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बीज शोधन करके करें बुवाई
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बेला (औरैया)। किसान गेहूं की बुवाई करने से पहले बीज का शोधन जरूरी करें। इससे बेहतर उपज मिल सकती है। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों की दी। गेहूं पैदावार बढ़ाने की अन्य जानकारी भी दी।
कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. इंद्रपाल सिंह ने बताया कि गेहूं, चना, मटर, मसूर की फसलों में कई तरह की बीमारियों का प्रकोप होता है। जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। इसलिए बीज की बुवाई थीरम, कैप्टान, फफूंदनाशी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाकर करें। बीज उपचार के लिए बीज को छाया में फैलाकर उसके ऊपर दवा डालकर बीज में अच्छी तरह मिला दें।
उसके बाद बीज की बुवाई करें। जिन खेतों में धान की कटाई एसएमएस युक्त कंबाइन हार्वेस्टर से की गई हो, उसमें सुपरसीडर या हैप्पी सीडर मशीन से बिना जुताई के बुवाई करें। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि गेहूं की बुवाई में समय का महत्वपूर्ण योगदान है। विलंब से बुवाई के कारण उत्पादन में कमी आती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. इंद्रपाल सिंह ने बताया कि गेहूं, चना, मटर, मसूर की फसलों में कई तरह की बीमारियों का प्रकोप होता है। जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। इसलिए बीज की बुवाई थीरम, कैप्टान, फफूंदनाशी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाकर करें। बीज उपचार के लिए बीज को छाया में फैलाकर उसके ऊपर दवा डालकर बीज में अच्छी तरह मिला दें।
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उसके बाद बीज की बुवाई करें। जिन खेतों में धान की कटाई एसएमएस युक्त कंबाइन हार्वेस्टर से की गई हो, उसमें सुपरसीडर या हैप्पी सीडर मशीन से बिना जुताई के बुवाई करें। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि गेहूं की बुवाई में समय का महत्वपूर्ण योगदान है। विलंब से बुवाई के कारण उत्पादन में कमी आती है।
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