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पनवारी कांड: 34 साल बाद भी दिलों में हमले का दर्द और डर...याद कर सिहर जाते हैं लोग, अब भी सामने आने से बच रहे

Fri, 30 May 2025 10:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 30 May 2025 10:07 AM IST
सार

आगरा में साल 1990 में हुए पनवारी कांड आज भी लोगों के दिलों में डर पैदा कर देता है। इतने वर्ष बाद इस कांड में फैसला आ गया है, लेकिन इसके बाद भी पीड़ित सामने आने से बच रहे हैं। 
 

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Panwari incident: Even after 34 years pain and fear of the attack is still in the hearts
पनवारी कांड पीड़ित - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के थाना सिकंदरा के गांव पनवारी में दलित युवक की बरात चढ़ाने पर भड़की हिंसा की लपटें शहर से लेकर देहात पहुंची थीं। जाट बाहुल्य अकोला के गांव ऊदर में जातीय संघर्ष में एक महिला की मौत हो गई थी। 150 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस घटना को याद कर 34 साल बाद भी लोग दहशत में आ जाते हैं। जिन लोगों पर हमला बोला गया, वह अब गांव छोड़कर जा चुके हैं। जो बच गए, उनके दिलों में घटना का दर्द और डर दोनों बरकरार है।
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बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम गांव पहुंची तो लोग दबी जुबान से एक ही बात बोल रहे थे कि जो हुआ, अब उसे याद करके कोई फायदा नहीं। अब सभी शांति से जीवन जीना चाहते हैं। कागाराैल के गांव ऊदर के पूर्व प्रधान लाला ने बताया कि गांव की आबादी 4000 के करीब है। इसमें 3500 के लगभग जाट हैं। जाटवों की संख्या 200 से 250 है। अन्य जाति के लोग भी हैं।
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गांव में पहले तो कोई भी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं था। दबी जुबान में घटना के बारे में बताने लगे। इस दाैरान लोगों की आंखों में दहशत नजर आई। गांव के 65 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक ने बताया कि 24 जून 1990 की दोपहर 1 बजे घरों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं थीं। युवा काम पर गए थे। अचानक भीड़ ने हमला बोल दिया।

महिलाएं और बच्चे भी घायल हुए। जिसे जहां जगह मिली, वह वहां जान बचाने के लिए छिप गया। उपद्रवियों ने घरों में तोड़फोड़, लूटपाट की। पशुओं को खोलकर हमलावर ले गए। पानी के मटकों को फोड़ दिया। पुलिस जब तक आई, सारे हमलावर भाग गए। कई दिन तक कर्फ्यू रहा। जिन लोगों पर हमला हुआ था, उनमें से ज्यादातर गांव छोड़कर चले गए। अधिकतर धनाैली, मलपुरा और नरीपुरा, शाहगंज क्षेत्र में रह रहे हैं। घटना के बाद वह लोग कभी लाैटकर नहीं आए।

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खड़े हो जाते हैं रोंगटे
धनौली के करमवीर नगर निवासी पदम सिंह ने बताया कि गांव में मारपीट और लूटपाट की घटना हुई थी। घटना को याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दोषियों को जब तक सजा नहीं मिलती है, तब तक संतुष्टि नहीं मिलेगी।


 

नहीं भूल पा रहे घटना
धनौली के करमवीर नगर निवासी राजकुमार का कहना है कि घटना वाले दिन बस्ती के लोग टीवी पर धारावाहिक देख रहे थे। अचानक हुए हमले से लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। अनगिनत लोगों ने बस्ती पर हमला कर दिया था, जिसे वह लोग आज भी भूल नहीं पा रहे हैं।

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सामान लूट ले गए थे हमलावर
धनौली के करमवीर नगर निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि 24 जून 1990 को तकरीबन 1 बजे लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसमें 150 से अधिक लोग घायल हो गए थे। हमलावर घरों का सारा सामान लूटकर ले गए थे। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
 
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