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रागिनी हत्याकांड
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:11 PM IST
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बलिया। मृतका छात्रा रागिनी के माता-पिता बुधवार को नवागत पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार से मिले और पुत्री के हत्यारोपियों पर रासुका लगाने की मांग की। साथ ही परिवार वालों ने कहा कि आरोपी दबंग हैं, जिन्हें यदि जमानत मिल गई तो उनके साथ कुछ भी कर सकते हैं। परिवार में असुरक्षा को लेकर भी भय का माहौल बना हुआ है।
मृतका छात्रा के पिता जितेंद्र दुबे ने बताया कि 26 अगस्त 2017 को सहतवार थाना क्षेत्र के सिंगही में आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने छात्रा के हत्यारों पर रासुका लगाने का आदेश दिया था। लेकिन अब तक आरोपियों पर रासुका पुलिस द्वारा नहीं लगाया गया। कहा कि आरोपी दबंग किस्म के लोग हैं। जमानत पर छूटने के बाद फिर हत्या कर सकते हैं। हालांकि परिवार को सुरक्षा प्राप्त है। बावजूद पूरा परिवार उनके भय से भयजदा है। पीड़ित ने आरोपी प्रिंस तिवारी, उसके पिता व प्रधान कृपाशंकर तिवारी, भाई सोनू तिवारी, नीरज तिवारी व राजू यादव पर रासुका लगाने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि बेटी रागिनी की हत्या के बाद पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही है। यदि कार्रवाई करने में पुलिस उदासीन रही तो उनके लिए विकट स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह ने वारदात के कुछ दिन बाद ही आरोपियों पर रासुका लगाने का आदेश दिया था, बावजूद अभी तक रासुका नहीं लग सका है। पुलिस रासुका की प्रक्रिया का हवाला देकर आरोपियों को मौका देना चाहती है।
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मृतका छात्रा के पिता जितेंद्र दुबे ने बताया कि 26 अगस्त 2017 को सहतवार थाना क्षेत्र के सिंगही में आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने छात्रा के हत्यारों पर रासुका लगाने का आदेश दिया था। लेकिन अब तक आरोपियों पर रासुका पुलिस द्वारा नहीं लगाया गया। कहा कि आरोपी दबंग किस्म के लोग हैं। जमानत पर छूटने के बाद फिर हत्या कर सकते हैं। हालांकि परिवार को सुरक्षा प्राप्त है। बावजूद पूरा परिवार उनके भय से भयजदा है। पीड़ित ने आरोपी प्रिंस तिवारी, उसके पिता व प्रधान कृपाशंकर तिवारी, भाई सोनू तिवारी, नीरज तिवारी व राजू यादव पर रासुका लगाने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि बेटी रागिनी की हत्या के बाद पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही है। यदि कार्रवाई करने में पुलिस उदासीन रही तो उनके लिए विकट स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह ने वारदात के कुछ दिन बाद ही आरोपियों पर रासुका लगाने का आदेश दिया था, बावजूद अभी तक रासुका नहीं लग सका है। पुलिस रासुका की प्रक्रिया का हवाला देकर आरोपियों को मौका देना चाहती है।
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