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Baghpat News: मंडल पर 32 अर्घ्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की गई
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-श्रद्धालुओं को जीवन धर्ममय बनाने की शिक्षा दी गई, अजितनाथ सभागार में हुआ लोक कल्याण महामंडल विधान
फोटो संख्या 1
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार में बृहस्पतिवार को लोक कल्याण महामंडल विधान हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने मंडल पर 32 अर्घ्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की। वीरेंद्र कुमार और यश जैन को सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
ब्रह्मचारी गौरव और ऋषिका के निर्देशन में सौधर्म इंद्र ने मंडल पर 32 अर्घ्य अर्पित किए। जैन संत आर्जव सागर ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के प्रति श्रद्धा रखना महत्वपूर्ण है। उनकी साधना में सहयोग करने से जीवन धर्ममय बनता है। संत ने बताया कि संतों की साधना में सहयोग केवल बाहरी सेवा नहीं है। यह श्रद्धा और आत्मकल्याण का भाव है। उन्होंने तप के उद्देश्य को इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मा की शुद्धि बताया।
संत आर्जव सागर ने कहा कि तप का अर्थ केवल शारीरिक कष्ट सहना नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए आत्मा की शुद्धि की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने सोलहकारण पर्व की आराधना का महत्व समझाया। संत ने श्रद्धालुओं से त्याग, तप, संयम, सेवा और आत्मशुद्धि की भावना को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुकेश जैन, वरदान जैन, नवीन जैन, प्रदीप जैन, राकेश जैन, अनिल जैन और अंकुर जैन माैजूद रहे।
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फोटो संख्या 1
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार में बृहस्पतिवार को लोक कल्याण महामंडल विधान हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने मंडल पर 32 अर्घ्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की। वीरेंद्र कुमार और यश जैन को सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
ब्रह्मचारी गौरव और ऋषिका के निर्देशन में सौधर्म इंद्र ने मंडल पर 32 अर्घ्य अर्पित किए। जैन संत आर्जव सागर ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के प्रति श्रद्धा रखना महत्वपूर्ण है। उनकी साधना में सहयोग करने से जीवन धर्ममय बनता है। संत ने बताया कि संतों की साधना में सहयोग केवल बाहरी सेवा नहीं है। यह श्रद्धा और आत्मकल्याण का भाव है। उन्होंने तप के उद्देश्य को इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मा की शुद्धि बताया।
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संत आर्जव सागर ने कहा कि तप का अर्थ केवल शारीरिक कष्ट सहना नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए आत्मा की शुद्धि की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने सोलहकारण पर्व की आराधना का महत्व समझाया। संत ने श्रद्धालुओं से त्याग, तप, संयम, सेवा और आत्मशुद्धि की भावना को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुकेश जैन, वरदान जैन, नवीन जैन, प्रदीप जैन, राकेश जैन, अनिल जैन और अंकुर जैन माैजूद रहे।
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