नकली दवाओं का काला कारोबार: व्हाट्सएप पर ऑर्डर...पार्सल से करते तस्करी; आठ राज्य और दो देशों तक फैला सिंडिकेट
आगरा में नकली दवाओं के काले कारोबार का खुलासा हुआ है। तस्कर व्हाट्सएप पर ऑर्डर लेते थे। फिर पार्सल के माध्यम से तस्करी करते थे। आठ राज्य और दो देशों तक इनका सिंडिकेट फैला था।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में दवा माफिया विजय गोयल और नरेंद्र शर्मा के नकली दवा, कफ सिरप का काला कारोबार हाईटेक था। व्हाट्सएप और ऑनलाइन ऑर्डर लेकर देश के आठ राज्यों सहित नेपाल और बांग्लादेश बॉर्डर तक माल की तस्करी करते थे। पार्सल और सड़क मार्ग से ठिकानों तक पहुंचाते थे।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि जून में कोडीन सिरप बैन की गई थी। इसके बाद नशे के लिए इस कफ सिरप की मांग कई गुना बढ़ गई। इसको भुनाने के लिए विजय गोयल ने हाईटेक तरीका अपनाया। ये ड्रग पेडलर्स (घूमकर दवा बेचने वाले) के जरिए व्हाट्सएप और ऑनलाइन आर्डर लेता था।
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ऑनलाइन और हवाला के जरिये भुगतान होने के बाद पेडलर्स के बताए पते पर माल भेजता था। ट्रेन के जरिये पार्सल और सड़क मार्ग का भी सहारा लेता था। जांच में इसके तार नेपाल और बांग्लादेश के बार्डर के तस्करों से मिले हैं। देश में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा में भी ये नकली दवा और सिरप बेचता था।
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रेव पार्टियों में नशे के लिए खपा रहे दवा
युवा भी कोडीन सिरप और नींद की गोली की ओवरडोज लेकर नशा कर रहे हैं। पुलिस की पूछताछ में ये भी जानकारी मिली है कि मेट्रो शहरों में होने वाली रेव पार्टियों में भी ऐसी दवाओं को खपाया जा रहा है। दोनों की अलग-अलग ओवरडोज लेकर नशा करते हैं। ऐसे भी आदी लोग हैं, जो कोडीन सिरप में नींद की गोली मिलाकर उपयोग करते थे। जानकार बताते हैं कि इससे दिमाग में नशा चढ़ जाता है और गंध तक नहीं आती।
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नकली दवाओं के सरगना विजय का बड़ा सिंडिकेट
शहर में नकली दवाओं के सरगना विजय गोयल का बड़ा सिंडीकेट है। यह फर्जी बिल पर कच्चा माल और नशे के सिरप व दवाओं का कारोबार करता है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के सीओ इरफान नासिर खान ने बताया कि विजय गोयल आईकॉन सिटी, जगदीशपुरा का है। बिचपुरी में पत्नी रेखा गोयल के नाम पर फर्म पंजीकृत करा रखी है। पहले उसका लाइसेंस निरस्त हुआ था, इसके बाद उसने पत्नी के नाम से फर्म खोल ली।
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पुलिस ने रेखा गोयल को गिरफ्तार किया है। उससे पता चला कि विजय के दो भाई हैं। वह भी दवा व्यापार से जुड़े हैं। उन्होंने अपनी दुकान खोल रखी हैं। विजय हर छह महीने में ठिकाना बदल देता है। डमी कंपनी बनाकर रखता है। जिस दवा की मांग होती है, वही दवा बनवाता है। पुलिस विजय गोयल के मोबाइल की काॅल डिटेल खंगाल रही है।
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जांच में ये भी तथ्य आए सामने
कई लोग दवा के इस संदिग्ध कारोबार से जुड़े हैं। इनमें वे भी हैं जिनके एक बार लाइसेंस निरस्त हुए तो किसी और नाम से लाइसेंस ले लिया। ऐसे लोग भी हैं जो दुकान का नाम बदलकर दवा का कारोबार कर रहे हैं। विजय गोयल हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, तेलंगाना, गुजरात व महाराष्ट्र से माल मंगवाता है। कंपनी से सीधे माल मंगाकर दवा को अपने तरीके का बनाकर अपनी पैकिंग कर भेजता है।