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साल की अंतिम कालाष्टमी आज, जानिए भगवान काल भैरव की पूजा का महत्व, विधि और नियम
Mon, 23 Dec 2024 05:44 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 23 Dec 2024 05:44 AM IST
सार
Kalashtami Vrat: 22 दिसंबर को वर्ष 2024 की अंतिम कालाष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और शांति व समृद्धि प्राप्त होती है।
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भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को समाप्त करने के लिए काल भैरव का अवतार लिया।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मासिक कालाष्टमी का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 22 दिसंबर को दोपहर 02 बजकर 31 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 23 दिसंबर को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर होगा। ऐसे में 22 दिसंबर को वर्ष 2024 की अंतिम कालाष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और शांति व समृद्धि प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, काल भैरव के प्रति श्रद्धा रखने वाला भक्त भगवान शिव के विशेष आशीर्वाद का पात्र बनता है।
महत्व
कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव की उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है। काल भैरव, भगवान शिव के रौद्र रूप माने जाते हैं, जो अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की पूजा से जीवन के सभी संकट, रोग, भय और शत्रुओं का नाश होता है। कालाष्टमी पर उनकी पूजा से काल दोष, पितृ दोष और शनि दोष का निवारण होता है। साथ ही, भक्त को दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
शास्त्रीय मान्यता
शिव पुराण और कालिका पुराण में उल्लेख है कि भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को समाप्त करने के लिए काल भैरव का अवतार लिया। उनके इस रूप में समय और मृत्यु पर नियंत्रण है और वे न्याय के देवता भी माने जाते हैं। कालाष्टमी पर उनकी पूजा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती है।
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कालाष्टमी के दिन प्रातः काल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और मन की शुद्धता का ध्यान रखें। पूजास्थल पर भगवान काल भैरव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।यदि घर पर नहीं करना चाहें तो कालभैरव के मंदिर में जाकर पूजा सम्पन्न करें। दीपक जलाकर गंगाजल से अभिषेक करें और भगवान को पुष्प (विशेषकर गुलाब या आक), बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेद्य (गुड़, तिल, तेल से बनी वस्तु), और काले तिल अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान काल भैरव के मंत्रों का जाप करें, जिनमें “ॐ कालभैरवाय नमः” प्रमुख हैं। पूजा के बाद भगवान को इमरती, जलेबी या तिल से बनी वस्तुएं भोग के रूप में चढ़ाएं। पूजा के अंत में भगवान की आरती करें और काले कुत्ते को भोजन कराएं। इस दिन गरीबों को काले वस्त्र, तिल और तेल दान करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा के नियम
कालाष्टमी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।झूठ, हिंसा और नकारात्मक विचारों से बचें।भगवान काल भैरव की पूजा रात्रि में करना अधिक फलदायी होता है।शराब और मांसाहार का त्याग करें। पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान की आराधना करें।
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महत्व
कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव की उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है। काल भैरव, भगवान शिव के रौद्र रूप माने जाते हैं, जो अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की पूजा से जीवन के सभी संकट, रोग, भय और शत्रुओं का नाश होता है। कालाष्टमी पर उनकी पूजा से काल दोष, पितृ दोष और शनि दोष का निवारण होता है। साथ ही, भक्त को दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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शास्त्रीय मान्यता
शिव पुराण और कालिका पुराण में उल्लेख है कि भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को समाप्त करने के लिए काल भैरव का अवतार लिया। उनके इस रूप में समय और मृत्यु पर नियंत्रण है और वे न्याय के देवता भी माने जाते हैं। कालाष्टमी पर उनकी पूजा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती है।
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पूजा विधिकालाष्टमी के दिन प्रातः काल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और मन की शुद्धता का ध्यान रखें। पूजास्थल पर भगवान काल भैरव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।यदि घर पर नहीं करना चाहें तो कालभैरव के मंदिर में जाकर पूजा सम्पन्न करें। दीपक जलाकर गंगाजल से अभिषेक करें और भगवान को पुष्प (विशेषकर गुलाब या आक), बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेद्य (गुड़, तिल, तेल से बनी वस्तु), और काले तिल अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान काल भैरव के मंत्रों का जाप करें, जिनमें “ॐ कालभैरवाय नमः” प्रमुख हैं। पूजा के बाद भगवान को इमरती, जलेबी या तिल से बनी वस्तुएं भोग के रूप में चढ़ाएं। पूजा के अंत में भगवान की आरती करें और काले कुत्ते को भोजन कराएं। इस दिन गरीबों को काले वस्त्र, तिल और तेल दान करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा के नियम
कालाष्टमी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।झूठ, हिंसा और नकारात्मक विचारों से बचें।भगवान काल भैरव की पूजा रात्रि में करना अधिक फलदायी होता है।शराब और मांसाहार का त्याग करें। पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान की आराधना करें।
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