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यूपी: 400 करोड़ का उत्तरी बाईपास, फिर भी नहीं गुजर रहे भारी वाहन; शहर की सड़कें हो रहीं खून से लाल, ये है वजह

Wed, 04 Nov 2026 03:44 PM IST
Arun Parashar अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Wed, 04 Nov 2026 03:44 PM IST
सार

400 करोड़ रुपये खर्च कर बनाए गए उत्तरी बाईपास पर सन्नाटा है। भारी वाहन अब भी शहर की सड़कों से गुजर रहे हैं। आए दिन हादसों से खून से सड़कें लाल हो रहीं हैं। बावजूद इसके शरह में भारी वाहनों का प्रवेश बंद नहीं कराया जा सका है। 

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Heavy vehicles are passing through city instead of using the northern bypass in agra
उत्तरी आगरा बाईपास - फोटो : संवाद

विस्तार

दिल्ली, मथुरा से फिरोजाबाद, इटावा, कानपुर की ओर जाने वाले भारी वाहनों को शहर के बाहर से निकालने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने 400 करोड़ रुपये की लागत से उत्तरी बाईपास का निर्माण कराया। मंडलायुक्त ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर रोक लगाते हुए उत्तरी बाईपास से निकालने के लिए कहा। पुलिस-प्रशासन की उदासीनता और अनदेखी की वजह से आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया। भारी वाहन काल बनकर शहर के बीच से गुजरते हुए आए दिन सड़कें खून से लाल कर रहे हैं। 
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15 साल पहले उत्तरी बाईपास के तीन प्रस्ताव बने थे। पहले में इसे आगरा होकर गुजरना था। हालांकि, दूसरे और तीसरे प्रस्ताव में बदलाव करते हुए इसे मथुरा से होकर गुजारा गया। वर्ष 2021 में तीसरी बार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) आगरा खंड ने सर्वे किया। वर्ष 2022 में एनएचएआई ने नेशनल हाईवे-19 के रैपुरा जाट से मिडावली हाथरस तक बाईपास का निर्माण शुरू कराया।
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400 करोड़ की लागत से 14 किमी लंबा बाईपास करीब 11 महीने पहले पूरा हो गया था। हाईवे के चैनल नंबर 174 से यमुना एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 141 से बाईपास को जोड़ दिया गया। हालांकि, इसके बावजूद अभी भी ट्रक, डंपर, ट्रेलर जैसे भारी वाहन शहर से गुजर रहे हैं। मथुरा से आगरा में सिकंदरा, खंदारी, रामबाग से होकर वाहन गुजरे तो उसे सिर्फ मथुरा के महुअन और फिरोजाबाद के उसाइनी में दो टोल चुकाने पड़ते हैं। वहीं, उत्तरी बाईपास से गुजरने पर चार बार टोल देना होता है। हाईवे पर महुअन के बाद उत्तरी बाईपास, फिर यमुना एक्सप्रेसवे और अंत में उसाइनी में टोल चुकाना पड़ता है। इसी चक्कर में ट्रांसपोर्टर और चालक लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट दे चुका है नोटिस
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मांग की है कि जिन व्यावसायिक वाहनों का आगरा में कोई गंतव्य नहीं है, उन्हें शहर के भीतर एनएच-19 से गुजरने के बजाय उत्तरी बाईपास और यमुना एक्सप्रेसवे से जाना अनिवार्य किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय (माॅर्थ), एनएचएआई और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) को नोटिस जारी किया है। इस पर 25 नवंबर को सुनवाई होनी है।

 
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बदहाल ट्रैफिक और जानलेवा बनता हाईवे
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 घनी आबादी के बीच से निकलता है। अरतौनी से छलेसर तक लाखों की आबादी रहती है। दोनों ओर आवासीय कॉलोनियां, स्कूल, अस्पताल, बाजार और ऐतिहासिक स्मारक हैं। सिकंदरा, खंदारी, भगवान टॉकीज, रामबाग और ट्रांस यमुना जैसे क्षेत्रों में तेज रफ्तार ट्रकों से दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है। सिकंदरा, गुरुद्वारा गुरु का ताल, भगवान टाॅकीज फ्लाईओवर, वाटरवर्क्स, रामबाग पर जाम की समस्या से लोग परेशान हैं।

 

80 फीसदी वाहन शहर में कर रहे प्रवेश
उत्तरी बाईपास का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग-19 को जाम से निजात दिलाने के लिए हुआ था। उत्तरी बाईपास को चालू हुए करीब 11 माह बीत गए हैं, मगर भारी वाहनों के जाम से राष्ट्रीय राजमार्ग को मुक्ति नहीं मिल पाई है। करीब 80 फीसदी भारी वाहन शहर में प्रवेश कर रहे हैं। फरह क्षेत्र के गांव पौरी के समीप से यह बाईपास सादाबाद के गांव मिडावली के पास यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। प्रशासन ने भारी वाहनों को आगरा में प्रवेश से रोकने के लिए शुरुआत में यहां पर बैरिकेडिंग ही थी। फिलहाल कोई बैरिकेडिंग उत्तरी बाईपास कट पर दिखाई नहीं दे रही है। इसके कारण भारी वाहनों को आगरा सीमा में प्रवेश बेरोकटोक जारी है। एक घंटे में यहां से 55-60 ट्रक गुजरते हैं जिनमें से 10-12 ट्रक ही उत्तरी बाईपास और रुख करते हैं। बाकी सीधे आगरा में प्रवेश कर जाते हैं। फरह के रैपुराजाट से आगरा पहुंचने में कोई टोल नहीं देना पड़ता, मगर उत्तरी बाईपास होकर आगरा पहुंचने पर भारी वाहन चालकों को 450 रुपये का टोल अदा करना पड़ता है। प्लाजा के असिस्टेंट मैनेजर तुलसीराम गुर्जर ने बताया कि प्रतिदिन उत्तरी बाईपास की चारों लेन से करीब 3500 वाहन गुजर रहे हैं। भारी वाहनों का शहरों में प्रवेश रोकने के लिए रूट डायवर्जन का कार्य प्रशासन का है। यह बाईपास बना ही इसलिए है कि यहां से बड़े वाहन गुजरें।


 

400 करोड़ खर्च कर बाईपास बनाया है तो भारी वाहनों को एनएच-19 से निकलने की अनुमति क्यों दी जा रही है। केवल चार किमी. की दूरी और टोल बचाने के चक्कर में निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है। भारी वाहन उत्तरी बाईपास से निकलें। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं। इससे उम्मीद जगी है। -केसी जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट

एनएचएआई को बाईपास के आसपास साइनेज बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पुलिस को दूसरे जिलों में जाने वाले भारी वाहनों को बाईपास से ही गुजारने के लिए पहले ही कहा गया है, इसे सुनिश्चित कराया जाएगा। -मनीष बंसल, जिलाधिकारी आगरा

पुलिस-प्रशासन के माध्यम से यातायात व्यवस्था पर लगातार काम किया जा रहा है।। इस मामले में एसएसपी से बात कर व्यवस्था को दुरुस्त करने की व्यवस्था की जाएगी। -सीपी सिंह, डीएम मथुरा
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