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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Rishi Panchami Today 15 September 2026 Know Who Is Saptrishi in Hindu Religion And Pujan Vidhi Rituals Story

ऋषि पंचमी आज, कौन हैं सप्तऋषि और इनके पूजन से क्या- क्या मिलता है फल ?

Tue, 15 Sep 2026 12:45 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 15 Sep 2026 12:45 PM IST
सार

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है, इसमें सप्त ऋषियों की पूजा करने का विशेष विधान होता है। 

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Rishi Panchami Today 15 September 2026 Know Who Is Saptrishi in Hindu Religion And Pujan Vidhi Rituals Story
Rishi Panchami 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

विस्तार

आज ऋषि पंचमी का पर्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी ऋषि पंचमी का पर्व इस वर्ष 15 सितंबर को मनाया जाएगा। मान्यता है कि जो कोई भी व्यक्ति इस दिन ऋषि-मुनियों का स्मरण कर उनका पूजन करता है वह सभी प्रकार के पापों से मुक्त होकर निर्मल हो जाता है। यह दिन हमारे पौराणिक ऋषि-मुनि वशिष्ठ, कश्यप, विश्वामित्र, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, और भारद्वाज इन सात ऋषियों के पूजन के लिए खास माना गया है। 

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ऋषि पंचमी पर महिलाएं गंगा स्नान करें तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार इस दिन चारों वर्ण की स्त्रियों को यह व्रत करना चाहिए।यह व्रत शरीर के द्वारा अशौचावस्था में किए गए स्पर्श तथा अन्य पापों के प्रायश्चित के रूप में किया जाता है। स्त्रियों से जाने-अनजाने में रजस्वला अवस्था में पूजा, घर के कार्य, पति को स्पर्श आदि हो जाता है तो इस व्रत से उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।
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धर्मग्रंथों में भगवान विष्णु के दस अवतार बताए गए हैं। इनमें पहला अवतार मत्स्य का था। कथा है कि मत्स्य अवतार के समय इस धरती पर जल प्रलय आया था। उस समय राजा मनु के साथ सप्तऋषि एक विशाल नाव में सवार थे और मत्स्य अवतार में भगवान विष्णु ने इन सभी के प्राणों की रक्षा की थी। पुराणों में सप्तऋषियों के संबंध में कई श्लोक प्रचलित है। उनमें से एक श्लोक ये है।
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कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
दहंतु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः॥


इस श्लोक में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वसिष्ठ ऋषियों के नाम बताए गए हैं। इनके नामों के जाप से सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं।

1. कश्यप ऋषि
पहले ऋषि हैं कश्यप। कश्यप ऋषि की 17 पत्नियां थी। अदिति नाम की पत्नी से सभी देवता और दिति नाम की पत्नी से दैत्यों की उत्पत्ति मानी गई है। शेष पत्नियों से भी अलग-अलग जीवों की उत्पत्ति हुई है।

2. अत्रि ऋषि
दूसरे ऋषि हैं अत्रि। त्रेतायुग में श्रीराम, लक्ष्मण और सीता वनवास समय में अत्रि ऋषि के आ़़श्रम में रूके थे। इनकी पत्नी अनसूया थी। अत्रि और अनसूया के पुत्र भगवान दत्तात्रेय हैं।

3. ऋषि भारद्वाज
तीसरे ऋषि हैं भारद्वाज। इनके पुत्र द्रोणाचार्य थे। भारद्वाज ऋषि ने आयुर्वेद सहित कई ग्रंथों की रचना की थी।
 

4. ऋषि विश्वामित्र
चौथे ऋषि हैं विश्वामित्र। इन्होंने गायत्री मंत्र की रचना की थी। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के गुरु थे। विश्वामित्र ही श्रीराम और लक्ष्मण को सीता के स्वयंवर में ले गए थे। विश्वामित्र जब तप कर रहे थे तब मेनका ने इनका तप भंग किया था।

5. गौतम ऋषि
पांचवें ऋषि हैं गौतम। अहिल्या गौतम ऋषि की पत्नी थीं। गौतम ऋषि ने ही शाप देकर अहिल्या को पत्थर बना दिया था। श्रीराम की कृपा से अहिल्या ने पुन: अपना रूप प्राप्त किया था।

6.ऋषि जमदग्नि
छठे ऋषि हैं जमदग्नि। जमदग्नि और रेणुका के पुत्र हैं भगवान परशुराम। परशुराम ने पिता की आज्ञा से माता रेणुका का सिर काट दिया था। इससे जमदग्नि प्रसन्न हुए और वर मांगने के लिए कहा था। तब परशुराम ने माता रेणुका का जीवन मांग लिया। जमदग्नि ने अपने तप के बल से रेणुका को फिर से जीवित कर दिया था।

7.ऋषि वशिष्ठ
सातवें ऋषि हैं वशिष्ठ। त्रेता युग में ऋषि वसिष्ठ राजा दशरथ के चारों पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के गुरु थे।
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