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‘मैपिंग’ को लेकर सुप्रीम फैसले का बीएसए ने उड़ाया मखौल
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बलिया। आरटीई (राइट टू एजुकेशन) में उदासीनता को लेकर मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता व आरटीआई कार्यकर्ता मनोज राय हंस ने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच धरना दिया। इस दौरान उप्र शासन को प्रेषित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। मनोज राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश व गाइड के मुताबिक शासन के निर्देश के बावजूद ‘मैपिंग’ को लेकर न तो जिलाधिकारी और न ही बेसिक शिक्षाधिकारी ने संजीदा हैं।
शासन ने बीते 23 जनवरी 2019 को निर्देश दिया था कि 15 फरवरी 2019 तक मैपिंग का सुनिश्चित उत्तर प्रदेश के समस्त जनपदों के जिलाधिकारी व जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (नोडल अधिकारी) अपनी टीम बनाकर सावधानीपूर्वक मैपिंग का कार्य करें ताकि एक भी प्राइवेट विद्यालय आरटीई एक्ट 2009 की नि:शुल्क शिक्षा के अंतर्गत दर्ज होने से छूट न पाए। लेकिन नोडल अधिकारी ने अपनी टीम बना कार्य नहीं किया और न ही जिलाधिकारी बलिया द्वारा बीएसए, जिला समन्वयक अधिकारी व खंड बेसिक शिक्षाधिकारी द्वारा मैपिंग के कार्य में उदासीनता बरतने की समीक्षा की गई। इस मौके पर सोनू गुप्ता, जेपी गुप्ता, सुनील पांडेय, चंदन सिंह, शिवाकांत यादव, नाइडू ठाकुर, सुभाष राय, अशोक वर्मा, देवेंद्र वर्मा, गोरख पांडेय, विवेकानंद पांडेय,प्रदीप कौशिक, सविता श्रीवास्तव आदि रहे।
मैपिंग आरटीई का एक महत्वपूूर्ण भाग है, जिससे संबंधित छात्र के घर से एक किलोमीटर के दायरे में मान्यता प्राप्त विद्यालयों को कोड किया जाता है। इसके बाद ही अभिभावक अपने-अपने बच्चों का संबंधित स्कूलों में दाखिला करा सकते हैं। एक पहलू यह भी है कि इस कार्य से स्कूलों की जांच भी हो जाएगी। लेकिन इसे लेकर जिला प्रशासन शुरू से ही उदासीनता बरतती चली आ रही है।
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शासन ने बीते 23 जनवरी 2019 को निर्देश दिया था कि 15 फरवरी 2019 तक मैपिंग का सुनिश्चित उत्तर प्रदेश के समस्त जनपदों के जिलाधिकारी व जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (नोडल अधिकारी) अपनी टीम बनाकर सावधानीपूर्वक मैपिंग का कार्य करें ताकि एक भी प्राइवेट विद्यालय आरटीई एक्ट 2009 की नि:शुल्क शिक्षा के अंतर्गत दर्ज होने से छूट न पाए। लेकिन नोडल अधिकारी ने अपनी टीम बना कार्य नहीं किया और न ही जिलाधिकारी बलिया द्वारा बीएसए, जिला समन्वयक अधिकारी व खंड बेसिक शिक्षाधिकारी द्वारा मैपिंग के कार्य में उदासीनता बरतने की समीक्षा की गई। इस मौके पर सोनू गुप्ता, जेपी गुप्ता, सुनील पांडेय, चंदन सिंह, शिवाकांत यादव, नाइडू ठाकुर, सुभाष राय, अशोक वर्मा, देवेंद्र वर्मा, गोरख पांडेय, विवेकानंद पांडेय,प्रदीप कौशिक, सविता श्रीवास्तव आदि रहे।
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मैपिंग आरटीई का एक महत्वपूूर्ण भाग है, जिससे संबंधित छात्र के घर से एक किलोमीटर के दायरे में मान्यता प्राप्त विद्यालयों को कोड किया जाता है। इसके बाद ही अभिभावक अपने-अपने बच्चों का संबंधित स्कूलों में दाखिला करा सकते हैं। एक पहलू यह भी है कि इस कार्य से स्कूलों की जांच भी हो जाएगी। लेकिन इसे लेकर जिला प्रशासन शुरू से ही उदासीनता बरतती चली आ रही है।
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