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Paush Month 2024: पौष माह आरम्भ, जानिए महत्व और इस माह क्या करने से मिलते हैं शुभ फल
Mon, 16 Dec 2024 02:14 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 16 Dec 2024 02:14 PM IST
सार
पौष मास को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है इसलिए इस माह में पितरों के लिए तर्पण, गंगा स्नान और दान करना शुभ माना जाता है।
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सूर्यदेव को समर्पित रविवार के व्रत को पौष माह में अत्यधिक फलदायी माना गया है।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
Paush Month 2024: हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह साल का दसवां महीना होता है जो मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। वैदिक पंचाग के अनुसार, इस साल पौष माह की शुरुआत 16 दिसंबर से होगी। इस महीने को धर्म, तप, उपवास और साधना का विशेष समय माना गया है। पौष मास को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है इसलिए इस माह में पितरों के लिए तर्पण, गंगा स्नान और दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से पौष माह का महत्व इस प्रकार है।
1. सूर्योपासना का समय
पौष माह में सूर्य का पूजन विशेष महत्व रखता है। इस महीने में सूर्य देवता की पूजा से जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और सफलता प्राप्त होती है। सूर्यदेव को समर्पित रविवार के व्रत को पौष माह में अत्यधिक फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पौष माह में सूर्य को अर्घ्य देने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
2. तप और साधना का महीना
पौष माह को तपस्या और साधना का महीना कहा गया है। ठंड के इस समय में उपवास, ध्यान और योग करने से आत्मा की शुद्धि होती है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि इस समय किया गया तप और ध्यान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। इस महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान और ध्यान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
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3. पितरों की शांति का अवसर
पौष माह में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस महीने में किया गया तर्पण पितरों को संतुष्टि और शांति प्रदान करता है। इस महीने में अमावस्या का दिन पितरों के लिए विशेष माना गया है, जब उनके निमित्त दान-पुण्य किया जाता है।
4. मांगलिक कार्यों का निषेध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष माह में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं। इस महीने को देवताओं के विश्राम का समय माना जाता है और इसलिए इसे धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के लिए अधिक उपयुक्त समझा गया है।
5. दान और पुण्य का महत्व
पौष माह में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में जरूरतमंदों को गर्म कपड़े, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसे विशेष रूप से आर्थिक और सामाजिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
6. भागवत कथा और सत्संग का समय
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पौष माह में भागवत कथा, रामायण पाठ और सत्संग सुनने से व्यक्ति के पाप समाप्त होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस महीने में भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है।
यह भी पढ़ें- आज का राशिफल और वार्षिक राशिफल 2025
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1. सूर्योपासना का समय
पौष माह में सूर्य का पूजन विशेष महत्व रखता है। इस महीने में सूर्य देवता की पूजा से जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और सफलता प्राप्त होती है। सूर्यदेव को समर्पित रविवार के व्रत को पौष माह में अत्यधिक फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पौष माह में सूर्य को अर्घ्य देने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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2. तप और साधना का महीना
पौष माह को तपस्या और साधना का महीना कहा गया है। ठंड के इस समय में उपवास, ध्यान और योग करने से आत्मा की शुद्धि होती है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि इस समय किया गया तप और ध्यान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। इस महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान और ध्यान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
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3. पितरों की शांति का अवसर
पौष माह में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस महीने में किया गया तर्पण पितरों को संतुष्टि और शांति प्रदान करता है। इस महीने में अमावस्या का दिन पितरों के लिए विशेष माना गया है, जब उनके निमित्त दान-पुण्य किया जाता है।
4. मांगलिक कार्यों का निषेध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष माह में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं। इस महीने को देवताओं के विश्राम का समय माना जाता है और इसलिए इसे धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के लिए अधिक उपयुक्त समझा गया है।
5. दान और पुण्य का महत्व
पौष माह में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में जरूरतमंदों को गर्म कपड़े, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसे विशेष रूप से आर्थिक और सामाजिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
6. भागवत कथा और सत्संग का समय
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पौष माह में भागवत कथा, रामायण पाठ और सत्संग सुनने से व्यक्ति के पाप समाप्त होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस महीने में भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है।
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