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UP: जवाहर पुल के लिए तोड़ दिए गए थे गेटवे ऑफ रामबाग, 58 साल बाद होगा इनका संरक्षण; खर्च होंगे 60 लाख रुपये

Tue, 21 Jul 2026 10:53 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 21 Jul 2026 10:53 AM IST
सार

जवाहर पुल के निर्माण के दौरान 58 साल पहले ध्वस्त किए गए गेटवे ऑफ रामबाग के अवशेषों का अब संरक्षण किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस परियोजना पर करीब 60 लाख रुपये खर्च करेगा।

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ASI to Restore Remains of Gateway of Rambagh Demolished for Jawahar Bridge 58 Years Ago
गेटवे ऑफ रामबाग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

58 साल पहले यमुना नदी पर बनाए गए जवाहर पुल के निर्माण के लिए जोहरा बाग और रामबाग के बीच में बने गेटवे ऑफ रामबाग के बड़े हिस्से तथा जोहरा बाग की दीवार को ढहा दिया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जवाहर पुल के नीचे मौजूद गेटवे ऑफ रामबाग के अवशेष सहेजेगा। इस पर 60 लाख रुपये खर्च होंगे। पहली बार इसका संरक्षण किया जाएगा।
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मुगलिया रिवरफ्रंट गार्डन का हिस्सा जोहरा बाग और रामबाग के बीच में आवागमन के लिए गेटवे ऑफ रामबाग बना हुआ था। दोनों मुगलकालीन बागीचों की दीवारों के बीच प्रवेश द्वार था, जिसके बड़े हिस्से को वर्ष 1968-69 में ध्वस्त कर दिया गया। इसे नाम बेशक गेटवे ऑफ रामबाग दिया गया है लेकिन जोहरा बाग की उत्तरी दीवार का यह हिस्सा है। रामबाग की हाईवे किनारे की दीवार के सहारे बने रास्ते से पुल के नीचे तक पहुंचा जा सकता है। एएसआई के अधिकारियों ने ध्वस्तीकरण के बाद फिर इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया था।

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ऑस्ट्रियाई इतिहासकार एबा कोच की पुस्तक में पुल निर्माण के दौरान ध्वस्त करने का ब्योरा दिया गया है। ककइया ईंटों से बने गेटवे के अवशेष पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पहली बार संरक्षण कार्य कराएगा। एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने बताया कि गेटवे ऑफ रामबाग के पुल के नीचे अवशेषों को सहेजा जाएगा। करीब 60 लाख रुपये इस पर खर्च होंगे। वार्षिक संरक्षण योजना में इसे मंजूरी मिल चुकी है।

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हाईवे और पुल के निर्माण में धरोहर हो गई नष्ट
11 दिसंबर 1969 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने यमुना नदी पर आरसीसी के पुल का लोकार्पण किया था। इसी पुल का शिलान्यास देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। पुल के निर्माण में रामबाग की ओर गेटवे बाधा बना तो इसके साथ जोहरा बाग की बाउंड्री भी ध्वस्त कर दी गई। जोहरा बाग के उत्तर पश्चिमी कोने के टावर और दीवार के इसी हिस्से के अवशेष बाकी है, जहां तबेला बना हुआ था। यहां भूसा भरा हुआ था। नेशनल हाईवे-2 के निर्माण के दौरान 1997-98 में इसका बाकी हिस्सा भी ढहा दिया गया।

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रामबाग से जोहरा बाग जाने का था यह रास्ता
अठारहवीं शताब्दी में बने जयपुर नक्शे के आधार पर रामबाग से जोहरा बाग जाने के लिए गेटवे ऑफ रामबाग प्रमुख रास्ता था। मुगल काल में वर्ष 1620 में जब जोहरा बाग मुमताज महल के पास आया और फिर जहांआरा को मिला, तब वह रामबाग से ज्यादा खूबसूरत और बेहतर था। वर्ष 1835 में अंग्रेज यात्री फैनी पार्क्स ने इस बाग को सैयद बाग का नाम दिया और कहा कि लाल बलुआ पत्थर से बना बाग रामबाग से सुंदर और अच्छी हालत में था।

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