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वंश के लिए दुआ करें, और मदद भी

Bareilly Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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फेल हो चुकी हैं दोनों किडनी, डायलिसिस के सहारे चल रही है जिंदगी
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सिटी रिपोर्टर
बरेली। छह महीने पहले तक विशाखा और संजीव की जिंदगी में सबकुछ खुशगवार था। दोनों की आंखों में जो सपने थे, वे सिर्फ अपने वंश के लिए। वंश, उनका इकलौता बेटा। हाईस्कूल में वंश के 94 फीसदी अंक थे। वह इंजीनियर बनना चाहता था। विशाखा और संजीव की उम्मीदें परवान चढ़ रही थीं, लेकिन अचानक ही सबकुछ जैसे बिखरने सा लगा। वंश को अचानक बुखार आया और फिर पता लगा कि उसकी दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं। अब उसकी जिंदगी डायलिसिस की बदौलत चल रही है।
पेशे से एमआर संजीव भटनागर खान मार्केट शास्त्रीनगर में रहते हैं। विशाखा राधा माधव पब्लिक स्कूल में शिक्षक हैं। वंश की जिंदगी बचाने को समय रहते उसकी किडनी बदलने की जरूरत है, लेकिन डॉक्टर ने इसके लिए 12 से 15 लाख का खर्च बताया है। विशाखा और संजीव की बेबसी यह है कि उनके पास इतना पैसा नहीं है। नियति की एक और मार यह है कि संजीव और विशाखा का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है और वंश का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव। इसलिए वंश को वे अपनी किडनी भी नहीं दे सकते। ऐसे में उनके लिए एक ही उम्मीद बाकी रह गई है, आप पर और हम पर। वंश को हमारी दुआओं और मदद दोनों की जरूरत है। निश्चित तौर पर उनकी खुशकिस्मती है कि वे ऐसे शहर में हैं, जहां मददगारों की कमी नहीं। आपने हाथ बढ़ाया तो तय मानिए कि हम वंश को बचाने में जरूर कामयाब होंगे।
जल्द किडनी बदलना जरूरी
वंश का इलाज चल रहा है। अभी उसका जीवन डायलिसिस के सहारे चल रहा है, लेकिन किडनी का बदलना जरूरी है। यह जितनी जल्दी हो पाए, वह वंश के लिए बेहतर होगा। किडनी बदलने की प्रक्रिया में भी काफी समय लगता है। -डा. विजय गुप्त, नेफ्रोलाजिस्ट एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज
नहीं भूलूंगी जीवन भर
जीवन की इस संघर्ष बेला में वंश को सबकी इबादत और मदद की जरूरत है। उम्मीद करूंगी कि मेरे बेटे का जीवन सुरक्षित रहे और वह अपना सपना पूरा कर सके। उसे बचाने के लिए जो भी हमारी मदद करेगा, मैं उसे जीवन भर नहीं भूलूंगी। -विशाखा, वंश की मां
ऐसे कर सकते हैं मदद
वंश के जीवन में उम्मीद के दीये जलाने के लिए कोई भी मदद कर सकता है। मदद के लिए उनके माता-पिता के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। विशाखा का मोबाइल नंबर 9927362641 और संजीव का मोबाइल नंबर 9410656194 है।


मां की उदासी ने वंश को बता दी अपनी बीमारी
सितंबर 2011 में वंश को बुखार आने के बाद संजीव और विशाखा उसे जब डॉक्टर के पास ले गए तब पहली बार पता लगा कि उसकी दोनों किडनी फेल हैं। संजीव और विशाखा के लिए यह बहुत बड़ा आघात था, लेकिन उन्होंने हर मुमकिन कोशिश की कि यह बात वंश को पता न लगे। कुछ दिन तो वंश को वाकई अपनी बीमारी के बारे में कुछ पता नहीं लगा, लेकिन फिर मां की उदासी और आंखों में भरे रहने वाले आंसुओं ने ही उसे समझा दिया कि वह जिंदगी के किस मोड़ पर है। वंश कहते हैं, भगवान और मम्मी-पापा का प्यार मेरे साथ हैं। मैने मम्मी-पापा के लिए इंजीनियर बनने का सपना देखा था। मुझे लगता है कि मैं अपना सपना जरूर पूरा करूंगा।

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