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आर्डर गाजीपुर को भुगतान बस्ती को, बीएसए का खेल
Updated Fri, 04 Aug 2017 06:16 PM IST
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बस्ती। सर्व शिक्षा अभियान के मद से 32 लाख रुपये से छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के बंदरबांट का राज बैंक ने खोल दिया। सहायक वित्त लेखाधिकारी आरके लाल ने जब बैंक जाकर छानबीन की तो पता चला कि छपाई का ऑर्डर तो जिला पंचायत उद्योग गाजीपुर को दिया गया, मगर भुगतान बस्ती के जिला उद्योग पंचायत को किया, वह भी बचत खाते में हुआ, जबकि व्यवसायिक होने के नाते भुगतान करंट खाते में नियमानुसार होना चाहिए। रिपोर्ट एडी बेसिक को भेज दी गई।
वृहस्पतिवार को जांच करने आए एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने भुगतान की स्थित जानने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के सहायक वित्त लेखाधिकारी आरके लाल को बैंक जाकर छानबीन करने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में शुक्रवार को सहायक वित्त लेखाधिकारी और सहायक लेखाकार आलम की टीम कचहरी स्थित अर्बन को आपरेटिव पहुंची। टीम को यह देखकर हैरानी हुई कि जो भुगतान गाजीपुर के जिला पंचायत उद्योग को करना चाहिए वह भुगतान बस्ती के जिला पंचायत उद्योग को कैसे कर दिया गया। सहायक वित्त लेखाधिकारी ने बताया कि बस्ती के जिला उद्योग पंचायत ने भुगतान के लिए 30 लाख 60 हजार 903 रुपये का बिल दिया, जिस पर विभाग ने 61215 रुपये का टीडीएस काटकर 29 लाख 99 हजार 685 रुपये का भुगतान 31 मार्च 2017 को कर दिया। बताया कि इस मामले में जो सबसे अधिक चौकाने है, वह बस्ती के जिला पंचायत उद्योग के बचत खाते में इतन बड़े धनराशि का भुगतान कर देना, जबकि छपाई का आर्डर गाजीपुर को दिया था। बताया कि बचत के खाते में कभी व्यवसायिक भुगतान किया ही नहीं सकता है। बताया कि इसकी रिपोर्ट एडी बेसिक को भेज दी गई है।
क्रय समिति पर उठ रहे सवाल
छपाई के लिए डायट के प्राचार्य की अध्यक्षता में क्रय समिति का गठन हुआ, ताकि पारदर्शिता बनी रहे, मगर आज पूरे क्रय समिति की कार्यशैली पर ही सवाल उठने लगे हैं। इस क्रय समिति में जिला समन्वयक प्रशिक्षण, एसडीएम सदर, सचिव बीएसए और भुगतानकर्ता सहायक वित्तलेखाधिकारी शामिल रहे। सूत्र बताते है कि बीएसए ने क्रय समिति को ही मैनेज कर लिया था। खास बात यह है कि इस पत्रावली पर डीएम की ओर नामित एसडीएम सदर का हस्ताक्षर ही नहीं है।
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वृहस्पतिवार को जांच करने आए एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने भुगतान की स्थित जानने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के सहायक वित्त लेखाधिकारी आरके लाल को बैंक जाकर छानबीन करने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में शुक्रवार को सहायक वित्त लेखाधिकारी और सहायक लेखाकार आलम की टीम कचहरी स्थित अर्बन को आपरेटिव पहुंची। टीम को यह देखकर हैरानी हुई कि जो भुगतान गाजीपुर के जिला पंचायत उद्योग को करना चाहिए वह भुगतान बस्ती के जिला पंचायत उद्योग को कैसे कर दिया गया। सहायक वित्त लेखाधिकारी ने बताया कि बस्ती के जिला उद्योग पंचायत ने भुगतान के लिए 30 लाख 60 हजार 903 रुपये का बिल दिया, जिस पर विभाग ने 61215 रुपये का टीडीएस काटकर 29 लाख 99 हजार 685 रुपये का भुगतान 31 मार्च 2017 को कर दिया। बताया कि इस मामले में जो सबसे अधिक चौकाने है, वह बस्ती के जिला पंचायत उद्योग के बचत खाते में इतन बड़े धनराशि का भुगतान कर देना, जबकि छपाई का आर्डर गाजीपुर को दिया था। बताया कि बचत के खाते में कभी व्यवसायिक भुगतान किया ही नहीं सकता है। बताया कि इसकी रिपोर्ट एडी बेसिक को भेज दी गई है।
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क्रय समिति पर उठ रहे सवाल
छपाई के लिए डायट के प्राचार्य की अध्यक्षता में क्रय समिति का गठन हुआ, ताकि पारदर्शिता बनी रहे, मगर आज पूरे क्रय समिति की कार्यशैली पर ही सवाल उठने लगे हैं। इस क्रय समिति में जिला समन्वयक प्रशिक्षण, एसडीएम सदर, सचिव बीएसए और भुगतानकर्ता सहायक वित्तलेखाधिकारी शामिल रहे। सूत्र बताते है कि बीएसए ने क्रय समिति को ही मैनेज कर लिया था। खास बात यह है कि इस पत्रावली पर डीएम की ओर नामित एसडीएम सदर का हस्ताक्षर ही नहीं है।
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