दवाओं का काला कारोबार: नकली सिरप पर नामी कंपनियों के असली बार कोड, रोज ढाई लाख टैबलेट की खपत; पुलिस भी हैरान
आगरा में दवाओं के काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। यहां नकली सिरप पर नामी कंपनियों के असली बार कोड लगाकर बिक्री की जा रही थी। रोज ढाई लाख टैबलेट की खपत थी। यह रैकेट देखकर पुलिस भी हैरान रह गई।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में सिकंदरा स्थित फैक्टरी में फेंसेडिल और कोडिस्टार सिरप बड़ी मात्रा में तैयार हो रहा था। इन पर नामी कंपनियों के बार कोड लगाकर सप्लाई करते थे। पैकेजिंग पिछले वर्ष की हो रही थी। इससे औषधि विभाग के अधिकारी हैरान हैं कि नकली कफ सिरप पर असली बार कोड कहां से आया। बिचपुरी की फैक्ट्री में एल्प्रासेफ और एल्जोसेफ की रोज ढाई लाख टैबलेट का उत्पादन और खपत हो रही था। सरगना विजय गोयल फरार है।
डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि नकली दवाओं की फैक्टरी मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दीवान सिंह, रोहित, नरेंद्र शर्मा, मुकेश, रेखा गोयल, अजीत पाराशर और सनी राज हैं। नरेंद्र शर्मा साझीदार है। दीवान सिंह आगरा कैंट स्टेशन का पार्सल एजेंट है। अजीत पाराशर ने अपनी जगह पर सिकंदरा में फैक्टरी संचालित कराई थी। रोहित नरेंद्र का चालक है। मुकेश नौकरी करता है। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया।
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डीसीपी सिटी ने बताया कि सिकंदरा की फैक्टरी में बनने वाले कफ सिरप पर एक बार कोड मिला था, जिसको स्कैन किया गया। उसमें कंपनी का नाम आया। सिरप और नींद की गोलियों पर केंद्र सरकार ने जून 2023 में रोक लगाई थी। मगर, इन सिरप पर बार कोड स्कैन करने पर तैयार करने की तिथि वर्ष 2022 आ रही थी, जिससे यह दवाएं वर्ष 2024 तक वैध हो जाएंगी। अब पुलिस पता कर रही है कि आखिर बार कोड कहां से मिल रहे थे ? विजय गोयल की गिरफ्तारी के बाद ही यह पता चलेगा।
12 घंटे काम, फिर गोलियों की सप्लाई
बिचपुरी की फैक्टरी में नकली टैबलेट बनती थीं। मशीनों की उत्पादन क्षमता 12 घंटे में दो से ढाई लाख टेबलेट की है। फैक्टरी में 12 घंटे तक काम होता था। इसके बाद बाजार में दवाओं की सप्लाई कर दी जाती थी। नरेंद्र शर्मा के मुताबिक उसका काम माल तैयार करना था। खपाने की जिम्मेदारी विजय गोयल की थी।
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मकान गिरवी रख 20 लाख का लिया लोन
पुलिस की पूछताछ में नरेंद्र शर्मा ने ज्यादा जानकारी नहीं दी। बताया कि वह खराद का काम करता था। 10 महीने पहले एक शादी समारोह में विजय गोयल से मुलाकात हुई थी। गोयल ने उसे मोटे मुनाफे का लालच दिया। कहा कि 20 लाख रुपये निवेश कर दे। सारा कर्ज पट जाएगा।
फैक्टरी में प्रोटीन और मल्टी विटामिन की गोलियां बनाने की बात कही थी। उसने घर गिरवी रखकर 20 लाख रुपये का लोन लिया। हिमाचल के बद्दी से पुरानी मशीनें खरीदकर काम शुरू करा दिया। कुछ महीने बाद विजय ने सात लाख रुपये लौटा दिए। इससे उसका लालच बढ़ गया। बाद में पता चला कि नकली दवा बना रहा है।
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गिरफ्तार आरोपी और पता
- दीवान सिंह निवासी गांव सकतपुर, किरावली।
- रोहित निवासी सेक्टर-1, आवास विकास कॉलोनी।
- नरेंद्र शर्मा निवासी शंकरगढ़ की पुलिया, केदार नगर।
- मुकेश निवासी गांव भुरैरा, खेरागढ़।
- रेखा गोयल (पत्नी विजय गोयल) निवासी आईकोन सिटी, जगदीशपुरा।
- अजीत पाराशर निवासी भोगीपुरा, थाना शाहगंज।
- सनी राज निवासी सरल नगर, नगला पदी।
यह कच्चा माल हुआ बरामद
डाइवेसिक कैल्शियम पाउडर, फार्मास्युटिकल एक्सीपिएंट, अल्प्राजोलम, नारंगी पाउडर, माइक्रो क्रिस्टालाइन एलुलोस, एल्युमिनियिम फाइल पैकिंग, पाइराजोनिक सिलिका, टेलकम पाउडर, सोडियम स्टार्च ग्लाइको, लेक्टोसमोनो हाईड्रेड, ड्राईसाइक्लोनिन हाहड्रो क्लोराइड।
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यह हुआ बरामद
बिचपुरी फैक्टरी में टेबलेट एल्प्रासेफ और एल्जोसेफ 1.25 लाख, फैंसीडिल सिरप 100 एमएल की 1838 शीशी, कोडिस्टार सिरप की 960 शीशी, वैल्शीरेक्स की 2039 शीशी, ओसीरेक्स की 1165 शीशी, कुफकेयर्ड टी की 200 शीशीा, आनरेक्स की 1080 शीशी सभी 100 एमएल, कच्चा माल 242 किलोग्राम, पैकिंग माल 32 किलोग्राम, खाली शीशी 3744, सिपर बाक्स 20, प्लास्टिक टैंक 200 लीटर, 500 लीटर का मिक्सिंग टैंक सहित अन्य माल तैयार करने में प्रयुक्त सामान बरामद किया गया।
सिकंदरा में फेंसेडिल सिरप की 200, ओसीरेक्स सिरप की 230, ओनेरेक्स सिरप 120 शीशी, 8880 पैक गोलियां, 600 बिना प्रिंट अल्प्रासेफ बिना पैक और बिना लेबल नारंगी रंग की 32 किलोग्राम टेबलेट, नशे की गोली बनाने में प्रयोग किया जाने वाला विभिन्न प्रकार का पाउडर और रसायन 700 किलोग्राम आदि बरामद किया गया।