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धर्मशाला में बनाया जा रहा आश्रय स्थल, विरोध में ग्रामीण
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बागपत/अमीनगर सराय। सिंघावली अहीर गांव में ग्रामीणों के विरोध के बावजूद धर्मशाला में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर शादियों के कार्यक्रम आयोजित होते है। ग्रामीणों को खतरा है कि गोशाला बनी तो यहां गोवंशीय पशुओं से कोई भी घटना बस्ती में हो सकती है।
सिंघावली अहीर में 50-60 साल पुरानी धर्मशाला है। इसमें पूर्व में कभी स्कूल चला तो कभी अस्पताल। यहां तक की प्रशासन की ओर से मतदान के लिए बूथ भी बनाए हैं। अब इस जगह को गोवंशीय पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने की तैयार कर रहा है। गांव के लोगों इसके विरोध में खड़े हो गए हैं।
ग्राम प्रधान सत्यवीर यादव ने बताया कि लोगों की सहमति के बिना यहां पर गोवंश आश्रय स्थल बनाया जा रहा है। इससे नुकसान हो सकता है। गांव की बस्ती के बीच में कामयाब नहीं होगा। निजी भूमि पर आश्रय स्थल नहीं बन सकता है। लोगों को इससे नुकसान होगा।
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सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि गोशाला बनी तो गोवंशों से कभी भी हादसा हो सकता है। हर समय बच्चे खेलते रहते हैं। लोगों के सामाजिक कार्य नहीं हो सकेंगे, जिसके लिए परेशानी होगी।
गांव के इंद्रपाल ने कहा कि धर्मशाला गांव में बहुत पुरानी है। इसमें गोशाला बनाना सही नहीं है। गांव से बाहर इसका निर्माण कराया जाए। इससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी लाभ मिलेगा।
इंद्राज ने कहा कि आवारा गोवंशीय पशुओं को आश्रय दिलाया जा रहा है यह तो ठीक बात है, लेकिन गांव के बीच में सार्वजनिक स्थल में इसका निर्माण नहीं होना चाहिए। किसान वर्ग को तो फायदा हो जाएगा, लेकिन गरीबों को नुकसान होगा।
बीडीओ कृपाल सिंह ने कहा कि जल्द धर्मशाला में गोशाला के कार्य करा दिया जाएगा। गांव के लोगों से जानकारी के बाद ही इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। कोई विरोध करता है तो अस्थाई बनाते हुए गांव से बाहर दूसरी भूमि पर गोशाला तैयार कराई जाएगी।
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सिंघावली अहीर में 50-60 साल पुरानी धर्मशाला है। इसमें पूर्व में कभी स्कूल चला तो कभी अस्पताल। यहां तक की प्रशासन की ओर से मतदान के लिए बूथ भी बनाए हैं। अब इस जगह को गोवंशीय पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने की तैयार कर रहा है। गांव के लोगों इसके विरोध में खड़े हो गए हैं।
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ग्राम प्रधान सत्यवीर यादव ने बताया कि लोगों की सहमति के बिना यहां पर गोवंश आश्रय स्थल बनाया जा रहा है। इससे नुकसान हो सकता है। गांव की बस्ती के बीच में कामयाब नहीं होगा। निजी भूमि पर आश्रय स्थल नहीं बन सकता है। लोगों को इससे नुकसान होगा।
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सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि गोशाला बनी तो गोवंशों से कभी भी हादसा हो सकता है। हर समय बच्चे खेलते रहते हैं। लोगों के सामाजिक कार्य नहीं हो सकेंगे, जिसके लिए परेशानी होगी।
गांव के इंद्रपाल ने कहा कि धर्मशाला गांव में बहुत पुरानी है। इसमें गोशाला बनाना सही नहीं है। गांव से बाहर इसका निर्माण कराया जाए। इससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी लाभ मिलेगा।
इंद्राज ने कहा कि आवारा गोवंशीय पशुओं को आश्रय दिलाया जा रहा है यह तो ठीक बात है, लेकिन गांव के बीच में सार्वजनिक स्थल में इसका निर्माण नहीं होना चाहिए। किसान वर्ग को तो फायदा हो जाएगा, लेकिन गरीबों को नुकसान होगा।
बीडीओ कृपाल सिंह ने कहा कि जल्द धर्मशाला में गोशाला के कार्य करा दिया जाएगा। गांव के लोगों से जानकारी के बाद ही इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। कोई विरोध करता है तो अस्थाई बनाते हुए गांव से बाहर दूसरी भूमि पर गोशाला तैयार कराई जाएगी।