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कब्रगाह में रॉयल फैमिली के लिए चबूतरा
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बागपत। सिनौली में हड़प्पा कालीन कब्रगाह की पुष्टि हो चुकी है। तीसरे चरण में अब तक दो कब्र मिली है, जिन पर शोध चल रहा है। दो दीवारें सामने आई है, जिनसे अनुमान लगाया जा रहा है कि रॉयल फैमिली के खड़े होने के लिए यह बनाया गया होगा। अंतिम संस्कार के दौरान रॉयल फैमिली के लोग इस पर खड़े होते रहे होंगे।
सिनौली में मिले आम और खास शवादान केंद्र पर अब तक दो दीवारें मिल चुकी हैं। शाही कब्रगाह के नजदीक चबूतरे की व्यवस्था किए जाने का अनुमान है। माना जा रहा है कि शाही परिवार उंचे लोगों को इन चबूतरों पर खड़ा किया जाता रहा होगा। महिला का कंकाल और उसके पास जिस तरह आभूषण मिले हैं, उसी के नजदीक यह चबूतरा है। इससे यही अनुमान है कि शाही परिवार के लोग अलग चबूतरे पर खड़े होकर अंतिम क्रिया में भाग लेते रहे होंगे। इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा कहते हैं कि चबूतरे का प्रमाण तो स्पष्ट है। बस्ती या सभ्यता मिलने के बाद ही तार जुड़ सकते हैं।
यहां से जुड़ रहे सिनौली के तार
बागपत। हरियाणा के फरमाणा, राखीगढ़ी, गुजरात के लोथल और राजस्थान के कलिबंगन में सिनौली जैसे ही पुरावशेष मिले हैं। माना जा रहा है कि यहां मानव बस्तियां एक तरह की रही होंगी।
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हड़प्पा या लेट हड़प्पा
बागपत। एक थ्योरी यह भी है कि पश्चिम यूपी में मिल रहे पुरावशेष हड़प्पा सभ्यता के बजाए लेट हड़प्पा सभ्यता के हैं। यानि सिंधु और सरस्वती नदी के सूख जाने के कारण सूखा पड़ा, जिस कारण हड़प्पा संस्कृति खत्म हो गई। कुछ लोग पलायन कर अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे और यहां पर लेट हड़प्पा संस्कृति बन गई।
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सिनौली में मिले आम और खास शवादान केंद्र पर अब तक दो दीवारें मिल चुकी हैं। शाही कब्रगाह के नजदीक चबूतरे की व्यवस्था किए जाने का अनुमान है। माना जा रहा है कि शाही परिवार उंचे लोगों को इन चबूतरों पर खड़ा किया जाता रहा होगा। महिला का कंकाल और उसके पास जिस तरह आभूषण मिले हैं, उसी के नजदीक यह चबूतरा है। इससे यही अनुमान है कि शाही परिवार के लोग अलग चबूतरे पर खड़े होकर अंतिम क्रिया में भाग लेते रहे होंगे। इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा कहते हैं कि चबूतरे का प्रमाण तो स्पष्ट है। बस्ती या सभ्यता मिलने के बाद ही तार जुड़ सकते हैं।
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यहां से जुड़ रहे सिनौली के तार
बागपत। हरियाणा के फरमाणा, राखीगढ़ी, गुजरात के लोथल और राजस्थान के कलिबंगन में सिनौली जैसे ही पुरावशेष मिले हैं। माना जा रहा है कि यहां मानव बस्तियां एक तरह की रही होंगी।
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हड़प्पा या लेट हड़प्पा
बागपत। एक थ्योरी यह भी है कि पश्चिम यूपी में मिल रहे पुरावशेष हड़प्पा सभ्यता के बजाए लेट हड़प्पा सभ्यता के हैं। यानि सिंधु और सरस्वती नदी के सूख जाने के कारण सूखा पड़ा, जिस कारण हड़प्पा संस्कृति खत्म हो गई। कुछ लोग पलायन कर अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे और यहां पर लेट हड़प्पा संस्कृति बन गई।