के हल्के लक्षण चार से सात दिनों के अंदर नजर आने लगते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी, जी मिचलाना, आंखों में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते, ग्लैंड्स में सूजन आदि इसके लक्षण हैं। गंभीर मामलों में रक्तस्राव होने लगता है।
ऐसे करें डेंगू से बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि डेंगू मच्छरों से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसके लिए कोई वैक्सीन नहीं है। बचाव का सिर्फ एक तरीका है खुद को मच्छरों से बचाकर रखना। मॉस्किटो रेपलेंट्स, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। घर के दरवाजे और खिड़कियों को शाम होने से पहले बंद कर दें। शरीर को पूरी तरह कवर करने वाले कपड़े पहनें। आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर का पानी बदलते रहें। गमलों, टूटे-फूटे बर्तनों, पुराने टायरों, जानवरों के भोजन के पात्र, प्लास्टिक के डिब्बों आदि में पानी न इकट्ठा होने दें। पानी को ढक कर रखें।