Hartalika Teej Or Ganesh Chaturthi: 14 सितंबर सोमवार को श्री गणेश चतुर्थी है। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 14 सितंबर को प्रातः काल 7 बजकर 6 मिनट पर होगा और 15 सितंबर को प्रातः काल 7 बजकर 44 पर चतुर्थी तिथि का समापन होगा, इसलिए मध्याह्न व्यापनी चतुर्थी में 14 सितंबर को श्री गणेश जी की स्थापना होगी और इसी के साथ 11 दिवसीय श्री गणेश महोत्सव का शुभारंभ होगा। घरों और पंडालों में श्री गणेश जी की मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 50 मिनट से दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। 25 सितंबर अनंत चतुर्दशी को श्री गणेश जी की प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। इसके साथ ही हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया का व्रत उदयातिथि के अनुसार 13 और 14 सितम्बर को स्पर्श कर रहा है। तृतीया तिथि का प्रारम्भ 13 सितम्बर रविवार को प्रातः 07:08 बजे से होगा और तृतीया तिथि का समापन 14 सितम्बर सोमवार को प्रातः 07:06 बजे होगा।
तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग: श्री गणपति स्थापना के साथ होगा हरतालिका तीज का व्रत, पूजा के बनेंगे खास मुहूर्त
Hartalika Teej Or Ganesh Chaturthi: 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पावन पर्व एक साथ मनाया जा रहा है। एक ही दिन दो बड़े धार्मिक पर्वों का यह खास संयोग भक्तों के लिए विशेष माना जा रहा है।
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी शुभ संयोग
तृतीया तिथि यदि पूर्ववेध द्वितीया से युत हो तो ग्राह्य नहीं होती है चतुर्थी से युत तृतीया को ही उत्तम एवं शुद्ध माना गया है। 13 सितम्बर को सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि विद्यमान है तृतीया 07:08 प्रातः से प्रारम्भ होगी। इसलिए 13 सितम्बर की तृतीया द्वितीया-विद्धा हो जाती है।
व्रत नियम: 14 सितंबर को हरतालिका तीज, पहली बार व्रत कर रही हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
गणपति-उमा-संवाद एवं मातृ-पूजन योग के आधार पर चतुर्थी-युक्ता तृतीया को "उमा-महेश्वर" पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। 14 सितम्बर को सूर्योदय के पश्चात् तृतीया समाप्त होकर गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी का आरम्भ हो रहा है, जो कि गणेश-गौरी योग का निर्माण करता है। इसलिए उदयातिथि14 सितंबर सोमवार सूर्योदय-व्यापिनी तिथि उदयातिथि होने से 14 सितम्बर को ही मुख्य व्रत, संकल्प एवं प्रातःकाल पूजन का विधान शास्त्रसम्मत रहेगा।
- हरतालिका तीज 14 सितंबर, सोमवार के पूजन हेतु शास्त्रीय गणना के अनुसार प्रातःकाल एवं प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त के आधार से प्रातःकाल पूजा मुहूर्त उदयातिथि एवं चतुर्थी-युक्ता प्रातःकाल में उदयातिथि के दौरान तृतीया तिथि विद्यमान रहने के कारण यह समय संकल्प एवं मुख्य पूजन के लिए श्रेष्ठ है:
- शुभ मुहूर्त अमृत व लाभ चौघड़िया: प्रातः 06:05 बजे से प्रातः 07:06 बजे तक
- विशेष : तृतीया तिथि 14 सितम्बर को प्रातः 07:06 बजे तक ही रहेगी।
- अतः शास्त्रानुसार प्रातःकालीन संकल्प एवं तृतीया-स्पर्शी पूजन 07:06 से पूर्व पूर्ण कर लेना सर्वोत्तम है। इसके पश्चात चतुर्थी तिथि का प्रवेश होगा।
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त
14 सितंबर सोमवार - संध्या पूजन: प्रदोष काल समय सायंकाल 06:14 बजे से रात्रि 08:34 बजे तक इस समय चतुर्थी तिथि रहेगी, जो गणेश-गौरी पूजन एवं संध्या आरती के लिए उत्तम है।
हरतालिका तीज पारण का समय 15 सितंबर मंगलवार
शास्त्रों और धर्मसिन्धु के अनुसार हरतालिका तीज के निर्जला व्रत का पारण भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि में सूर्योदय के पश्चात् किया जाता है। इसलिए 15 सितंबर मंगलवार को प्रातः काल 6 बजे के बाद व्रत पारण करना उचित होगा।
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