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Health News: खट्टी डकार और पेट में बन रहा एसिड तो हो जाएं सावधान, इन दो गंभीर बीमारियों के हैं ये संकेत

Tue, 21 Jul 2026 10:29 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 21 Jul 2026 10:29 AM IST
सार

एसएन मेडिकल कॉलेज में आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार खट्टी डकार और एसिडिटी अस्थमा व फेफड़ों की बीमारियों का संकेत हो सकती है। पेट के 20 फीसदी मरीजों में यह समस्या मिल रही है।

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Frequent Acidity and Sour Burps May Signal Asthma and Serious Digestive Disorders
खट्टी डकार और पेट में बन रहा एसिड तो हो जाएं सावधान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पेट का हाजमा खराब रहता है। खट्टी डकार आती हैं। एसिडिटी भी है तो इसे गंभीरता से लें। इससे अस्थमा-सांस रोग की परेशानी बन सकती है। एसोसिएशन ऑफ फिजीशियंस ऑफ इंडिया (एपीआई) की ओर से एसएन मेडिकल कॉलेज में गेस्ट्रो पल्मोनरी विषय पर बेविनार कर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। डॉक्टरों ने पौष्टिक-फाइबरयुक्त और मोटे अनाज के उपयोग पर जोर दिया है।
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एसएन के पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ बंसल ने बताया कि गेस्ट्रो-पल्मोनरी पाचन तंत्र और फेफड़े- श्वसन तंत्र से जुड़ी हुई बीमारी हैं। पेट और फेफड़ों की नली पास होती है। पेट में लंबे समय तक ज्यादा एसिड बनने से कई बार गले तक आ जाता है। सोते समय ये एसिड सांस नली तक पहुंच जाता है। इससे फेफड़ों में जलन-सूजन की दिक्कत बनने से अस्थमा-सांस रोग की परेशानी बन कती है। इसे इसे गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी ) बोलते हैं। भोजन की नली में संक्रमण का भी खतरा है। पेट रोग के 20 फीसदी मरीजों में ये दिक्कत मिल रही है। इनमें से 2-3 फीसदी में अस्थमा-सांस रोग के प्रारंभिक लक्षण मिल रहे हैं।

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डॉ. अखिलेश सिंह ने पेट में टीबी की बीमारी के बारे में बताया कि ये एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी होती है, ये शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। गुरुग्राम के डॉ. गौरदास चौधरी ने जीईआरडी की जांच करने और इससे बचाव के बारे में जानकारी दी। न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष और एपीआई सचिव डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि बेविनार में विशेषज्ञों के व्याख्यान ने प्रशिक्षु चिकित्सकों को भी नई तकनीक और इलाज की जानकारी मिली। कार्यक्रम निदेशक डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि फास्टफूड, तला हुआ भोजन और देर रात भोजन से पेट रोग पनप रहा है। बच्चों-किशोरों को भी दिक्कत आ रही है। बेविनार में डॉ. अंजना पांडे, डॉ. मनीष बंसल, डॉ. मृदुल चतुर्वेदी, डॉ. हरी सिंह, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम, डॉ. सौरभ शर्मा, डॉ. शिवांग शर्मा, डॉ. अनुकूल, डॉ. नितिन, डॉ. पारस, डॉ. असरा, डॉ. नवीन, डॉ. सिद्धांत आदि मौजूद रहे।

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गेस्ट्रो पल्मोनरी के ये हैं लक्षण:
- सीने में जलन होना, खट्टी डकार आना
- एसिड या भोजन गले में वापस आना।
- गले में दर्द, खांसी और निगलने में परेशानी।
- पेट फूलना, हाजमा ठीक न रहना।

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इन बातों का रखें ध्यान:
- एक बार में ज्यादा न खाएं, इसे तीन-चार बार में खाएं।
- भोजन के बाद जरूर टहलें, लेटने और बैठने से बचें।
- गर्दन में दर्द न हो तो छह इंच का तकिया लगाकर सोएं।
- फास्टफूड, तले हुआ भोजन से शाम को पेट न भरें।
- शराब, धूम्रपान और गुटखा से बचें।
- भोजन में हरी सब्जी, सलाद, फल, मोटा अनाज अधिक उपयोग करें।

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