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ग्रामीणों ने तालाब पर कब्जे से रोका
ब्यूरो अमर उजाला /ढबारसी।
Updated Thu, 08 Mar 2018 01:34 AM IST
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कब्जा करने की नीयत से भराव कर रहे कब्जा धारकों को रोकते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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आबादी और बस स्टैंड से सटे चार बीघा कीमती तालाब पर कब्जा करने वालों की नजर है। साठ-गांठ कर बुधवार को तालाब पाटने पहुंचे एक लेखपाल और कब्जा करने वालों को ग्रामीणों ने दौड़ा दिया। जिसके बाद लेखपाल की कार्यशैली से नाराज लोगों ने डीएम को शिकायती पत्र देकर तालाब से हिंदुओं की आस्था जुड़े होने का हवाला देकर लेखपाल समेत कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार को ढबारसी के ग्रामीण एकत्र होकर कलक्ट्रेट पहुंचे। डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि गांव के मुख्य बस स्टैंड पर गाटा संख्या 417 में तालाब की साढ़े चार बीघा भूमि दर्ज है। लेकिन, मौके पर तालाब की तीन बीघा जमीन है। जबकि डेढ़ बीघा तालाब पर पहले ही दबंग कब्जा कर चुके हैं। तालाब के किनारे ढाई बीघा जमीन में बंजर और नवीन पर्ती की भूमि दर्ज है। अच्छी लोकेशन पर होने की वजह से इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में पहुंच गई। जिसके चलते धीरे-धीरे दबंगों ने इस पर कब्जा करना शुरू कर दिया। माफिया से साठगांठ कर लेखपाल तालाब पर कब्जा करने की फिराक में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1975 में नत्थू सिंह के नाम से आवंटित पट्टे की जमीन मौके पर न होने की वजह से आज तक उनका कब्जा नहीं हो सका है। लेकिन लेखपाल ने पट्टा धारक व एक भूमाफिया से सांठगांठ कर तालाब की भूमि पर ही कब्जा कराने का खेल शुरू कर दिया। इतना ही नहीं लेखपाल जिलाधिकारी का आदेश बताते हुए तालाब पर कब्जा कराने की बात कह रहा है।
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बुधवार को ढबारसी के ग्रामीण एकत्र होकर कलक्ट्रेट पहुंचे। डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि गांव के मुख्य बस स्टैंड पर गाटा संख्या 417 में तालाब की साढ़े चार बीघा भूमि दर्ज है। लेकिन, मौके पर तालाब की तीन बीघा जमीन है। जबकि डेढ़ बीघा तालाब पर पहले ही दबंग कब्जा कर चुके हैं। तालाब के किनारे ढाई बीघा जमीन में बंजर और नवीन पर्ती की भूमि दर्ज है। अच्छी लोकेशन पर होने की वजह से इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में पहुंच गई। जिसके चलते धीरे-धीरे दबंगों ने इस पर कब्जा करना शुरू कर दिया। माफिया से साठगांठ कर लेखपाल तालाब पर कब्जा करने की फिराक में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1975 में नत्थू सिंह के नाम से आवंटित पट्टे की जमीन मौके पर न होने की वजह से आज तक उनका कब्जा नहीं हो सका है। लेकिन लेखपाल ने पट्टा धारक व एक भूमाफिया से सांठगांठ कर तालाब की भूमि पर ही कब्जा कराने का खेल शुरू कर दिया। इतना ही नहीं लेखपाल जिलाधिकारी का आदेश बताते हुए तालाब पर कब्जा कराने की बात कह रहा है।
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