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Basti News: बदले मौसम में उभरा पुराना हड्डियों का दर्द, अस्पताल पहुंच रहे मरीज
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जिला अस्पताल में मरीज को परामर्श देते डॉ. रामजी सोनी संवाद
बस्ती। लगातार बदलते मौसम और बारिश के बीच तापमान में उतार-चढ़ाव का असर लोगों की हड्डियों और जोड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल की हड्डी रोग ओपीडी में इन दिनों पुराने दर्द, जोड़ों में अकड़न और मांसपेशियों में खिंचाव की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं।
50 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में ऐसी शिकायतें अधिक देखने को मिल रही हैं। वहीं, युवा भी पुरानी चोट के दर्द के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आलोक पांडेय के अनुसार, इन दिनों हड्डियों और जोड़ों ंमें दर्द, अकड़न, हाथ-पैर में सुन्नपन, तलवों में गर्माहट और नसों में खिंचाव जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
कुछ मरीज मामूली चोट के बाद भी फ्रैक्चर की आशंका लेकर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार में पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन-डी और अन्य पोषक तत्वों को शामिल करना हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है। जरूरत के अनुसार कई मरीजों को फिजियोथेरेपी की सलाह भी दी जा रही है।
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जिला अस्पताल की फिजियोथेरेपी यूनिट में रोजाना करीब आठ से 10 मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि, डिजिटल एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को बाहर जांच करानी पड़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ पुरानी चोट या जोड़ों से जुड़ी समस्या की जांच में एक्स-रे की जरूरत पड़ती है। शुक्रवार को रक्षाबंधन के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी दोपहर 12 बजे तक ही संचालित हुई। इस दौरान कुल 412 मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।
छह माह तक मां का दूध जरूरी : वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि जन्म के बाद शुरुआती छह माह तक शिशु के लिए मां का दूध बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरक आहार शुरू किया जाना चाहिए। बच्चों के पोषण में लापरवाही उनके शारीरिक विकास के साथ हड्डियों की मजबूती को भी प्रभावित कर सकती है।
रोज 30 मिनट पैदल चलने की सलाह : एसआईसी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में लोग शारीरिक श्रम से दूर होते जा रहे हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करने के बाद पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करना भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उम्र और क्षमता के अनुसार रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, नियमित व्यायाम करना और पर्याप्त नींद लेना चाहिए। घर के सामान्य काम जैसे सफाई आदि को भी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
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50 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में ऐसी शिकायतें अधिक देखने को मिल रही हैं। वहीं, युवा भी पुरानी चोट के दर्द के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आलोक पांडेय के अनुसार, इन दिनों हड्डियों और जोड़ों ंमें दर्द, अकड़न, हाथ-पैर में सुन्नपन, तलवों में गर्माहट और नसों में खिंचाव जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
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कुछ मरीज मामूली चोट के बाद भी फ्रैक्चर की आशंका लेकर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार में पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन-डी और अन्य पोषक तत्वों को शामिल करना हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है। जरूरत के अनुसार कई मरीजों को फिजियोथेरेपी की सलाह भी दी जा रही है।
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जिला अस्पताल की फिजियोथेरेपी यूनिट में रोजाना करीब आठ से 10 मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि, डिजिटल एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को बाहर जांच करानी पड़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ पुरानी चोट या जोड़ों से जुड़ी समस्या की जांच में एक्स-रे की जरूरत पड़ती है। शुक्रवार को रक्षाबंधन के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी दोपहर 12 बजे तक ही संचालित हुई। इस दौरान कुल 412 मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।
छह माह तक मां का दूध जरूरी : वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि जन्म के बाद शुरुआती छह माह तक शिशु के लिए मां का दूध बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरक आहार शुरू किया जाना चाहिए। बच्चों के पोषण में लापरवाही उनके शारीरिक विकास के साथ हड्डियों की मजबूती को भी प्रभावित कर सकती है।
रोज 30 मिनट पैदल चलने की सलाह : एसआईसी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में लोग शारीरिक श्रम से दूर होते जा रहे हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करने के बाद पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करना भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उम्र और क्षमता के अनुसार रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, नियमित व्यायाम करना और पर्याप्त नींद लेना चाहिए। घर के सामान्य काम जैसे सफाई आदि को भी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।