सीजीएचएस : कैंसर के लिए रोबोटिक सर्जरी को 15 दिनों में मिलेगी मंजूरी, लाभार्थियों को मिलेगी त्वरित राहत
सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में पंजीकृत केंद्रीय कर्मियों, पेंशनरों व उनके आश्रितों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने सीजीएचएस के तहत कुछ मामलों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत कर दिया है।
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सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में पंजीकृत केंद्रीय कर्मियों, पेंशनरों व उनके आश्रितों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने सीजीएचएस के तहत कुछ मामलों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत कर दिया है। ऐसे में लाभार्थियों को इलाज पर खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। नई व्यवस्था के तहत सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए उपचार अनुमोदन प्रक्रिया अब अधिक सुव्यवस्थित और तेज होगी। एक सितंबर 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था में पांच श्रेणियों के मामलों को विकेंद्रीकरण के दायरे में लाया गया है। इनमें सभी प्रत्यारोपण मामले शामिल हैं जिनके लिए सीजीएचएस पैकेज दरें पहले से अधिसूचित हैं। इनकी स्वीकृति स्थानीय स्तर पर अपर निदेशक स्तर से प्रदान की जाएगी।
टीएवीआई, डीबीएस, आईवीएल, कॉक्लियर इम्प्लांट, सीपीएपी, बीआईपीएपी जैसे सूचीबद्ध उपचार भी इसमें शामिल हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और कंटीन्यूअस सबक्यूटेनियस इंसुलिन इन्फ्यूजन पंप भी इस सूची में हैं। सीजीएचएस वेबसाइट पर सूचीबद्ध एसटीसी-प्रतिबंधित दवाएं भी अब अपर निदेशक अनुमोदित करेंगे। इसके अलावा गैर-सूचीबद्ध प्रक्रियाएं, जांच, इम्प्लांट और कैंसर के लिए रोबोटिक सर्जरी भी शामिल हैं।
विशेषज्ञ की सिफारिश जरूरी
उपचार के लिए कुछ सामान्य दिशानिर्देश लागू होंगे। एम्स, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों या किसी भी केंद्रीय/राज्य सरकार के चिकित्सा संस्थान में उपचार लेने पर अलग से रेफरल या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। अनुमोदन के लिए एक सरकारी विशेषज्ञ की सिफारिश अनिवार्य है। यदि सरकारी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है तो दो अलग-अलग सीजीएचएस-पैनलबद्ध अस्पतालों के दो विशेषज्ञों की सिफारिश आवश्यक होगी। प्रत्येक मामले की मंजूरी से पहले तीन सदस्यीय स्थानीय तकनीकी समिति जांच करेगी।
15 कार्य दिवसों में होगा मामले का निस्तारण
नई व्यवस्था के तहत सभी दस्तावेज प्राप्त होने के 15 कार्य दिवसों के भीतर मामले पर निर्णय लिया जाएगा। स्थानीय तकनीकी समिति में अपर निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्य होंगे। इसमें दो जीडीएमओ शामिल होंगे जिनके पास चिकित्सा या सर्जरी में योग्यता या अनुभव हो। सीजीएचएस, प्रयागराज में अपर निदेशक की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी गई है। अपर निदेशक अपनी वित्तीय शक्तियों के तहत सूचीबद्ध मामलों में निर्धारित धनराशि की स्वीकृति दे सकेंगे। समिति के समक्ष सभी आवश्यक चिकित्सा, प्रशासनिक और वित्तीय रिकॉर्ड रखे जाएंगे। दस्तावेज में कमी होने पर तीन कार्य दिवसों के भीतर सूचित किया जाएगा।
पहले महीनों करना पड़ता था इंतजार
नई व्यवस्था लागू होने से पहले स्वीकृति के लिए प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भेजा जाता था। वहां देश भर से मामले आते थे और जब 40 से 50 मामले इकट्ठा हो जाते थे तो कमेटी की बैठक होती थी। ऐसे में आवेदकों को स्वीकृति के लिए तीन से चार माह तक इंतजार करना पड़ता था लेकिन अब 15 दिनों में स्वीकृति मिल जाएगी।